हाईकोर्ट की सख्ती के बाद यूपी सरकार ने दिए निर्देश, कार्यवाहक प्रधानाचार्यों को मिलने लगेगा नियमित के समान वेतन
एडेड (अशासकीय सहायता प्राप्त) माध्यमिक स्कूलों के कार्यवाहक प्रधानाचार्य जल्द ही नियमित प्रधानाचार्यों के समान वेतन पाने लगेंगे। शासन के कड़े रुख के बाद मंडल स्तर पर इसके लिए आदेश जारी होने शुरू हो गए हैं।

Allahabad Highcourt Order: इलाहाबाद हाईकोर्ट की सख्ती के बाद यूपी सरकार ऐक्शन में आ गई है। अब एडेड (अशासकीय सहायता प्राप्त) माध्यमिक स्कूलों के कार्यवाहक प्रधानाचार्य जल्द ही नियमित प्रधानाचार्यों के समान वेतन पाने लगेंगे। शासन के कड़े रुख के बाद मंडल स्तर पर इसके लिए आदेश जारी होने शुरू हो गए हैं। मंगलवार को आजमगढ़ मंडल में संयुक्त शिक्षा निदेशक ने अपने मंडल के जिला विद्यालय निरीक्षकों को जिले के एडेड स्कूल प्रबन्धनों से तत्काल प्रस्ताव मंगाने के निर्देश दिए हैं।
इसी प्रकार दो अन्य मंडलों के संयुक्त शिक्षा निदेशकों ने इस प्रकरण में एक दो दिनों के भीतर जिला विद्यालय निरीक्षकों को पत्र भेजकर उनके जिले से प्रस्ताव मंगाने के लिए पत्रावलियों पर सहमति दे दी है। दरअसल, हाईकोर्ट ने समान कार्य के लिए समान वेतन दिए जाने का आदेश देते हुए कहा था कि यदि किसी वरिष्ठ शिक्षक के हस्ताक्षर प्रमाणित हो चुके हैं और वह कार्यवाहक प्रधानाचार्य के रूप में कार्य कर रहा है तो ऐसे शिक्षक को हस्ताक्षर प्रमाणन के तीन माह बाद से लेकर नियमित प्रधानाचार्य की नियुक्ति होने तक अथवा उसके सेवानिवृत्त होने तक, प्रधानाचार्य पद का पूर्ण वेतनमान दिया जाएगा। कोर्ट ने “समान कार्य के लिए समान वेतन” के सिद्धांत को आधार बनाते हुए माना कि जब कोई शिक्षक वास्तविक रूप से प्रधानाचार्य की जिम्मेदारियां निभा रहा है, तो उसे उस पद के अनुरूप वेतन मिलना ही चाहिए।
प्रधानाचार्य का पद केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि मूलतः शैक्षिक प्रकृति का है
न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रधानाचार्य का पद केवल प्रशासनिक न होकर मूलतः शैक्षिक प्रकृति का है, अतः यह सिद्धांत इस पद पर पूर्णतः लागू होता है। कोर्ट के आदेशों के बाद शासन ने सभी मंडलीय शिक्षा निदेशकों को कार्यवाहक रूप में कार्य कर रहे प्रधानाचार्यों को नियमित के समान वेतन देने के आदेश जारी कर दिए लेकिन मंडल से लेकर जिले स्तर तक के अधिकारी शासन के आदेशों को लेकर टालमटोल करते रहे। दो दिन पूर्व शासन ने सभी मंडलीय एवं जिलों के ऐसे अधिकारियों के नाम चेतावनी जारी कर कहा कि अगर वे और अधिक इस प्रकरण में विलम्ब करते हैं तो उनके विरुद्ध कार्रवाई होगी।
75 फीसदी एडेड माध्यमिक स्कूलों कार्यवाहक प्रधानाचार्य
प्रदेश में कुल 4512 एडेड माध्यमिक विद्यालय हैं, जिनमें से 3500 से अधिक विद्यालयों में नियमित प्रधानाचार्य नहीं है। इन विद्यालयों में कई वर्षों से कार्यवाहक प्रधानाचार्यों से नियमित प्रधानाचार्य का कार्य लिया जा रहा है जबकि वेतन उन्हें सहायक अध्यापक या फिर प्रवक्ता पद का ही दिया जाता है। इससे कार्यवाहक प्रधानाचार्यों में भारी रोष था, जिसके कारण में कोर्ट की शरण में और कोर्ट ने उनके पक्ष में निर्णय दिया।
क्या कहते हैं शिक्षक नेता
माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश प्रवक्ता ओम प्रकाश त्रिपाठी का कहना है कि यह निर्णय उन हजारों शिक्षकों के लिए अत्यंत राहतकारी और महत्वपूर्ण है, जो वर्षों से कार्यवाहक प्रधानाचार्य के रूप में सेवाएं दे रहे थे, किंतु उन्हें नियमित वेतनमान का लाभ नहीं मिल पा रहा था।




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