सीएम योगी की सख्ती के बाद स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर ऐक्शन में UPPCL, जांच के लिए बनाई कमेटी
सीएम योगी की सख्ती के बाद पावर कॉरपोरेशन ने स्मार्ट मीटर की गुणवत्ता जांचने के लिए चार सदस्यीय समिति बना दी है। यह समिति दस दिनों में पावर कॉरपोरेशन को स्मार्ट मीटरों का तकनीकी परीक्षण करके उसकी गुणवत्ता के संबंध में रिपोर्ट सौंपेगी।

Smart Prepaid Meter: स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर आ रहीं शिकायतों को देखते हुए सीएम योगी ऐक्शन में आ गए हैं। सीएम योगी की सख्ती के बाद पावर कॉरपोरेशन ने स्मार्ट मीटर की गुणवत्ता जांचने के लिए चार सदस्यीय समिति बना दी है। यह समिति दस दिनों में पावर कॉरपोरेशन को स्मार्ट मीटरों का तकनीकी परीक्षण करके उसकी गुणवत्ता के संबंध में रिपोर्ट सौंपेगी।
चार सदस्यीय विशेषज्ञ समिति में आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर अंकुश शर्मा व प्रबोध बाजपेयी, वडोदरा स्थित इलेक्ट्रिकल रिसर्च एवं डवलेपमेंट एसोसिएशन के अनुभाग प्रमुख तेजस मिस्त्री शामिल हैं। इसके अलावा पावर कॉरपोरेशन के निदेशक (वितरण) जीडी द्विवेदी को समिति का संयोजक बनाया गया है। प्रदेश में अब तक 85 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं और इनमें से 70 लाख से ज्यादा प्रीपेड मोड में काम कर रहे हैं। बीते काफी समय से प्रीपेड मीटरों को लेकर शिकायतें आ रही थीं। रीचार्ज के बावजूद मीटर का कनेक्शन समय से जुड़ नहीं रहा था। इसके अलावा मीटर खाते के बैलेंस को लेकर भी तमाम शिकायतें थीं।
गुणवत्ता पर शिकायतें स्वीकारा
पावर कॉरपोरेशन अध्यक्ष डा. आशीष गोयल ने जारी आदेश में कहा है कि मीटरों की गुणवत्ता की जांच के लिए पहले से ही पांच प्रतिशत चेक मीटर लगाए जा रहे हैं। बावजूद इसके स्मार्ट मीटरों की गुणवत्ता और उसकी संयोजकता के संबंध में विभिन्न स्तरों से शिकायतें मिल रही हैं। कॉरपोरेशन ने यह भी स्वीकार किया है कि केंद्र सरकार की रिवैंप डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (आरडीएसएस) की व्यवस्था और केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) की अधिसूचना के मुताबिक उपभोक्ताओं के घरों में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा रहे हैं। हालांकि, एक अप्रैल को सीईए की हालिया अधिसूचना में प्रीपेड मीटर को उपभोक्ताओं के विकल्प पर ही रखा गया है।
रोके जाएं स्मार्ट मीटर से कनेक्शन
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट तक स्मार्ट मीटरों से कनेक्शन और पुराने मीटरों को स्मार्ट मीटर से बदलने पर रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि स्मार्ट मीटर की गुणवत्ता संदिग्ध है। इसकी जांच के लिए समिति बना दी गई है। पहले रिपोर्ट आ जाए और उसमें स्थितियां स्पष्ट हो जाएं तब ही स्मार्ट मीटर के इस्तेमाल पर फैसला होना चाहिए। इसके आलवा उन्होंने कहा कि पावर कॉरपोरेशन सीईए की अधिसूचना के मुताबिक काम करने का हवाला दे रहा है, जबकि प्राधिकरण की हालिया अधिसूचना में प्रीपेड मीटर की अनिवार्यता समाप्त की जा चुकी है। बावजूद इसके नए कनेक्शन प्रीपेड मोड में ही दिए जा रहे हैं।




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