एम्स गोरखपुर में इलाज के लिए तरसा इंजीनियर बेटा, पिता ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से की शिकायत
गोरखपुर एम्स की इमरजेंसी में डेंगू पीड़ित इंजीनियर को इलाज न मिलने का गंभीर मामला सामने आया है। बिहार के गोपालगंज निवासी पीड़ित पिता ने बेटे को भर्ती न किए जाने की शिकायत केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री, एम्स की कार्यकारी निदेशक और चेयरमैन से की है।

गोरखपुर एम्स की इमरजेंसी में डेंगू पीड़ित इंजीनियर को इलाज न मिलने की शिकायत पिता ने मेल के जरिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री, एम्स की कार्यकारी निदेशक सेवानिवृत्त मेजर जनर डॉ. विभा दत्ता और एम्स चेयरमैन से की है। पीड़ित ने शिकायत में इलाज न मिलने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है। पीड़ित गोरखपुर के एक प्राइवेट अस्पताल में बेटे को भर्ती कराया है।
शिकायतकर्ता ने बताया कि वह बिहार के गोपालगंज का रहने वाला है। 27 साल बेटे को कई दिनों से बुखार था। वह पुणे में इंजीनियर है। पुणे में इलाज से कोई राहत नहीं मिली तो 2 नवंबर की सुबह घर आया। गोपालगंज के एक अस्पताल में दिखाया तो खून की जांच की गई। डेंगू की पुष्टि के साथ ही प्लेटलेट्स की संख्या 18 हजार बताई गई। इस पर डॉक्टरों ने रेफर कर दिया। आरोप है कि रविवार शाम सात बजे पिता अपने इंजीनियर बेटे को लेकर एम्स की इमरजेंसी में पहुंचे। पहुंचने पर गार्ड ने जानकारी लेते ही इलाज न होने की बात कही।
आरोप है कि किसी तरह रात में साढ़े सात बजे के आसपास पर्चा बना। इमरजेंसी में डॉक्टरों ने प्लेटलेट्स न चढ़ाने की बात कही। उन्होंने बेटे के इलाज के लिए काफी देर तक मिन्नतें की। डॉक्टर ने ओपीडी में जाने की सलाह दी। इसके बाद गंभीर स्थिति की बात जब कही गई तो प्राइवेट में इलाज के लिए जाने को कहा। थक हार कर बेटे को लेकर गुरूंग तिराहे तक पहुंचा, लेकिन बेटे की स्थिति को देखकर फिर से एम्स में जाकर अनुरोध किया। लेकिन किसी ने कोई बात नहीं सुनी। ब्लड बैंक के डॉक्टर से भी बात की गई, लेकिन बेटे को भर्ती नहीं किया गया।
थक हारकर अब पीड़ित ने शिकायत की है और जांच कर कार्रवाई की मांग की है। वहीं, एम्स मीडिया सेल की चेयरपर्सन डॉ. आराधना सिंह ने बताया कि मामले की जानकारी मिली है। पूरे प्रकरण की जांच कराई जाएगी।




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