every adult woman has right to choose a life partner of her choice objection is disgusting high court made comment पसंद का जीवनसाथी चुनना हर बालिग महिला का अधिकार, आपत्ति घृणित; हाईकोर्ट ने की टिप्पणी, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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पसंद का जीवनसाथी चुनना हर बालिग महिला का अधिकार, आपत्ति घृणित; हाईकोर्ट ने की टिप्पणी

मिर्जापुर के चील्ह थाने में दर्ज FIR में महिला का आरोप है कि उसे अपनी पसंद के व्यक्ति से विवाह करने पर अपहरण की धमकी दी जा रही है। इसी मामले में आरोपी महिला के पिता अमरनाथ यादव और भाई ने याचिका में बीएनएस की धारा 140(3), 62 और 352 के तहत दर्ज एफआईआर रद्द करने की मांग की थी।

Wed, 18 June 2025 06:01 AMAjay Singh विधि संवाददाता, प्रयागराज
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पसंद का जीवनसाथी चुनना हर बालिग महिला का अधिकार, आपत्ति घृणित; हाईकोर्ट ने की टिप्पणी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक आदेश में कहा है कि अपनी पसंद के व्यक्ति से विवाह करने किसी महिला के निर्णय पर परिवार या समाज का आपत्ति करना घृणित कार्य है। न्यायमूर्ति जेजे मुनीर एवं न्यायमूर्ति प्रवीण कुमार गिरि की खंडपीठ ने कहा कि किसी भी वयस्क को अपनी पसंद के जीवनसाथी के चुनाव का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है, जो संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत संरक्षित है। इसी के साथ कोर्ट ने शिकायतकर्ता महिला को संरक्षण प्रदान करते हुए उसके विवाह के फैसले में परिवार के हस्तक्षेप की निंदा की।

मिर्जापुर के चील्ह थाने में दर्ज एफआईआर में महिला का आरोप है कि उसे अपनी पसंद के व्यक्ति से विवाह करने पर अपहरण की धमकी दी जा रही है। इसी मामले में आरोपी महिला के पिता अमरनाथ यादव और भाई ने याचिका में बीएनएस की धारा 140(3), 62 और 352 के तहत दर्ज एफआईआर रद्द करने की मांग की थी। महिला ने एफआईआर में आरोप लगाया कि उसे अपहरण की धमकी दी जा रही है क्योंकि उसने परिवार की मर्जी के खिलाफ विवाह का निर्णय लिया है। कोर्ट ने याचियों की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। साथ ही उन्हें शिकायतकर्ता महिला के जीवन में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप करने से मना किया है। कोर्ट ने राज्य सरकार व अन्य पक्षों को नोटिस जारी करते हुए तीन सप्ताह के भीतर याचिका पर जवाब मांगा है।

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अनधिकृत निर्माण के मुकदमे में अंतिम फैसले पर रोक

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूर्व सांसद आज़म ख़ान और अन्य अभियुक्तों के खिलाफ 12 अलग-अलग एफआईआर के एक आरोपी के मुकदमे में अंतिम फैसला करने पर रोक लगा दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति दिनेश पाठक ने मोहम्मद इस्लाम उर्फ इस्लाम ठेकेदार और एक अन्य की याचिका पर वरिष्ठ अधिवक्ता एसएफए नकवी को सुनकर दिया है कोर्ट ने मामले को तीन जुलाई को नए सिरे से सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करते हुए तब तक ट्रायल जारी रखने की अनुमति दी है। प्रकरण 2019 और 2020 के बीच रामपुर कोतवाली में दर्ज 12 एफआईआर से जुड़ा है, जो 15 अक्टूबर 2016 को यतीम खाना वक्फ नंबर 157 की वक्फ संपत्ति पर अनधिकृत निर्माणों को ध्वस्त करने से संबंधित है।

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रामपुर के विशेष जज एमपी/एमएलए के यहां सभी एफआईआर पर एकसाथ मुकदमा चल रहा है। इसी मुकदमे को लेकर पूर्व सांसद मोहम्मद आजम खान और वीरेंद्र गोयल की याचिका पर बुधवार को सुनवाई होगी। अधिवक्ता शाश्वत आनंद के अनुसार यह याचिका ट्रायल कोर्ट के गत 30 मई के आदेश को लेकर की गई है, जिसमें सूचनाकर्ताओं और प्रमुख अभियोजन गवाहों, जैसे सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष जफर अहमद फारूकी को बुलाने और 2016 की बेदखली की वीडियोग्राफिक साक्ष्य प्रस्तुत करने के उनके अनुरोध को खारिज कर दिया गया था।

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