यूपी पुलिस और बदमाशों के बीच मुठभेड़, हाफ एनकाउंटर में दो के पैर में लगी गोली, चार गिरफ्तार
बरेली में रविवार देर रात पुलिस और बदमाशों के बीच मुठभेड़ हो गई। इस दौरान पुलिस ने चार डकैतों को गिरफ्तार कर लिया, जबकि जवाबी फायरिंग में दो बदमाशों के पैर में गोली लगी और एक दरोगा व एक सिपाही भी घायल हो गए।

यूपी के बरेली जिले के भोजीपुरा थाना क्षेत्र में रविवार रात पुलिस और बदमाशों के बीच हुई मुठभेड़ में चार डकैतों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में दो बदमाशों के पैर में गोली लगी, जबकि फायरिंग में एक दरोगा और एक सिपाही भी घायल हो गए। सभी घायलों को उपचार के लिए सीएचसी भोजीपुरा भेजा गया है।
एएसपी हाईवे शिवम आशुतोष सिंह ने बताया कि रविवार रात करीब पौने दो बजे थाना प्रभारी भोजीपुरा मय फोर्स क्षेत्र में गश्त और वांछित अभियुक्तों की तलाश में थे। इसी दौरान ग्राम मसीत से महेशपुर शिवसिंह मार्ग पर एक संदिग्ध पिकअप वाहन दिखाई दिया, जिसकी नंबर प्लेट कपड़े से ढकी हुई थी। पुलिस द्वारा रोकने का प्रयास करने पर वाहन चालक नहर किनारे तेज गति से भागा, लेकिन आगे जाकर पेड़ से टकरा गया।
इस पर वाहन से उतरे बदमाशों ने पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी, जिसमें उपनिरीक्षक रुक्मेश सिंह और कांस्टेबल संजय सागर घायल हो गए। पुलिस ने आत्मरक्षार्थ जवाबी फायरिंग की, जिसमें अकरम अली पुत्र छीटू शाह निवासी लभेड़ा थाना हाफिजगंज और आसिफ पुत्र बशीर निवासी तुलसी नगर एजाज नगर गोटिया थाना बारादरी के पैर में गोली लगी। दोनों को घायल अवस्था में गिरफ्तार कर लिया गया। उनके दो अन्य साथी साहिल व शाहिद पुत्रगण मोहम्मद आरिफ उर्फ पप्पू निवासी तुलसी नगर एजाज नगर गोटिया थाना बारादरी भी गिरफ्तार हुए हैं। अभियुक्तों के कब्जे से 60 हजार रुपये नकद, दो तमंचे 315 बोर, दो जिंदा कारतूस, दो खोखा कारतूस और एक पिकअप वाहन बरामद हुआ है।
एएसपी ने बताया कि इस गैंग ने गुरुवार रात धौराटांडा में राइस मिलर के घर डकैती की वारदात को अंजाम दिया था। इसी गिरोह ने नौ फरवरी की रात हरदोई के शाहबाद थाना क्षेत्र में भी डकैती की वारदात को अंजाम दिया था।
प्रमोशन, शोहरत के लिए पैर में गोली मार रहे: हाईकोर्ट
इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एनकाउंटर पर सवाल उठाया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि पुलिस सिर्फ प्रमोशन और शोहरत के लिए मुठभेड़ का सहारा ले रही है, जो पूरी तरह अस्वीकार्य है क्योंकि दंड देने का अधिकार केवल अदालत के पास है। यह आदेश न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल ने मिर्जापुर के राजू उर्फ राजकुमार और दो अन्य की जमानत अर्जियों पर सुनवाई के दौरान दिया था।
कोर्ट ने डीजीपी और गृह सचिव से जवाब तलब किया था कि क्या किसी पुलिस अधिकारी को आरोपियों के पैरों में गोली मारने का कोई लिखित या मौखिक आदेश दिया गया है। अदालत ने यह भी कहा कि पुलिस अक्सर मामूली मामलों में भी मुठभेड़ का दिखावा करते हुए अंधाधुंध फायरिंग कर देती है, जबकि इन मुठभेड़ों में किसी अधिकारी को चोट नहीं लगी। इससे आग्नेयास्त्र के उपयोग और उसकी अनुपातिकता पर सवाल उठते हैं।




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