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बिजली के मीटर बदले, बिल गायब; यूपी के इस जिले में अपने ही सिस्टम में उलझा विभाग

अलीगढ़ में बड़े पैमाने पर लगाए गए बिजली के स्मार्ट मीटर अब उपभोक्ताओं के लिए मुसीबत बनते जा रहे हैं। कुछ क्षेत्रों में डेढ़ से दो महीने पहले बदले गए मीटरों के बाद बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं को अब तक बिल नहीं मिला है। इससे लोग अपने वास्तविक बकाए को लेकर भी अनिश्चितता की स्थिति में हैं।

Sat, 21 March 2026 08:17 PMAjay Singh वरिष्ठ संवाददाता, अलीगढ़
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बिजली के मीटर बदले, बिल गायब; यूपी के इस जिले में अपने ही सिस्टम में उलझा विभाग

UP Electricity News: स्मार्ट मीटर लगाने का दावा करने वाला बिजली विभाग खुद ही अपने सिस्टम में उलझ गया है। हाल यह है कि मीटर तो बदल दिए गए, लेकिन बिल गायब हो गए। नए मीटर के बाद रीडिंग और बैलेंस को लेकर उपभोक्ताओं में भ्रम की स्थिति बनी हुई है। कई उपभोक्ताओं का फरवरी का बिल अब तक नहीं आया। अधिकारी स्पष्ट नहीं बता पा रहे कि नया मीटर पोस्टपेड है या प्रीपेड। यदि प्रीपेड है तो ऑनलाइन बैलेंस क्यों नहीं दिखाई दे रहा? और पोस्टपेड है तो बिल क्यों नहीं मिल रहा?

अलीगढ़ शहर में बड़े पैमाने पर लगाए गए स्मार्ट मीटर अब उपभोक्ताओं के लिए मुसीबत बनते जा रहे हैं। कुछ क्षेत्रों में डेढ़ से दो महीने पहले बदले गए मीटरों के बाद बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं को अब तक बिजली का बिल नहीं मिला है। इससे लोग न सिर्फ असमंजस में हैं, बल्कि अपने वास्तविक बकाए को लेकर भी अनिश्चितता की स्थिति में हैं। लोग लगातार शिकायत कर रहे हैं, लेकिन हर बार एक ही जवाब मिल रहा है, मीटर अब प्रीपेड हो चुका है, बिल जल्द मोबाइल पर आ जाएगा। जबकि, जमीनी हकीकत इससे उलट है। न तो मोबाइल पर कोई बिल आ रहा है और न ही ऑनलाइन पोर्टल पर कोई नई जानकारी दिखाई दे रही है। पोर्टल अब भी पुराने भुगतान को ही दिखा रहा है, जिससे उपभोक्ता यह समझ ही नहीं पा रहे कि उनका वास्तविक बकाया कितना है।

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मीटर बदलने के साथ ही बिना स्पष्ट जानकारी दिए पोस्टपेड से प्रीपेड सिस्टम में शिफ्ट कर दिया गया। उपभोक्ताओं का कहना है कि इस बदलाव को लेकर न तो पहले जागरूकता अभियान चलाया गया और न ही बाद में कोई स्पष्ट गाइडलाइन दी गई। स्थिति यह है कि उपभोक्ता अपने ही कनेक्शन के नियम समझने के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं।

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सबसे ज्यादा नाराजगी उस समय सामने आ रही है जब अचानक नेगेटिव बैलेंस दिखाकर कनेक्शन काट दिए जा रहे हैं। विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 31 हजार से अधिक कनेक्शन इसी आधार पर काटे जा चुके हैं। उपभोक्ताओं का सवाल है कि जब बिल ही नहीं मिला तो बकाया कैसे तय हो गया। विभागीय अधिकारी इस पूरे मामले में स्पष्ट जवाब देने से बचते नजर आ रहे हैं।

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क्या बोले चीफ इंजीनियर

चीफ इंजीनियर पंकज अग्रवाल ने बताया कि स्मार्ट मीटरों को प्रीपेड करने की प्रक्रिया लखनऊ स्तर से हो रही है। ऑनलाइन पोर्टल पर बैलेंस दिखाई दे जाएगा। इस संबंध में उपभोक्ताओं को जानकारी दी जा रही है।

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