पूर्व MLC मोहम्मद इकबाल पर ED का शिकंजा, भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित; 3 चीनी मिलें होंगी जब्त
पूर्व एमएलसी मोहम्मद इकबाल के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), लखनऊ क्षेत्रीय कार्यालय ने एक महत्वपूर्ण आदेश प्राप्त किया, जिसमें उन्हें Fugitive Economic Offenders Act (FEOA) के तहत भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया गया है। पूर्व एमएलसी की तीन चीनी मिलें जब्त की जाएंगी।

UP News: बसपा सरकार में बहुचर्चित चीनी मिल घोटाले के आरोपी पूर्व एमएलसी मोहम्मद इकबाल उर्फ हाजी इकबाल पर ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) का शिकंजा और कस गया है। ईडी की पैरवी पर उन्हें लखनऊ की विशेष अदालत ने फ्यूगिटिव इकोनामिक अफेंडर्स एक्ट (एफईओए) के तहत भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित कर दिया है। न्यायालय ने आरोपी इकबाल की लगभग 1000 करोड़ रुपये कीमत की देवरिया स्थित तीन चीनी मिलों डायनेमिक शुगर्स प्राइवेट लिमिटेड, हनीवेल शुगर्स प्राइवेट लिमिटेड और मैलो इन्फ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड को जब्त करने का निर्देश भी दिया। ईडी ने तीनों चीनों मिलों पर उन्हें केंद्र सरकार के कब्जे में लिए जाने का नोटिस चस्पा कर दिया है। आरोपी इकबाल बीते दिनों दुबई भाग निकला था।
ईडी ने इससे पूर्व निवेशकों से ठगी के मामले में शाइन सिटी के मुख्य संचालक राशिद नसीम को प्रदेश में पहली बार एफईओए के तहत भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित कराया था। खास एक्ट के तहत भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किए पूर्व एमएलसी इकबाल प्रदेश के दूसरे ऐसा आरोपी है। बसपा सरकार में हुए चीनी मिल घोटाले में सीबीआइ लखनऊ की एंटी करप्शन ब्रांच ने 25 अप्रैल 2019 को केस दर्ज किया था। जिसे आधार बनाकर ईडी ने भी अपनी पड़ताल शुरू की थी और पूर्व एमएलसी मोहम्मद इकबाल के विरुद्ध वर्ष 2010-2011 में प्रिवेंशन आफ मनी लांड्रिंग के तहत केस दर्ज किया था।
सीरियस फ्राड इंवेस्टीगेशन आर्गनाइजेशन ने यह जांच ईडी को सौंपी थी। चीनी निगम की 21 चीनी मिलों को वर्ष 2010-11 में बेचा गया था। ईडी की जांच में सामने आया था कि पूर्व एमएलसी ने नम्रता मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड व गिरियाशो कंपनी प्राइवेट लिमिटेड नाम की बोगस कंपनियां बनाई थीं। इन बोगस कंपनियों के जरिए चीनी मिलों को खरीदा गया था। वर्ष 2010-11 के दौरान राज्य सरकार की सात चीनी मिलों का अधिग्रहण किया था, जिन्हें ईडी पहले अटैच कर चुकी है। ईडी ने पूर्व में सहारनपुर व दिल्ली स्थित मो. इकबाल के ठिकानों पर छापेमारी भी की थी। जांच में यह भी सामने आया कि मो. इकबाल व उनके परिवार के सदस्यों के बैंक खातों में बड़ी रकम जमा की गई थीं।
खनन घोटाले में भी हुई थी कार्रवाई
सहारनपुर में हुए अवैध खनन के मामले में भी पूर्व एमएलसी मो. इकबाल के विरुद्ध जांच चल रही है। ईडी के लखनऊ स्थित जोनल कार्यालय की टीम ने बसपा के पूर्व एमएलसी मो. इकबाल की सहारनपुर स्थित ग्लोकल यूनिवर्सिटी की 121 एकड़ जमीन व सभी भवनों को जब्त किया था। जब्त संपत्ति की कीमत 4,440 करोड़ रुपये आंकी गई थी। ईडी ने चीनी मिल घोटाले में वर्ष 2021 में पूर्व एमएलसी इकबाल की 1097 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की थी।
सूत्रों के अनुसार ईडी की जांच में सामने आया था कि वर्ष 2010 से 2012 के मध्य सहारनपुर व उसके आसपास अवैध खनन से हुई 500 करोड़ रुपये से अधिक की काली कमाई का निवेश एक यूनिवर्सिटी में किया गया था। इकबाल ने एक एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट के माध्यम से यूनिवर्सिटी की जमीन खरीदी थी और निर्माण कराया था। ट्रस्ट का चेयरमैन इकबाल था और सभी ट्रस्टी उसके परिवार के ही थे।
वकालतनामे में लगे थे यूएई के दस्तावेज
पूर्व एमएलसी मो. इकबाल के वकील की ओर से कोर्ट में एफईओए के विरुद्ध आपत्ति दाखिल की गई थी। उस वकालतनामे पर सील यूएई की थी। वकालतनामे पर भारतीय दूतावास के किसी अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं थे, जिससे यह प्रमाणित होता हो कि वकालतनामा पर हस्ताक्षर करने वाला व्यक्ति मो. इकबाल ही है। तब से ही इकबाल फरार है और उसके विरुद्ध वारंट जारी है।




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