मरीज के परिवार को डॉक्टर देंगे 2 करोड़ का मुआवजा, दाईं किडनी खराब थी, निकाल दी बाईं
यूपी में डॉक्टर ने महिला की खराब किडनी की जगह स्वस्थ किडनी निकाल दी, जिससे उसकी मौत हो गई। राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) ने इस मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए इसे गंभीर मेडिकल लापरवाही मानते हुए दोषी डॉक्टर पर 2 करोड़ रुपये मुआवजा लगाया।

यूपी में मेडिकल लापरवाही का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC)ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दोषी सर्जन पर 2 करोड़ रुपये का मुआवजा लगाया है। आयोग ने कहा कि यह चिकित्सा जगत की सबसे गंभीर और दुर्लभ लापरवाहियों में से एक है, जिसे किसी भी हाल में माफ नहीं किया जा सकता। मामला साल 2012 का है। 56 वर्षीय शांति देवी को पेट में तेज दर्द की शिकायत के बाद उत्तर प्रदेश के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
दाईं किडनी की बजाए बाईं निकाल दी
परिवार ने मशहूर सर्जन डॉ. राजीव लोचन से संपर्क किया। जांच में डॉक्टर ने बताया कि शांति देवी की दाहिनी किडनी गंभीर रूप से खराब हो चुकी है, जबकि बाईं किडनी पूरी तरह स्वस्थ है। डॉक्टर ने सलाह दी कि मरीज की जान बचाने के लिए खराब किडनी को तुरंत ऑपरेशन के जरिए निकालना जरूरी है। परिवार ने डॉक्टर की बात पर भरोसा करते हुए ऑपरेशन की अनुमति दे दी।
साल 2012 में शांति देवी का हुआ था ऑपरेशन
6 मई 2012 को शांति देवी की सर्जरी की गई, लेकिन ऑपरेशन के बाद उनकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। दर्द लगातार बढ़ता गया। इसके बाद जून 2012 में परिवार ने दोबारा जांच कराई। रेडियोलॉजिकल टेस्ट और सीटी स्कैन रिपोर्ट में जो खुलासा हुआ, उसने सभी को हैरान कर दिया। रिपोर्ट में पता चला कि मरीज की खराब दाहिनी किडनी अभी भी शरीर के अंदर मौजूद थी, जबकि ऑपरेशन में उनकी पूरी तरह स्वस्थ बाईं किडनी निकाल दी गई थी।
मेडिकल दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा किया
मामला सामने आने के बाद इसकी शिकायत यूपी मेडिकल काउंसिल और मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया से की गई। जांच में डॉक्टर को पूरी तरह दोषी पाया गया। मेडिकल काउंसिल ने डॉक्टर का रजिस्ट्रेशन दो साल के लिए निलंबित कर दिया। जांच में यह भी सामने आया कि डॉक्टर ने खुद को बचाने के लिए मेडिकल दस्तावेजों में कथित फर्जीवाड़ा किया और फर्जी केस शीट जमा की थी।
गलत किडनी निकाले जाने से मरीज की हो गई थी मौत
स्वस्थ किडनी निकल जाने के कारण शांति देवी को लगातार डायलिसिस पर रहना पड़ा। करीब दो साल तक इलाज और पीड़ा झेलने के बाद 20 फरवरी 2014 को उनकी मौत हो गई। आयोग ने माना कि यदि सही किडनी निकाली जाती तो महिला की जान बच सकती थी। NCDRC की बेंच ने डॉक्टर को पीड़ित परिवार को 1.5 करोड़ रुपये मुआवजा, मानसिक पीड़ा के लिए परिवार के सदस्यों को 10-10 लाख रुपये तथा मुकदमे के खर्च के लिए 1 लाख रुपये देने का आदेश दिया है। साथ ही 2014 से 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देने को कहा गया है।




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