आठ करोड़ की फिरौती के लिए हुआ डॉक्टर के पति का अपहरण, 2 कारों से आए 7 बदमाश; जानें पूरी कहानी
अपहरणकर्ताओं के चंगुल से छूटे सेवानिवृत एयरफोर्स कर्मी अशोक जायसवाल ने कहा कि अपहरण का 15 घंटा मौत की दहशत के बीच बीता, उन्हें यकीन ही नहीं हो रहा है कि वह घर पर आ गए हैं। जिंदा बचने के लिए भगवान और पुलिस का शुक्रिया करना वह नहीं भूल रहे हैं।

यूपी के गोरखपुर में आठ करोड़ रुपये की फिरौती के लिए एयरफोर्स के रिटायर्ड कर्मी, पादरी बाजार स्थित आयुष्मान हॉस्पिटल के संचालक और डॉ. सुषमा जायसवाल के पति अशोक जायसवाल का अपहरण किया गया था। दो कार से आए सात बदमाशों ने शुक्रवार सुबह कौआबाग अंडरपास से उन्हें अगवा किया था। पुलिस ने तीन बदमाशों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि मास्टर माइंड सहित चार की तलाश चल रही है। घटना के पीछे किसी करीबी के शामिल होने से इंकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि घर में रुपये रखने से लेकर बाहर निकलने तक की मुखबिरी हुई थी।
पकड़े गए बदमाशों श्याम सुन्दर उर्फ गुड्डू यादव, जनार्दन गौड़ और करुणेश दूबे से पूछताछ में पता चला कि सिकरीगंज का कलामुद्दीन मास्टरमाइंड है। शुक्रवार को अशोक रेलवे स्टेडियम के लिए निकले तो बदमाश उनके पीछे लग गए। कलामुद्दीन ने कौआबाग अंडरपास से अगवा कर अशोक को अपनी गाड़ी में बिठाया। बाद में उन्हें दूसरी गाड़ी में शिफ्ट किया। उनकी आंख पर पट्टी बांध दी थी और उन्हें यह बताया जा रहा था वह बिहार की तरफ जा रहे हैं। रास्ते में उन्हें टार्चर भी कर रहे थे।
बदमाशों को घर में 8 करोड़ कैश होने की थी जानकारी
अपहर्ताओं को पता था कि अशोक ने घर में आठ करोड़ रुपये रखा है। लिहाजा उन्होंने आठ करोड़ से फिरौती की मांग शुरू की। अशोक ने बताया कि उतने रुपये नहीं है तो बदमाश पांच करोड़ और फिर एक करोड़ रुपये पर आ गए। उन्होंने डॉ. सुषमा को एक करोड़ रुपये की फिरौती के लिए फोन किया था।
दहशत में बीते 15 घंटे, यकीन नहीं हो रहा जिंदा हूं
अपहरणकर्ताओं के चंगुल से छूटे रिटायर एयरफोर्स कर्मी अशोक जायसवाल ने कहा कि अपहरण का 15 घंटा मौत की दहशत के बीच बीता, उन्हें यकीन ही नहीं हो रहा है कि वह घर पर आ गए हैं। जिंदा बचने के लिए भगवान और पुलिस का शुक्रिया करना वह नहीं भूल रहे हैं।
अशोक ने बताया कि उन्हें सुबह अपहर्ताओं ने उठाया तो सिर्फ दो बार बाथरूम के लिए कार से नीचे उतरने दिया। पीने के लिए पानी तक नहीं दिया। उन्हें लग रहा था कि वह अब बच नहीं पाएंगे। इसलिए उन्होंने अपहर्ताओं से सिर्फ एक गुजरिश की थी कि मौत के बाद मेरी लाश मेरे घर के सामने फेंक देना ताकि परिवार अन्तिम संस्कार कर सके। यह सब बोलते हुए वह सिहर जा रहे थे। कई बार आंख भर जा रही थी तो कई बार खुशी की हंसी भी आ रही थी।
अशोक जायसवाल ने ‘हिन्दुस्तान’ को बताया कि वह मूलतः बिहार के बेतिया जिले के रहने वाले हैं। गोरखपुर में 30 वर्षों से रह रहे हैं। कौवाबाग अंडरपास के पास तीन युवक उन्हें रोककर जान मारने की धमकी देकर जबरन स्विफ्ट डिजायर कार के पीछे वाले सीट पर बीच में बैठा लिए और दोनों तरफ बदमाश बैठ गए। कार में बैठाने के बाद उनके आंख पर रुमाल की पट्टी बांध दिए। चालक समेत कार में कुल चार लोग सवार थे। आंख पर पट्टी बंधने से उन्हें कुछ भी नहीं पता चल रहा था कि कहां ले जा रहे हैं। दिन भर कार में बैठा कर घूमाते रहे और धमकी देते रहे कि 5 करोड़ रुपये दे दो नहीं तो तुम्हारी हत्या कर देंगे। अशोक जायसवाल ने बदमाशों से कहा कि एक दिन तो मरना ही है। मेरी हत्या करना तो मेरी लाश मेरे घर के पास फेंक देना ताकि मेरा परिवार अंतिम संस्कार कर सके।
बदमाशों ने कई बार दबाव बनाया कि पत्नी से वीडियो कॉल कर आलमारी में रखे पैसा दिखाओ। दोपहर में उन्होंने कहा कि अब बिहार पहुंच गए हैं झारखंड पहुंचने वाले हैं। वहीं पर ले जाकर तुम्हारी हत्या कर देंगे। अशोक ने बताया कि बदमाशों ने पूरे दिन में उन्हें दो बार बाथरूम के लिए नीचे उतारा। दिन भर बिना खाना-पानी के वह परेशान रहे।
सोशल मीडिया पर क्या चल रहा पता करते रहे
अशोक जायसवाल ने बताया कि अपहर्ता अपने मोबाइल के जरिए सोशल मीडिया पर उनकी अपहरण की खबर चलने की पूरी जानकारी लेते रहे।
‘पकड़’ को रखने का नहीं था इंतजाम इसलिए पूरे दिन घुमाते रहे अपहर्ता
अपहरण की प्लानिंग के साथ बदमाश ये भी मान रहे थे कि कुछ ही घंटे में अशोक जायसवाल का परिवार फिरौती की रकम दे देगा ऐसे में अपहर्ताओं ने ‘पकड़’ यानी ‘डॉक्टर पति’ को रखने का इंतजाम नहीं किया था। वह गाड़ी में घुमाते हुए ही अपहरण की डील पूरी कर फिरौती वसूलने का टार्गेट रखे थे। यही वजह थी कि पहले आजमगढ़ गए और वहां कुछ घंटे रहने के बाद संतकबीरनगर होते हुए सहजनवा इलाके में आए।
पकड़ को लेकर घूमने में उनका जैसे-जैसे समय बीत रहा था उसी हिसाब से अपहर्ताओं की फिरौती की रकम भी घट रही थी। पुलिस सूत्रों के मुताबिक देर शाम तक वह 15 लाख रुपये फिरौती लेने पर भी तैयार हो गए थे। रात में एक ऐसी स्थिति आ गई थी कि पूरे दिन के खर्च के अलावा जो भी मिल जाए उसे लेकर डॉक्टर पति अशोक को छोड़ने के लिए अपहर्ता तैयार हो गए थे। इसके पीछे की बड़ी वजह यही थी कि उनके पास उन्हें रखने का कोई इंतजाम नहीं था।
करुणेश ने डराने के लिए दो थप्पड़ भी मारे थे अशोक को
अपहरण के एक घंटे बाद अपहर्ताओं ने गाड़ी बदल दी। अशोक जायसवाल को कलामुद्दीन ने अपनी गाड़ी से निकाल कर करुणेश की गाड़ी में शिफ्ट कर दिया। जब वह आजमगढ़ लेकर पहुंचे तो बताया कि बिहार आ गए हैं। आजमगढ़ में नदी के किनारे ले गए थे। बातचीत में वह यह दिखाने का प्रयास कर रहे थे कि अब वे लोग झारखंड की तरफ जा रहे हैं। पीड़ित अशोक को डराने के लिए करुणेश ने रास्ते में उन्हें दो थप्पड़ भी मारे थे। थप्पड़ मारने के बाद अपहर्ता जैसा कहते थे वैसा ही अशोक जायसवाल करते थे। अपहरण के समय अशोक के पास मोबाइल नहीं था लिहाजा उन्होंने वीडियो काल कर उनकी डॉक्टर पत्नी को भरोसा दिलाया था कि अशोक उनके पास हैं, उसके बाद ही परिवार डर गया था।
पुलिस को देख अशोक भी दहशत में भागने लगे
जब पुलिस ने कार की घेराबंदी कर दौड़ाया तो अपहर्ता गाड़ी से निकल कर भागने लगे। इस बीच रिटायर एयरफोर्स कर्मी अशोक भी डर की वजह से अपहर्ताओं के साथ उनके पीछे-पीछे भागने लगे। जब अपहर्ता पकड़े गए तब अशोक ने कहा कि वह डर गए थे।
दो आरोपियों के पैर में आई चोट, भर्ती
गिरफ्तारी के दौरान करुणेश दूबे और श्याम सुन्दर उर्फ गुड्डू यादव के पैरों में चोटे आयी है। पुलिस ने उन्हें इलाज के लिए सदर अस्पताल में भर्ती कराया है। एसपी सिटी ने बताया कि पकड़ने के दौरान नाले में गिरने से उनके पैर में चोट आई है। पुलिस टीम ने आरोपितों के पास से घटना में प्रयुक्त मोबाइल फोन, एक चार पहिया वाहन, तमंचा और कारतूस बरामद हुआ है।
सीएम कार्यालय से फोन कर लिया गया हाल-चाल
शुक्रवार की रात में अशोक जायसवाल के घर पहुंचने पर मुख्यमंत्री कार्यालय से उनकी पत्नी डॉ. सुषमा जायसवाल के मोबाइल नंबर पर फोन आया। उनके पति के बारे में उनसे बातचीत की गई और जानकारी की गई। डॉ. सुषमा ने पति के सकुशल वापसी को पुलिस व प्रशासन को धन्यवाद दिया।
बड़बोलेपन में बने शिकार 8 करोड़ की हुई मुखबिरी
जिस तरह से यह वारदात हुई उसमें आशंका जताई जा रही है कि अस्पताल संचालक अशोक जायसवाल अपने बड़बोलेपन का भी शिकार बन गए हैं। पुलिस की जांच में सामने आया है कि जमीन खरीदने और घर में कैश पैसा होने का कुछ करीबियों से उन्होंने जिक्र किया था। इसकी मुखबिरी हुई और अपहर्ताओं तक बात पहुंची थी। सीडीआर की मदद से पुलिस ने मुखबिर की तलाश शुरू कर दी है। मुखबिर और कलुमाद्दीन से ही लिंक जोड़कर पूरी घटना को देखा जा रहा है।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक अशोक जायसवाल ने 2017-18 में पिपराइच इलाके में एक जमीन खरीदी थी, जिस पर स्कूल बनवाने की बात कर रहे थे। यही नहीं और जमीन की तलाश करने की भी बात सामने आई थी। इसी दौरान उन्होंने किसी से बताया था कि उनके पास कैश पैसा रखा है जैसे ही डील फाइनल हुई वह पेंमेंट कर देंगे। यही वजह है कि अपहर्ताओं तक खबर थी कि डॉक्टर पति के आलमारी में आठ करोड़ रुपये हैं।
अब जिस तरह से उनका अपहरण हुआ है उससे यह तो तय है कि उनकी मुखबिरी की गई है, उससे पहले अपहर्ताओं ने रेकी की थी। ऐसे में किसी करीबी के ही मुखबिरी की आशंका है। पुलिस ने उनके हास्पिटल स्टॉफ के अलावा अन्य करीबियों पर नजर रखनी शुरू कर दी है।
जमीन के लेन-देन की भी पुलिस कर रही जांच
पिपराइच इलाके में अशोक जायसवाल ने जो जमीन खरीदी थी, बताया जा रहा है कि उसमें दलाली का कुछ पैसा बाकी था। उससे जुड़े लोगों से पैसे के लेन-देन की भी पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। एसएसपी ने बताया कि शुरुआती सूचना को अपहरण मान कर उन्होंने छानबीन शुरू कराई। अब बिन्दु की जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
15 लाख रुपये तक लेने को तैयार हो गए थे अपहर्ता
अशोक जायसवाल को अपनी हकीकत पता थी उनके पास कितना पैसा है लेकिन अपहर्ताओं को तो कुछ और ही पता था। यही वजह है कि फिरौती की मांग आठ करोड़ से शुरू हुई और 15 लाख रुपये तक मामला आया। परिवार ने आठ लाख का इंतजाम कर लिया था। उन्हें बरामद करने में अगर और देर होती तो अपहर्ताओं के पास यह पैसा पहुंच जाता। बताया जा रहा है कि करुणेश अपनी गाड़ी में डॉक्टर पति को लेकर घूम रहा था तो वहीं कलामुद्दीन फिरौती के लिए शहर में घूम रहा था ताकि डील होने पर रकम उठाने मौके पर पहुंच जाए।
साइकिल भी हो गई चोरी
रिटायर एयरफोर्सकर्मी का कौआबाग अंडरपास से कार सवार बदमाशों ने जब अपहरण किया तब उनकी साइकिल वहीं छोड़ दी थी। शुरू में लगा कि वह साइकिल भी साथ ले गए हैं लेकिन अब पता चला कि अपहरण के बाद कोई उनकी साइकिल अंडर पास से चुरा ले गया है।
इनको किया गिरफ्तार
-श्याम सुन्दर उर्फ गुड्डू यादव पुत्र हरिराम यादव निवासी ढेबरा बुजुर्ग थाना सिकरीगंज, गोरखपुर
-जनार्दन गौड़ पुत्र गोपाल गौड़ निवासी बलुआ उर्फ बकुसड़ थाना सिकरीगंज, गोरखपुर
-करुणेश कुमार दूबे पुत्र जितेन्द्र कुमार दूबे निवासी चौतरा पट्टी पोस्ट शंकरपुर बेलघाट, गोरखपुर
ये बदमाश पकड़ से दूर
-कमालुद्दीन उर्फ कमालू निवासी जद्दू पट्टी थाना सिकरीगंज, गोरखपुर
-प्रीतम कुमार निवासी ढेबरा थाना सिकरीगंज, गोरखपुर
-शेरू सिंह निवासी कोलिया दक्षिण नौसढ़ थाना गीडा, गोरखपुर
-अंश निवासी अज्ञात
अशोक के पिता और भाई भी हुए थे अपहृत, फिरौती देने के बाद छूटे
बेतिया बिहार के मूल निवासी रिटायर्ड एयरफोर्स कर्मी अशोक जायसवाल के पिता और बड़े भाई का बिहार में 90 के दशक में अपहरण हो चुका था। फिरौती देने के बाद ही दोनों छूट पाए थे। यही वजह थी कि अशोक जायसवाल और उनका परिवार यह मान चुका था कि बिना फिरौती दिए वह भी नहीं छूट पाएंगे। पुलिस से सम्पर्क करने के बाद भी उनका परिवार फिरौती की रकम का इंतजाम शुरू कर दिया था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक आठ लाख का परिवार ने तत्काल में इंतजाम भी कर लिया था। हालांकि पुलिस की सक्रियता से उन्हें पैसा नहीं देना पड़ा और पुलिस टीम ने 15 घंटे में सकुशल अपहर्ताओं के चंगुल से अशोक को मुक्त करा लिया।
अशोक व्यापारी घराना से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता बड़े लाल जायसवाल बेतिया बिहार के बड़े व्यापारी थे। बिहार के अपहरण उद्योग के दौरान अशोक के पिता बड़े लाल और बड़े भाई मुरारी लाल का अपहरण हो चुका था। पिता बड़े लाल को 1995 और बड़े भाई मुरारी लाल को 1993 में बदमाशों ने अपहरण किया था और दोनों लोगों को छुड़ाने में परिवार को अच्छी खासी फिरौती की रकम देनी पड़ी थी। यह सब कुछ अशोक जायसवाल की देख रेख में ही हुआ था। अशोक जायसवाल को एयरफोर्स में नौकरी मिल गई और वर्ष 2000 के दशक में उनका गोरखपुर एयरफोर्स में तबादला हो गया।
यहीं से 2003 में वह रिटायर्ड हुए और पादरी बाजार इलाके में जमीन लेकर यहीं पर बस गए। चूकि परिवार के दो लोगों का अपहरण हो चुका था लिहाजा उन्हें यह लग रहा था कि बिना पैसा दिए छूटना मुश्किल है, इस वजह से वह किसी तरह से अपहर्ताओं का विरोध नहीं कर रहे थे यही नहीं पत्नी से भी पैसा देने के लिए कह रहे थे। पत्नी ने भी पुलिस से सम्पर्क नहीं किया था।
क्या बोले एसएसपी
एसएसपी राजकरन नैय्यर ने बताया कि अपहरण की सूचना मिलते ही पुलिस की छह टीमें गठित कर तलाश में लगा दिया गया था। एसपी सिटी की अगुवाई में टीम काम कर रही थी। सामूहिक प्रयास से 12 घंटे के भीतर पीड़ित को सकुशल खोज लिया गया और तीन आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया। फरार आरोपितों की भी जल्द गिरफ्तारी कर ली जाएगी। सफल अनावरण करने वाली टीम पुरस्कृत होगी।




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