भावावेश में आकर कोई फ़ैसला न करें, बुरे दिन जाने वाले हैं, IAS रिंकू के इस्तीफे पर अखिलेश की नसीहत
सोशल मीडिया एक्स पर लिखी पोस्ट में अखिलेश यादव ने कहा, कुशल अधिकारियों की भाजपा सरकार में कोई अहमियत नहीं है। भाजपा में तो उनकी पूछ है जिनकी चोरी के पैसों की ही चोरी हो जाती है या जो निवेश तक में 5 फीसद का प्रवेश शुल्क वसूल लेते हैं।

IAS Rinku Singh News: यूपी काडर के वर्ष 2023 बैच के आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही के इस्तीफा अब राजनीतिक रूप लेने लगा है। बुधवार को सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने आईएएस रिंकू सिंह के इस्तीफे को लेकर यूपी सरकार पर जोरदार हमला बोला और रिंकू सिंह को नसीहत भी दे डाली। सोशल मीडिया एक्स पर लिखी पोस्ट में अखिलेश यादव ने कहा, कुशल अधिकारियों की भाजपा सरकार में कोई अहमियत नहीं है।
भाजपा में तो उनकी पूछ है जिनकी चोरी के पैसों की ही चोरी हो जाती है या जो निवेश तक में 5 फीसद का प्रवेश शुल्क वसूल लेते हैं। अखिलेश ने कहा, हर अच्छे अधिकारी से हमारी मांग है कि भावावेश में आकर कोई फ़ैसला न करें, बुरे दिन जाने वाले हैं। पीडीए सरकार आएगी और सबको उचित मान-सम्मान-स्थान देगी क्योंकि पीडीए की सरकार जनता की सरकार होगी, जो समस्याओं के समाधान व असमानताओं को दूर करने के लिए सच में विकास के काम करेगी।
उन्होंने कहा, क्वॉलिटी वर्क और तय समय सीमा के अंदर काम को पूरा करने के लिए हमेशा ही बेहतरीन ऑफ़िसर्स की ज़रूरत पड़ती है। अपने काम में पारंगत अधिकारियों की हमने हमेशा क़द्र की है और आगे भी करेंगे। पीड़ित अधिकारी हो या कर्मचारी सभी भाजपा को हटाने के लिए पीडीए के साथ हैं। 'पीड़ा' बढ़ रही है, इसीलिए 'पीडीए' बढ़ रहा है क्योंकि 'जो पीड़ित, वो पीडीए'।
भाजपा की गलत नीतियों के कारण देश में असंतुलन
ईरान-इजराइल युद्ध को लेकर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भाजपा पर हमला बोला। उन्होंने कहा, भाजपा की एकतरफ़ा गलत नीतियों की वजह से देश में असंतुलन हो रहा है। विदेशी निवेशक विश्वास खो रहे हैं। इन हालातों में भारतीय व्यापार जगत् के बीच कटुता का माहौल बनने की आशंका जन्म ले रही है, जो भारत जैसी विकासशील अर्थव्यवस्था के लिए हर तरह से बेहद हानिकारक है। अखिलेश बोले, सच्चाई तो ये है कि ऐसे में हमें डॉ. लोहिया जी की वो बात याद करनी चाहिए जिसका मर्म यह था कि पक्षपात के कारण उपजे असमान अवसरों की वजह से जो व्यापारिक प्रतिस्पर्धा, प्रतिद्वंद्विता में बदल जाती है, उसकी वजह से ‘पूंजीपति ही पूंजीपति’ को ख़त्म करने लगता है। अखिलेश यादव ने आगे कहा, इससे कच्चे माल की खपत घटती है और काम के अवसर भी। संबंधित छोटे उद्योग भी इससे प्रभावित होते हैं और सबसे ज़्यादा रोज़गार देनेवाले MSME का भट्ठा बैठ जाता है। साथ ही देश की इंटरनेशनल इमेज पर बहुत बुरा असर पड़ता है।




साइन इन