Despite being Mulayam son, why Prateek Yadav not enjoy glamour of power? He distanced himself from his political legacy मुलायम का बेटा होकर भी प्रतीक यादव को क्यों रास नहीं आई सत्ता की चकाचौंध? विरासत से बनाई थी दूरी, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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मुलायम का बेटा होकर भी प्रतीक यादव को क्यों रास नहीं आई सत्ता की चकाचौंध? विरासत से बनाई थी दूरी

Prateek Yadav death:  प्रतीक यादव का बुधवार को निधन हो गया है। मुलायम का बेटा होकर भी प्रतीक यादव को क्यों रास नहीं आई सत्ता की चकाचौंध? प्रतीक यादव ने जिम में तो खूब पसीना बहाया पर पारिवार में रची-बसी सियासी संस्कृति से उनका नाता नहीं जुड़ा।

Thu, 14 May 2026 11:26 AMDeep Pandey आलोक मिश्र, लखनऊ
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मुलायम का बेटा होकर भी प्रतीक यादव को क्यों रास नहीं आई सत्ता की चकाचौंध? विरासत से बनाई थी दूरी

Prateek Yadav death: सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे और बीजेपी नेता अपर्णा यादव के पति प्रतीक यादव का बुधवार को निधन हो गया है। आज अंतिम संस्कार होगा। राजनीतिक अखाड़े के बड़े पहलवान रहे स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव के छोटे पुत्र प्रतीक यादव ने जिम में तो खूब पसीना बहाया पर पारिवार में रची-बसी सियासी संस्कृति से उनका नाता नहीं जुड़ा। सपा के झंडे तले भले ही कई छोटे क्षेत्रीय नेताओं ने भी अपनी बड़ी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को यर्थात किया पर प्रतीक इसके विपरीत रहे। दो अलग मांओं के बेटों के बीच रिश्तों में प्यार हमेशा दिखा क्योंकि दोनों ने ही सार्वजनिक जीवन में मर्यादा के संयम को कभी नहीं लांघा। प्रतीक का मौन भी जाहिर करता है कि उनकी महत्वाकांक्षा कभी राजनीतिक नहीं रही। सत्ता की चकाचौंध से दूर रहकर वह अपने कारोबार और परिवार में ही संतुष्ट थे।

चमड़े के उत्पादों से करते थे परहेज

लोकसभा या फिर विधानसभा की किसी सीट पर परचम लहराना प्रतीक यादव के लिए उतना ही आसान था, जितना कि अपने जिम और कारोबार से जुड़ी ख्वाहिशों को पूरा करना। प्रतीक की पत्नी अपर्णा यादव ने भले ही मुलायम के कुनबे में हुई परिवारिक उठा-पटक के बीच खुद को राजनीतिक विरासत का हिस्सा बनाया पर पति प्रतीक ने पिता की पार्टी के किसी संवैधानिक पद से भी खुद को नहीं जोड़ा। प्रतीक के एक पारिवारिक मित्र बताते हैं कि प्रतीक को कुत्तों से बहुत लगाव था और वह चमड़े के बने उत्पादों से परहेज करते थे।

मृदुभाषी थे प्रतीक

स्वाभाव से मृदुभाषी प्रतीक की जिंदगी का एक अनछुआ पहलू यह भी है कि पिता मुलायम सिंह की मृत्यु के बाद कुछ सोशल मीडिया पोस्ट से उन पर किए गए व्यक्तिगत हमलों से वह बहुत आहत हुए थे और इसके बाद काफी गुमसुम भी रहने लगे थे। मां साधना गुप्ता की मृत्यु के बाद प्रतीक का मुलायम सिंह से तो रिश्ते की गरमाहट वैसी ही रही पर परिवार के अन्य सदस्यों से यह महक कम पड़ने लगी थीं।

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वह हमेशा से कारोबार करना और उसे बढ़ाना चाहते थे

प्रतीक के एक पारिवारिक मित्र की मानें तो वह हमेशा से कारोबार करना और उसे बढ़ाना चाहते थे। कालेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद ही उन्होंने अपने करीबी दोस्तों से साफ किया था कि उन्हें एक सफल कारोबारी बनना है। मुलायम कुनबे के एक धड़े ने उन्हें भले ही कारोबार के लिए सपोर्ट का विरोध न किया हो पर वह धड़ा यह भी चाहता था कि वह राजनीति से दूर ही रहें। एक खामोश समझौते के तहत इन बातों को परिवार ने हमेशा इशारे में ही समझा। हालांकि परिवार के भीतर रहे घमासान से लेकर राजनीति से दूरी और परिवार के पावर सेंटर में हिस्से को लेकर उनकी भूमिका से जुड़े कई सवाल भी प्रतीक की अंतिम सांस के साथ ही विराम ले चुके हैं।

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