देश का मुसलमान न कभी झुका है, न झुकेगा, जमीयत के अधिवेशन में मौलाना अरशद मदनी
दिल्ली में आयोजित जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अधिवेशन में राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने सरकार और सांप्रदायिक ताकतों पर मुसलमानों को निशाना बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि देश का मुसलमान न कभी झुका है और न झुकेगा।

जमीयत उलमा ए हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने जमीयत के दिल्ली स्थित मुख्यालय में आयोजित अधिवेशन में सरकार की शह पर सांप्रदायिक ताकतों पर मुसलमानों को निशाना बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अच्छी तरह जान लेना चाहिए कि मुसलमान न कभी झुका है और न ही कभी झुकेगा।
दिल्ली में आयोजित जमीयत उलेमा-ए-हिंद के दो दिवसीय अधिवेशन में मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि कुछ लोग देश के अमन, एकता और भाईचारे के साथ खिलवाड़ कर सांप्रदायिक सौहार्द को नुकसान पहुंचा रहे हैं। हालात इतने खराब बना दिए गए हैं कि हर तरफ जहर उगला जा रहा है, मुसलमानों को अपमानित किया जा रहा है लेकिन कानून के रखवाले चुप्पी साधे हैं।
मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि पश्चिम बंगाल और असम में हुए विधानसभा चुनाव में खुलेआम आचार संहिता की धज्जियां उड़ाई गईं। वर्ग विशेष के लोगों को सार्वजनिक रूप से धमकियां दी गईं। उन्होंने आरोप लगाया कि देश को योजनाबद्ध तरीके से एक वैचारिक राष्ट्र में बदलने की कोशिश की जा रही है। वंदे मातरम् जैसे विवादित गीत को राष्ट्रीय गीत घोषित कर भाजपा शासित राज्यों में इसे अनिवार्य किया जा रहा है, जबकि दूसरी ओर मस्जिदों, मकबरों और मदरसों को अवैध बताकर गिराया जा रहा है। मदनी ने कहा कि वंदे मातरम् को राष्ट्रगान जन गण मन के सामान दर्जा देने और उसे अनिवार्य किया जाना संविधान की मूल प्रस्तावना के खिलाफ है। सरकार निर्णय वापस नहीं लेती है तो हम अदालत जाएंगे।
बढ़ता वैचारिक टकराव और सामाजिक सौहार्द पर बहस
जमीयत के इस अधिवेशन के बाद देवबंद और आसपास के पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इलाकों में राजनीतिक और सामाजिक गरमाहट बढ़ गई है। मौलाना मदनी के बयान को जहां एक वर्ग अल्पसंख्यकों के अधिकारों की पुरजोर आवाज के रूप में देख रहा है, वहीं दूसरा पक्ष इसे बहुसंख्यक समाज को उकसाने और ध्रुवीकरण की राजनीति को बढ़ावा देने का जरिया मान रहा है। स्थानीय प्रबुद्ध वर्ग का मानना है कि चुनाव और राजनीतिक मंचों से आने वाले ऐसे तीखे बयान जमीनी स्तर पर सालों से चले आ रहे भाईचारे और सांप्रदायिक सौहार्द को गंभीर चोट पहुंचाते हैं। आने वाले दिनों में इस बयानबाजी को लेकर हिंदूवादी संगठनों और मुस्लिम धर्मगुरुओं के बीच वैचारिक टकराव और तेज होने के आसार हैं, जिसने खुफिया और स्थानीय पुलिस प्रशासन को भी अलर्ट मोड पर ला दिया है।
देश संविधान से चलेगा, मदनी की भड़काऊ बयानबाजी से नहीं : त्यागी
वहीं, बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी ने जमीयत प्रमुख मौलाना अरशद मदनी के इस बयान को भड़काऊ बताते हुए कहा कि भारत का संविधान भड़काऊ बयानों से नहीं बल्कि संविधान और कानून से चलेगा। मदनी भड़काऊ बयानबाजी कर देश के अल्पसंख्यकों को समाज की मुख्य धारा से अलग-थलग कर टकराव पैदा करने का प्रयास कर रहे हैं। अधिकारों की आड़ में किसी भी प्रकार की मजहबी कट्टरता, तुष्टिकरण या भड़काऊ बयानबाजी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।




साइन इन