Cybercriminals lure people with job promises; two youths stranded in Myanmar plead for repatriation नौकरी का झांसा देकर साइबर अपराधी बना रहे; म्यांमार में फंसे 2 युवकों ने वतन वापसी की गुहार लगाई, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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नौकरी का झांसा देकर साइबर अपराधी बना रहे; म्यांमार में फंसे 2 युवकों ने वतन वापसी की गुहार लगाई

वीडियो में युवकों ने आरोप लगाया है कि उन्हें नौकरी का झांसा देकर म्यांमार बुलाया गया और बाद में एक ऐसी कंपनी में भेज दिया गया, जहां ऑनलाइन फ्रॉड और साइबर अपराध से जुड़े काम कराने का दबाव बनाया जा रहा है। अब वतन वापसी की गुहार लगा रहे हैं।

Mon, 18 May 2026 06:05 PMsandeep हिन्दुस्तान, निज संवाददाता, पडरौना (कुशीनगर)
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नौकरी का झांसा देकर साइबर अपराधी बना रहे; म्यांमार में फंसे 2 युवकों ने वतन वापसी की गुहार लगाई

रोजगार की तलाश में म्यांमार गए कुशीनगर के दो युवकों समेत तीन भारतीय युवक वहां फंस गए हैं। युवकों ने चोरी-छिपे वहां से वीडियो जारी कर भारत सरकार और स्थानीय प्रशासन से सुरक्षित वतन वापसी की गुहार लगाई है। वीडियो में युवकों ने आरोप लगाया है कि उन्हें नौकरी का झांसा देकर म्यांमार बुलाया गया और बाद में एक ऐसी कंपनी में भेज दिया गया, जहां ऑनलाइन फ्रॉड और साइबर अपराध से जुड़े काम कराने का दबाव बनाया जा रहा है। पडरौना नगरपालिका के महाराणा प्रताप नगर निवासी मोहम्मद उस्मान अंसारी ने वीडियो जारी कर बताया है कि उसको म्यांमार के रंगून स्थित एक कंस्ट्रक्शन कंपनी में काम दिलाने का भरोसा दिया गया था।

नौकरी का झांसा देकर साइबर क्राइम में धकेला

युवक के अनुसार उसे ऑफर लेटर और वीजा भी उपलब्ध कराया गया। उसके साथ बिहार निवासी अनुरंजन व पडरौना के ही हसन रजा भी म्यांमार गए थे। तीनों को रंगून सिटी में नौकरी मिलने की उम्मीद थी, लेकिन वहां पहुंचने के बाद उनकी परिस्थितियां पूरी तरह बदल गईं। वीडियो में उस्मान अंसारी ने बताया कि रंगून पहुंचने के बाद तीनों युवकों को करीब 700 किलोमीटर दूर पहाड़ी क्षेत्र में स्थित एक दूसरी कंपनी में भेज दिया गया। आरोप है कि यह कंपनी ऑनलाइन फ्रॉड और साइबर गतिविधियों से जुड़ी हुई है। उन्हें भी साइबर अपराध के लिए प्रेरित किया जा रहा है। वहां पहुंचने के बाद उनका पासपोर्ट छीन लिया गया और लगातार वहीं काम करने का दबाव बनाया जा रहा है। युवक ने कहा कि वे लोग परिवार के भरण-पोषण के लिए विदेश गए थे, लेकिन वहां जाकर फंस गए हैं।

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मोबाइल नेटवर्क भी काम नहीं करता

वीडियो में उसने बताया कि जिस स्थान पर उन्हें रखा गया है, वहां मोबाइल नेटवर्क तक सही ढंग से काम नहीं करता और बाहरी दुनिया से संपर्क करना बेहद मुश्किल है। खाने-पीने से लेकर रहने तक की समुचित व्यवस्था नहीं है और लगातार मानसिक दबाव बनाया जा रहा है। उस्मान ने यह भी आरोप लगाया कि वहां चाइनीज नागरिकों के बीच रहकर काम कराया जा रहा है और विरोध करने पर प्रताड़ित किया जाता है। युवकों ने कई बार उन्हें मूल कंपनी में वापस भेजने की मांग की, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई। इसके बजाय वहीं रुककर काम करने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

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म्यांमार पहुंचते ही पासपोर्ट छीना

वीडियो में युवक ने कहा कि कंपनी ने तीन महीने का वीजा देकर उन्हें बुलाया था और बाद में वीजा एडजस्ट करने का भरोसा दिया गया। लेकिन, म्यांमार पहुंचने के बाद उनका पासपोर्ट भी छीन लिया गया और उन्हें नदी के रास्ते दूरस्थ इलाके में पहुंचा दिया गया। किसी तरह वीडियो बनाकर तीनों युवकों ने वतन वापसी की गुहार लगाई है। उस्मान द्वारा वीडियो जारी करने के बाद परिवार के लोग चिंतित हैं। परिवार के लोगों ने जिला प्रशासन और भारत सरकार से युवकों को सुरक्षित वतन वापसी कराने की मांग की है।

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