Date after date is not just fault of judges, government and police are also responsible, remarks Allahabad High Court तारीख पर तारीख सिर्फ जजों की गलती नहीं, सरकार और पुलिस भी जिम्मेदार, हाईकोर्ट की टिप्पणी, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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तारीख पर तारीख सिर्फ जजों की गलती नहीं, सरकार और पुलिस भी जिम्मेदार, हाईकोर्ट की टिप्पणी

तारीख पर तारीख सिर्फ जजों की गलती नहीं है। राज्य सरकार और पुलिस तंत्र की कमियां भी इसके लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति अरुण कुमार देशवाल ने की है।

Mon, 11 May 2026 07:56 PMDeep Pandey प्रयागराज, विधि संवाददाता
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तारीख पर तारीख सिर्फ जजों की गलती नहीं, सरकार और पुलिस भी जिम्मेदार, हाईकोर्ट की टिप्पणी

UP News: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिला न्यायालयों में लंबित आपराधिक मामलों पर चिंता जताते हुए एक आदेश में कहा है कि तारीख पर तारीख वाली स्थिति के लिए केवल न्यायिक अधिकारी जिम्मेदार नहीं हैं, राज्य सरकार और पुलिस तंत्र की कमियां भी इसके लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति अरुण कुमार देशवाल ने की है। कोर्ट ने कहा कि यह आम लोगों की न्याय व्यवस्था के प्रति धारणा को दर्शाता है। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि पर्याप्त स्टाफ, पुलिस सहयोग और समय पर फॉरेंसिक रिपोर्ट के बिना कोई न्यायिक अधिकारी प्रभावी ढंग से मामलों का निपटारा नहीं कर सकता।

कोर्ट ने मेवालाल प्रजापति की याचिका पर आदेश पारित कर कहा कि कई युवा और ईमानदार न्यायिक अधिकारी न्याय देने के उद्देश्य से सेवा में आते हैं, लेकिन स्टाफ की भारी कमी, समन और वारंट के क्रियान्वयन में पुलिस की लापरवाही, खराब जांच और दोषपूर्ण एफएसएल रिपोर्ट के कारण वे प्रभावी ढंग से काम नहीं कर पाते। इससे उनमें निराशा पैदा होती है। यह टिप्पणी अदालत ने एक हत्या आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान की। मामले में खून से सना पेचकस बरामद हुआ था, लेकिन जांच अधिकारी ने फॉरेंसिक साइंस लैब से डीएनए मिलान की जांच ही नहीं कराई कि खून मृतक का था या नहीं।

इस गंभीर जांच त्रुटि को देखते हुए अदालत ने पहले उत्तर प्रदेश के डीजीपी, गृह सचिव और एफएसएल निदेशक को तलब किया था। सुनवाई के दौरान निदेशक ने बताया कि राज्य की 12 लैब में से केवल 8 में डीएनए प्रोफाइलिंग की सुविधा है और वहां भी स्टाफ व आधुनिक मशीनों की भारी कमी है। कोर्ट को यह भी बताया गया कि उत्तर प्रदेश एफएसएल पुलिस विभाग के अधीन काम करता है और प्रशासनिक स्वतंत्रता न होने के कारण उपकरण खरीदने और स्टाफ नियुक्त करने में दिक्कत आती है।

अपराध करते कई विधायक, सांसद और मंत्री तक बन जाते हैं

अदालत ने कहा कि लंबित मामलों की बड़ी वजह जिला अदालतों में स्टेनोग्राफर, डिपोजिशन राइटर और अन्य कर्मचारियों की कमी, पुलिस द्वारा अदालत की प्रक्रियाओं का पालन न करना और एफएसएल रिपोर्ट में देरी है। महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने कहा कि इन व्यवस्थागत देरी के कारण कई अपराधी बिना किसी डर के अपराध करते रहते हैं और उनमें से कई विधायक, सांसद और मंत्री तक बन जाते हैं। अदालत ने एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स की रिपोर्ट का भी हवाला दिया, जिसमें कहा गया है कि उत्तर प्रदेश सरकार के 49% मंत्रियों पर आपराधिक मामले लंबित हैं, जिनमें 44% गंभीर आपराधिक मामलों से जुड़े हैं।

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और पुलिस को कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए

कोर्ट ने यह भी चिंता जताई कि उत्तर प्रदेश में न्यायिक अधिकारियों को व्यक्तिगत सुरक्षा अधिकारी उपलब्ध नहीं कराए जाते, जबकि पंजाब और हरियाणा में यह सुविधा है। अदालत ने कहा कि अपराधियों से खुलेआम धमकियां मिलने के कारण जजों के लिए निर्भीक होकर काम करना मुश्किल हो जाता है। इन परिस्थितियों में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और पुलिस को कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए। हाईकोर्ट ने जिला अदालतों में अतिरिक्त स्टाफ और बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराने, एफएसएल को गृह विभाग के तहत स्वायत्त संस्था बनाने, एक वर्ष के भीतर एफएसएल में रिक्तियां भरने और आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

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कोर्ट ने पुलिस अधिकारियों को फॉरेंसिक साक्ष्य जुटाने का प्रशिक्षण देने, जिला जजों की अध्यक्षता वाली मॉनिटरिंग सेल बैठकों में पुलिस प्रमुखों की व्यक्तिगत उपस्थिति सुनिश्चित करने और जांच अधिकारियों को डीएनए मिलान संबंधी रिपोर्ट अनिवार्य रूप से लेने के निर्देश भी दिए। इसके अलावा अदालत ने पुलिस को बीएनएसएस नियम, 2024 और ई- प्रोसेसेस रूल -2026 के तहत ई-समन, ई-वॉरंट और डिजिटल प्रक्रियाओं को लागू करने के निर्देश दिए। अदालत ने गवाहों के बयान दर्ज करने के लिए स्पीच टू - टेक्स्ट एआई तकनीक लागू करने की भी बात कही। मामले के तथ्यों पर विचार करते हुए कोर्ट ने आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने आदेश की प्रति उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को भी भेजने का निर्देश दिया ताकि आवश्यक कार्रवाई की जा सके।

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