civil courts do not have jurisdiction to hear rent disputes only the Rent Authority can do so दीवानी को किराया विवाद सुनवाई का अधिकार नहीं, हाईकोर्ट की टिप्पणी, कहा- सिर्फ रेंट अथॉरिटी करेगी, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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दीवानी को किराया विवाद सुनवाई का अधिकार नहीं, हाईकोर्ट की टिप्पणी, कहा- सिर्फ रेंट अथॉरिटी करेगी

हाईकोर्ट ने अहम टिप्पणी करते हुए एक आदेश में कहा है कि यूपी किराया विनियमन अधिनियम लागू होने के बाद विवाद की सुनवाई सिर्फ किराया प्राधिकारी ही कर सकता है। दीवानी अदालत को ऐसे मुकदमे सुनने का अधिकार नहीं है।

Sun, 14 June 2026 06:50 AMPawan Kumar Sharma विधि संवाददाता, प्रयागराज
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दीवानी को किराया विवाद सुनवाई का अधिकार नहीं, हाईकोर्ट की टिप्पणी, कहा- सिर्फ रेंट अथॉरिटी करेगी

UP News: इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad high court) ने एक आदेश में कहा है कि उत्तर प्रदेश किराया विनियमन अधिनियम लागू होने के बाद विवाद की सुनवाई सिर्फ किराया प्राधिकारी ही कर सकता है। दीवानी अदालत को ऐसे मुकदमे सुनने का अधिकार नहीं है। ऐसे में दीवानी मुकदमा पोषणीय नहीं है।

यह आदेश न्यायमूर्ति डॉ. योगेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने श्रीराम व अन्य की पुनरीक्षण याचिका पर दिया है। मामले के तथ्यों के अनुसार मकान मालिक शिवसेवक शर्मा ने हाथरस के जिला जज के समक्ष वाद दाखिल कर बढ़ा हुआ किराया मांगा था। किरायेदारों ने सीपीसी के आदेश 7 नियम 11 के तहत अर्जी देकर कहा कि धारा 38(1) के तहत दीवानी अदालत को क्षेत्राधिकार नहीं है इसलिए वाद खारिज किया जाए। कोर्ट ने यह अर्जी खारिज कर दी, जिसे याचिका में चुनौती दी गई थी।

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हाईकोर्ट ने कहा कि वादी ने माना है कि यूपी एक्ट इस संपत्ति पर लागू होता है। वादी ने धारा 9 के तहत बढ़ा हुआ किराया मांगा है। साथ ही दोनों पक्षों के बीच मकान मालिक-किरायेदार का रिश्ता भी स्वीकार है। कोर्ट ने कहा कि किराया विवादों के लिए अलग व्यवस्था बनाई गई है। मकान मालिक-किरायेदार का रिश्ता मान लिया गया है तो लिखित किरायानामा न होना जरूरी नहीं है। ऐसे सभी विवाद सिर्फ रेंट अथॉरिटी के पास जाएंगे। धारा 38(1) के तहत दीवानी अदालत का अधिकार खत्म हो गया है। इसी के साथ हाईकोर्ट ने इस मामले के संदर्भ में जिला जज हाथरस का आदेश रद्द कर दिया। साथ ही किरायेदारों की अर्जी स्वीकार करते हुए कहा कि वादी रेंट अथॉरिटी के पास जा सकते हैं। रेंट अथॉरिटी कानून के हिसाब से निस्तारण करे।

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जनगणना ड्यूटी में एलआईसी कर्मचारियों की तैनाती पर रोक

उधर, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जनगणना-2027 के कार्यों के लिए भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के कर्मचारियों को तैनात करने संबंधी कानपुर नगर निगम के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने प्रथम दृष्टया माना कि संबंधित अधिकारी को ऐसा आदेश जारी करने का अधिकार नहीं था और आदेश कानून के अनुरूप प्रतीत नहीं होता। यह आदेश न्यायमूर्ति सलिल कुमार राय और न्यायमूर्ति स्वरूपम चतुर्वेदी की खंडपीठ ने नॉर्थ सेंट्रल जोन इंश्योरेंस इम्प्लॉइज फेडरेशन की विशेष अपील पर सुनवाई करते हुए पारित किया। अपील में 29 मई 2026 को एकलपीठ द्वारा याचिका खारिज किए जाने के आदेश को चुनौती दी गई थी।

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क्या था मामला

याचिकाकर्ता संगठन ने 5 मई 2026 को कानपुर नगर निगम के जोनल अधिकारी/चार्ज अधिकारी द्वारा जारी उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत एल आई सी कर्मचारियों को जनगणना-2027 के कार्यों में लगाने का निर्णय लिया गया था। संगठन ने अदालत से इस निर्णय को रद्द करने तथा भविष्य में एल आई सी कर्मचारियों को जनगणना ड्यूटी में न लगाने का निर्देश देने की मांग की थी। एकलपीठ ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी थी कि याचिकाकर्ता ने विवादित आदेश को स्पष्ट रूप से चुनौती नहीं दी थी और केवल सामान्य प्रकृति की प्रार्थना की गई थी।

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