मजिस्ट्रेट की शक्तियों का जमकर दुरुपयोग कर रहे पुलिस कमिश्नर, हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी
पुलिस कमिश्नर मजिस्ट्रेट की शक्तियों का जमकर दुरुपयोग कर रहे हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अवैध हिरासत से जुड़े मामले में पुलिस कमिश्नर को मिले मजिस्ट्रेट के अधिकारों के दुरुपयोग पर नाराजगी जताई है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली में शक्तियों के दुरुपयोग और अवैध हिरासत से जुड़े मामले में पुलिस कमिश्नर को मिले मजिस्ट्रेट के अधिकारों के दुरुपयोग पर नाराजगी जताई है। हाईकोर्ट ने कहा है कि पुलिस कमिश्नर को मजिस्ट्रेट की जो शक्तियां दी गई हैं, उसका जमकर दुरुपयोग किया जा रहा है। कोर्ट ने शांति भंग की आशंका में अवैध रूप से जेल भेजने और आठ दिन की अवैध हिरासत के लिए सरकार को दो लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया है। यह भी निर्देश दिया है कि मुआवजे की यह राशि दोषी पुलिस अधिकारी के वेतन से वसूली जाए।
यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ एवं न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने मंसूर अहमद उर्फ लल्लू की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। याची मंसूर अहमद को गत 19 मार्च को प्रयागराज के खीरी थानाक्षेत्र से पुलिस ने शांति भंग की आशंका और अन्य धाराओं के तहत हिरासत में लिया था। पुलिस का आरोप था कि उसने गांव में गाली-गलौज की, जिससे शांति व्यवस्था भंग होने का खतरा था। उसी दिन उसे प्रयागराज के सहायक पुलिस आयुक्त/विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। एसीपी ने जमानत या निजी मुचलका भरने के लिए अगले दिन की तारीख तय करने की बजाय, सीधे आठ दिन बाद यानी 27 मार्च की तारीख तय कर दी और उसे जेल भेज दिया। कोर्ट ने इसे कानून का खुला उल्लंघन और पूरी तरह अवैध हिरासत माना।
प्रयागराज कमिश्नरेट के आंकड़े देख जताई चिंता
कोर्ट ने प्रयागराज कमिश्नरेट के आंकड़ों को देखकर चिंता व्यक्त की। कहा कि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की रिपोर्ट से पता चला कि वर्ष 2025 में 1,321 लोगों और वर्ष 2026 (अब तक) में 721 लोगों को शांति भंग की आशंका में एक से दो सप्ताह या उससे अधिक समय तक जेलों में बंद रखा गया। कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि याची को दो लाख रुपये का मुआवजा छह सप्ताह के भीतर दिया जाए और तीन महीने के भीतर दोषी अधिकारी के खिलाफ जांच कर यह राशि उनके वेतन से वसूल की जाए। कोर्ट ने प्रयागराज के पुलिस कमिश्नर को 14 सितंबर को या उससे पहले इस आदेश की अनुपालन रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। ऐसा न करने पर उन्हें व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में हाजिर होना होगा।
उल्लंघन पर प्रतिदिन 25 हजार मुआवजा, वेतन से कटेगा
हाईकोर्ट ने भविष्य में इस तरह के दुरुपयोग को रोकने के लिए कई दिशा-निर्देश जारी किए हैं। कहा है कि हिरासत के बाद आरोपी को शांति बनाए रखने के लिए केवल एक पर्सनल बॉन्ड भरने को कहा जाएगा। इसके लिए कोई पैसा जमा करने या किसी अन्य ज़मानती की आवश्यकता नहीं होगी। पर्सनल बॉन्ड की राशि 20 हजार रुपये से अधिक नहीं होगी। यदि मजिस्ट्रेट इसे बढ़ाते हैं तो उन्हें लिखित में कारण बताना होगा। मुचलका भरते ही आरोपी को तुरंत रिहा किया जाएगा। यदि आरोपी मुचलका भरने से मना करता है तो उसके इनकार को लिखित और ऑडियो-विजुअल (वीडियो) मोड में रिकॉर्ड किया जाएगा। उसे उसकी चुनी हुई तारीख पर दोबारा मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाएगा। यदि किसी व्यक्ति को इन नियमों के उल्लंघन में 24 घंटे से अधिक समय तक अवैध रूप से हिरासत में रखा जाता है तो राज्य सरकार पीड़ित को 25 हजार रुपये प्रतिदिन के हिसाब से मुआवजा देगी। मुआवजे की यह रकम जिम्मेदार मजिस्ट्रेट या पुलिस अधिकारी के वेतन से काटी जाएगी और उनके खिलाफ विभागीय कार्यवाही भी की जाएगी।




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