यूपी में बच्चों की खरीद-फरोख्त का खुलासा, अस्पतालों में फैला जाल; हकीकत जान हैरान रह जाएंगे आप
पुलिस का कहना है कि इस गिरोह का नेटवर्क काफी बड़ा है। अब तक यह सामने नहीं आया है कि पहले जो बच्चे बेचे गए हैं, वे चोरी किए गए हैं या फिर अपहरण। तह तक पहुंचने के लिए आरोपियों को रिमांड पर लेकर दोबारा पूछताछ की जाएगी। उनके मोबाइल की कॉल डिटेल, व्हाट्सएप की IPDR और बैंक स्टेटमेंट की जांच हो रही है।

UP News : उत्तर प्रदेश में बच्चों की खरीद-फरोख्त का बड़ा खुलासा हुआ है। इस गैंग का जाल अस्पतालों में फैला हुआ है। बरेली के आंवला के मनौना धाम से बच्चे के अपहरण के पूरे मामले का पुलिस ने पटाक्षेप करते हुए शनिवार को दो झोलाछाप और एक अन्य नर्स को गिरफ्तार कर जेल भेजा है। इस मामले में अब तक कुल छह गिरफ्तारियां हो चुकी हैं और पुलिस ने मानव तस्करी की धारा भी बढ़ा दी है। गिरोह की सरगना नर्स है, जो बरेली के एक मेडिकल कॉलेज में कार्यरत है। बाकी सभी आरोपियों की भूमिका बिक्री के लिए बच्चे उपलब्ध कराने की थी।
प्रेसवार्ता के दौरान एसपी साउथ अंशिका वर्मा ने बताया कि 24 मई को आंवला में मनौना धाम के सफाई कर्मचारी बदायूं में थाना उसैहत के गांव डढरिया असगुणा निवासी रमन के डेढ़ वर्षीय बेटे ऋषभ का अपहरण हो गया था। इस मामले में 26 मई को शाहजहांपुर में थाना गढ़िया रंगीन के गांव धौवेला करीमनगर निवासी योगेश उर्फ अमित और जलालाबाद के गांव मोहल्ला अशफाकनगर निवासी पवन को मुठभेड़ में गिरफ्तार कर जेल भेजा था। दोनों ने लखीमपुर में थाना मैगलगंज के गांव सुहैला निवासी उत्तम बाजपेयी की डिमांड पर इस बच्चे का अपहरण किया था। शुक्रवार को उत्तम बाजपेयी को भी जेल भेज दिया। उत्तम से मिली जानकारी के आधार पर शनिवार को सीतापुर में थाना महोली के गांव उलदौली के झोलाछाप संजय कुमार विश्वास, लखीमपुर खीरी में मैगलगंज के गांव भगवतीपुर के झोलाछाप केशवराम उर्फ मंजेश और मीरगंज के गांव रसूलपुर की रहने वाली नर्स सीता को गिरफ्तार कर जेल भेजा है। झोलाछाप संजय मूलरूप से पश्चिम बंगाल के जिला नादिया थाना सिमोरली के 24 परगना का मूल निवासी है और महोली में अस्पताल संचालित करता है। केशवराम उर्फ मंजेश अपने गांव में क्लीनिक चलाता है और नर्स सीता मूलरूप से बदायूं में थाना दातागंज के गांव गाजीपुर की रहने वाली है, वह बरेली के एक मेडिकल कॉलेज में 15 साल से नर्स का काम करती है।
सीता सरगना, उत्तम दलाल और बाकी सब बच्चा सप्लायर : आरोपियों से पूछताछ में सामने आया कि गिरोह की सरगना सीता है और उत्तम उस तक बच्चों को पहुंचाने वाला दलाल है। झोलाछाप संजय, केशवराम उर्फ मंजेश और योगेश व पवन डिमांड के अनुरूप बच्चों का इंतजाम कर उत्तम को उपलब्ध कराते थे। सीता पांच लाख रुपये में बच्चा बेचती थी। संजय और केशवराम ने दो नवजात बच्चे उत्तम को दिए थे, जो उसने सीता को सौंप दिए। सीता ने उन बच्चों को पांच-पांच लाख रुपये में बेचा। एक बच्चे के बदले उत्तम को 1.10 लाख और दूसरे के बदले 1.20 लाख मिले।
मोबाइल में कई बच्चों के फोटो समेत तमाम सबूत मिले
आरोपियों के मोबाइल की जांच मानव तस्करी के तमाम साक्ष्य मिले हैं। सीता के मोबाइल में कई बच्चों के फोटो मिले हैं। योगेश ने आंवला से अपहृत ऋषभ का फोटो उत्तम को भेजा और उसने केशवराम को भेजा था। यह भी सामने आया कि चार महीने में सीता और उत्तम के बीच 215 बार मोबाइल पर बातचीत हुई है। इसके अलावा सीता और उत्तम के बीच अकाउंट के जरिये लेनदेन हुआ है। इन सभी चीजों को विवेचना में शामिल करके मुकदमे में मानव तस्करी की धारा बढ़ा दी है।
जांच आगे बढ़ाने को लिया जाएगा रिमांड
पुलिस का कहना है कि इस गिरोह का नेटवर्क काफी बड़ा है। अब तक यह सामने नहीं आ सका है कि पहले जो बच्चे बेचे गए हैं, वे चोरी किए गए हैं या फिर अपहरण। पूरे मामले की तह तक पहुंचने के लिए आरोपियों को रिमांड पर लेकर दोबारा पूछताछ की जाएगी। उनके मोबाइल की कॉल डिटेल, व्हाट्सएप की आईपीडीआर और बैंक स्टेटमेंट की जांच कराई जा रही है।
अस्पतालों से ही तैयार हुआ मानव तस्करी का नेटवर्क
मानव तस्करी गैंग का पूरा नेटवर्क अस्पतालों में ही तैयार हुआ। नर्स सीता से उत्तम की मुलाकात नवंबर 2025 में मेडिकल कॉलेज में एक दोस्त का उपचार कराने के दौरान हुई। उत्तम की योगेश से मुलाकात शाहजहांपुर के निजी मेडिकल कॉलेज में एक अन्य दोस्त का उपचार कराने के दौरान हुई। योगेश का मोबाइल नंबर भी उसने अपने फोन में डॉ. अमित के नाम से सेव किया था। अन्य दोनों झोलाछाप संजय विश्वास और केशवराम से भी उत्तम की मुलाकात उनके अस्पताल व क्लीनिक पर हुई।
पांच-पांच लाख में बेचे गए बिन ब्याही मां के दो बच्चे
पुलिस की गिरफ्त से बचने के लिए यह गिरोह बिक्री के लिए अनचाहे बच्चों का चयन करता था ताकि वे कार्रवाई से बचे रहे हैं। मगर इस बार उन्होंने बच्चे का अपहरण करा लिया और पूरे गैंग का भंडाफोड़ कर दो झोलाछाप समेत छह आरोपियों को जेल भेज दिया गया। नर्स सीता के जरिये इसी तरह के दो नवजात पांच-पांच लाख रुपये में बेचे गए।
एसपी साउथ अंशिका वर्मा ने बताया कि बच्चों की खरीद फरोख्त करने वाले मानव तस्कर गिरोह ने पुलिस से बचने के लिए पक्की रणनीति तैयार की थी। झोलाछाप संजय विश्वास और केशवराम ऐसी युवतियों तलाश में रहते थे, जो प्रेम प्रसंग में गर्भवती हो जाती थीं और गर्भपात कराना चाहती थीं। अल्ट्रासाउंड सेंटर से मिली जानकारी के जरिए ये लोग इन परिवारों से संपर्क कर बच्चे को जन्म देने के लिए तैयार करते थे। इसके बदले उन्हें रकम दी जाती थी और जन्म के एक-दो दिन बाद ही बच्चे को ले जाते थे। दोनों ने पूर्व में ऐसे ही दो-दो दिन के दो बच्चों को उत्तम के जरिए नर्स सीता को बेचा था। पुलिस आरोपियों की मोबाइल डिटेल के आधार पर इन परिवारों के बारे में जानकारी कर रही है। सीता से बच्चे की डिमांड आने पर इस उत्तम ने योगेश और पवन से संपर्क किया। इस पर योगेश और पवन ने बच्चे का अपहरण कर लिया। इसी वजह से पुलिस उनके पीछे लग गई और पूरे गिरोह का भंडाफोड़ हो गया। जांच में यह भी सामने आया कि नर्स सीता बच्चों की खरीद फरोख्त में इतना सक्रिय हो चुकी है कि ट्रू कॉलर पर उसका नाम एजेंट सीता और डीलर सीता के नाम से दिखाई दे रहा है। वह लोगों को बच्चा बेचने के दौरान गुमराह करने के लिए कागजी प्रक्रिया भी करती थी।
क्या बोली पुलिस
एसपी साउथ अंशिका वर्मा ने बताया कि पूरे गिरोह का भंडाफोड़ कर दो झोलाछाप और नर्स समेत छह आरोपियों को जेल भेजा जा चुका है। जांच से साफ हो चुका है यह गिरोह मानव तस्करी में सक्रिय है और दो बच्चों को पहले भी बेच चुका है। मुकदमे में मानव तस्करी की धारा बढ़ा दी गई है। जांच को आगे बढ़ाने के लिए आरोपियों को रिमांड पर लेकर एक बार फिर से पूछताछ की जाएगी।




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