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वीजा पर भारत आया और बनवा लिया डीएल-आधार, 40 साल से रह रहा पाकिस्तानी गिरफ्तार

बुलंदशहर पुलिस ने 40 साल से अवैध रूप से रह रहे एक पाकिस्तानी नागरिक सैयद वासित अली को गिरफ्तार किया है। आरोपी ने फर्जी तरीके से भारतीय पहचान पत्र बनवा लिए थे। वह 2012 में भी मेरठ से जेल जा चुका है। पुलिस अब उसके स्थानीय मददगारों और सुरक्षा पहलुओं की जांच कर रही है।

Fri, 24 April 2026 01:31 PMYogesh Yadav बुलंदशहर, नगर कोतवाली संवाददाता
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वीजा पर भारत आया और बनवा लिया डीएल-आधार, 40 साल से रह रहा पाकिस्तानी गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय पुलिस ने एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए एक पाकिस्तानी नागरिक को गिरफ्तार किया है। यह आरोपी पिछले करीब 40 वर्षों से अपनी असली पहचान छिपाकर अवैध रूप से भारत में रह रहा था। चौंकाने वाली बात यह है कि उसने न केवल यहां अपना ठिकाना बनाया, बल्कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ड्राइविंग लाइसेंस और आधार कार्ड जैसे महत्वपूर्ण सरकारी पहचान पत्र भी बनवा लिए थे।

मुखबिर की सूचना पर हुई गिरफ्तारी

नगर कोतवाली प्रभारी धर्मेंद्र राठौर के नेतृत्व में पुलिस टीम देर रात गश्त पर थी, तभी मुखबिर से एक संदिग्ध विदेशी नागरिक के संबंध में पुख्ता जानकारी मिली। सूचना थी कि एक पाकिस्तानी नागरिक, जो लंबे समय से फर्जी पहचान पर सुशीला विहार इलाके में रह रहा है, किसी काम से नुमाइश ग्राउंड की ओर जाने वाला है। पुलिस ने तत्काल घेराबंदी की और रेलवे लाइन के पास से संदिग्ध व्यक्ति को हिरासत में ले लिया।

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तलाशी के दौरान आरोपी की जेब से एक आधार कार्ड और एक ड्राइविंग लाइसेंस बरामद हुआ, जिस पर बुलंदशहर का स्थानीय पता दर्ज था। हालांकि, जब पुलिस ने कड़ाई से पूछताछ की, तो उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसकी पहचान सैयद वासित अली पुत्र सैयद लईक अहमद, निवासी कराची (पाकिस्तान) के रूप में हुई। उसके पास से एक पाकिस्तानी पासपोर्ट की फोटोकॉपी भी बरामद हुई है।

मां के साथ आया था भारत, फिर नहीं लौटा

पूछताछ में वासित ने बताया कि उसकी कहानी चार दशक पुरानी है। उसकी मां बिलकिस का कराची में तलाक हो गया था, जिसके बाद उन्होंने बुलंदशहर के सैंथला निवासी एक व्यक्ति से निकाह कर लिया। वासित अपनी तीन बहनों के साथ मां के साथ भारत आया था। समय बीतने के साथ उसकी बहनों का तो 'लॉन्ग टर्म वीजा' (LTV) बन गया और वे यहीं बस गईं, लेकिन वासित की कानूनी अड़चनें खत्म नहीं हुईं। उसने कई बार वीजा के लिए आवेदन किया, लेकिन हर बार उसका आवेदन खारिज या लंबित होता रहा।

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2012 में भी जा चुका है जेल

पुलिस की छानबीन में वासित का पुराना आपराधिक इतिहास भी सामने आया है। वह साल 2012 में मेरठ के थाना ब्रह्मपुरी क्षेत्र से विदेशी अधिनियम की धारा 14 के तहत गिरफ्तार होकर जेल जा चुका है। जेल से छूटने के बाद उसने अपनी पहचान छिपाने के लिए फर्जी कागजातों का सहारा लेना शुरू कर दिया। आपराधिक रिकॉर्ड होने के कारण उसे भारत में रहने की वैध अनुमति नहीं मिल पा रही थी, इसीलिए उसने स्थानीय स्तर पर जालसाजी कर सरकारी तंत्र में सेंध लगाई और भारतीय पहचान पत्र हासिल कर लिए।

जांच के घेरे में स्थानीय मददगार

बुलंदशहर के एसएसपी दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है। पुलिस अब उन लोगों की तलाश कर रही है जिन्होंने वासित को फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस और आधार कार्ड बनवाने में मदद की थी। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि इतने वर्षों तक वह किन-किन लोगों के संपर्क में रहा और क्या उसने किसी संदिग्ध गतिविधि में भाग लिया है। आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने और विदेशी अधिनियम की सुसंगत धाराओं में मामला दर्ज कर उसे जेल भेज दिया गया है।

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