मायावती ने सपा-भाजपा से मारी बाजी, यूपी विस चुनाव के लिए इस सीट से बसपा प्रत्याशी का ऐलान
उत्तर प्रदेश में भाजपा और सपा से बाजी मारते हुए बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने विधानसभा चुनाव के लिए अपने प्रत्याशियों का ऐलान शुरू कर दिया है। जौनपुर की शाहगंज विधानसभा सीट से जुल्फेकार अहमद गामा को प्रत्याशी घोषित किया है।

उत्तर प्रदेश की राजनीति में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने चुनावी बिगुल फूंकते हुए उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसी कड़ी में भाजपा और सपा से बाजी मारते हुए एक प्रत्याशी का भी ऐलान कर दिया है। जौनपुर जिले की महत्वपूर्ण विधानसभा सीट शाहगंज से जुल्फेकार अहमद गामा को बसपा का आधिकारिक प्रत्याशी घोषित किया गया है। जौनपुर में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान प्रयागराज, वाराणसी और अयोध्या मंडल के जोन इंचार्ज दिनेश चंद्रा ने गामा के नाम की औपचारिक घोषणा की।
सोशल इंजीनियरिंग पर बसपा का दांव
जोन इंचार्ज दिनेश चंद्रा ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि मायावती के निर्देशानुसार जुल्फेकार अहमद गामा को प्रत्याशी घोषित किया गया है। उन्होंने विश्वास जताया कि गामा न केवल बहुजन समाज बल्कि सर्वसमाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की क्षमता रखते हैं। चंद्रा ने जोर देकर कहा कि बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर और मान्यवर कांशीराम के संघर्षों और सपनों को साकार करने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री मायावती का प्रयास निरंतर जारी है और शाहगंज की सीट जीतना इस दिशा में एक बड़ा कदम होगा। गामा को कुछ समय पहले इस विस सीट का प्रभारी बनाया गया था।
नवनियुक्त प्रत्याशी जुल्फेकार अहमद गामा मूल रूप से आजमगढ़ जनपद के पवई थाना क्षेत्र के गोधना गांव के निवासी हैं। वह लंबे समय से बसपा की नीतियों से जुड़े रहे हैं और क्षेत्र में शिक्षा के प्रचार-प्रसार के लिए भी जाने जाते हैं। टिकट मिलने पर गामा ने कहा, "पार्टी ने मुझ पर जो भरोसा दिखाया है, मैं उसे प्राणप्रण से निभाऊंगा। हम मायावती के विकासवादी विजन को घर-घर तक पहुंचाएंगे।"
अनुशासन का हंटर: पूर्व एमएलसी धर्मवीर सिंह अशोक निष्कासित
लखनऊ। एक तरफ जहा बसपा नए चेहरों को मौका दे रही है, वहीं दूसरी तरफ पार्टी के भीतर अनुशासनहीनता करने वालों पर मायावती का सख्त रुख भी सामने आया है। बसपा के कद्दावर नेता और पूर्व एमएलसी धर्मवीर सिंह अशोक को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है।
बुलंदशहर के जिलाध्यक्ष रविंद्र प्रधान द्वारा जारी आदेश के अनुसार, धर्मवीर सिंह अशोक लंबे समय से पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त पाए जा रहे थे। उन पर अनुशासनहीनता के गंभीर आरोप थे। जिलाध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि उन्हें कई बार अपनी कार्यशैली में सुधार करने की चेतावनी दी गई थी, लेकिन जब उनके व्यवहार में कोई बदलाव नहीं आया, तो पार्टी की गरिमा को सर्वोपरि रखते हुए उन्हें निष्कासित करने का निर्णय लिया गया।
मायावती के इन फैसलों से एक बात साफ है: बसपा आगामी चुनाव में न केवल नए चेहरों के साथ उतर रही है, बल्कि संगठन के भीतर अनुशासन को लेकर कोई समझौता करने के मूड में नहीं है।




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