बसपा को बड़ा झटका दिग्गज मुस्लिम चेहरा और पैनलिस्ट एमएच खान सपा में हुए शामिल
बसपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और प्रमुख मुस्लिम चेहरा डॉ. एमएच खान समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए हैं। अखिलेश यादव ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई। डॉ. खान लंबे समय से बसपा के पैनलिस्ट रहे हैं और टीवी चैनलों पर बसपा का पक्ष रखते थे।

उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी धारदार बयानबाजी और टीवी बहसों के लिए पहचाने जाने वाले बहुजन समाज पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. एमएच खान ने पाला बदल लिया है। रविवार को उन्होंने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से लखनऊ स्थित पार्टी मुख्यालय में मुलाकात की और आधिकारिक रूप से सपा की सदस्यता ग्रहण की। डॉ. एमएच खान का सपा में जाना बसपा के लिए एक बड़ा नुकसान माना जा रहा है, विशेष रूप से मुस्लिम मतदाताओं के बीच पैठ बनाने की कोशिशों के जुटी बसपा के लिए यह झटका कहा जा रहा है।
बसपा का प्रमुख चेहरा रहे हैं डॉ. एमएच खान
डॉ. एमएच खान लंबे समय से बहुजन समाज पार्टी के साथ जुड़े हुए थे। मायावती के भरोसेमंद सिपहसालारों में गिने जाने वाले खान टीवी चैनलों पर होने वाली डिबेट्स में बसपा का पक्ष पूरी मजबूती और तार्किकता के साथ रखते थे। जब भी पार्टी किसी संकट में होती या विपक्ष के हमलों का सामना कर रही होती, डॉ. एमएच खान मीडिया के सामने ढाल बनकर खड़े नजर आते थे।
अखिलेश यादव की मौजूदगी में 'साइकिल' पर सवार
समाजवादी पार्टी के कार्यालय में अखिलेश यादव ने डॉ. एमएच खान का गर्मजोशी से स्वागत किया। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच प्रदेश की वर्तमान राजनीतिक स्थिति और अल्पसंख्यकों के मुद्दों पर लंबी चर्चा हुई। सपा सूत्रों का कहना है कि अखिलेश यादव मुस्लिम नेतृत्व को पार्टी में और अधिक प्रभावी भूमिका देना चाहते हैं। डॉ. एमएच खान जैसे अनुभवी नेता के आने से पार्टी को बौद्धिक और रणनीतिक स्तर पर मजबूती मिलेगी।
बड़ी जिम्मेदारी सौंप सकते हैं अखिलेश
बताया जा रहा है कि समाजवादी पार्टी में शामिल होने के बाद डॉ. एमएच खान को जल्द ही बड़ी जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। वे अब सपा के आधिकारिक पैनलिस्ट के तौर पर टीवी चैनलों पर पार्टी का पक्ष रखेंगे। उनकी वाकपटुता और विषयों पर पकड़ को देखते हुए सपा को उम्मीद है कि वे भाजपा और अन्य विरोधी दलों को बहस के मंच पर कड़ी चुनौती देंगे।
मुस्लिम राजनीति के समीकरणों पर असर
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि बसपा के पुराने और वफादार नेताओं का सपा की ओर खिंचाव यह संकेत देता है कि विपक्षी खेमे में सपा खुद को अल्पसंख्यकों के लिए सबसे मजबूत विकल्प के रूप में स्थापित करने में सफल हो रही है। डॉ. एमएच खान का सपा में आना न केवल मीडिया प्रबंधन के लिहाज से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि बसपा के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।




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