प्राइवेट वीडियो के नाम पर महंत को किया जा रहा था ब्लैकमेल, रिटायर्ड DSP ने रची साजिश
महंत की ब्लैकमेलिंग के इस केस में एक रिटायर्ड डिप्टी एसपी भी बुरी तरह फंस गए हैं। उनकी कार को पुलिस ने कब्जे में लिया है। उसी कार से जितेंद्र जेपी होटल पहुंचा था। महंत नरेशपुरी के सेवक जयपुर निवासी अनुज कुमार ने 31 मई को रकाबगंज थाने में मुकदमा लिखाया था। बताया था कि जितेंद्र ने उसे फोन किया।

Blackmailing of a Mahant : राजस्थान के दौसा स्थित मेहंदीपुर बालाजी धाम के महंत नरेशपुरी को एक महीने से ब्लैकमेल किया जा रहा था। चर्चा है कि उनसे दो करोड़ रुपये वसूलने की योजना थी। हालांकि मुकदमे में कम रकम लिखाई गई है। पुलिस की शुरुआती जांच में यूपी पुलिस के एक रिटायर्ड डिप्टी एसपी भी बुरी तरह फंस गए हैं। उनकी कार को भी पुलिस ने कब्जे में लिया है। उसी कार से जितेंद्र जेपी होटल पहुंचा था। महंत नरेशपुरी के सेवक जयपुर निवासी अनुज कुमार ने 31 मई को रकाबगंज थाने में मुकदमा लिखाया था। पुलिस को बताया था कि धौलपुर निवासी जितेंद्र ने उसे फोन किया। ट्रूकॉलर पर उसका नाम आरिफ आया। उससे कहा कि उसके पास महंत के निजी वीडियो हैं। उन्हें महंत से मिलना है। वीडियो सोशल मीडिया और न्यूज में वायरल हो सकते हैं। 26 मई को उसे फोन करके जेपी होटल बुलाया गया। पांच लाख रुपये की मांग की गई। बाद में उसे शाहजहां गार्डन के पास रोका गया।
आरोप है कि गणेश बाग, न्यू आगरा के रहने वाले यूपी पुलिस के रिटायर डिप्टी एसपी (सीओ) ने अनुज के सीने पर राइफल तान दी। उससे एक लाख रुपये छीन लिए। जान से मारने की धमकी दी। इस मामले में पुलिस ने गुपचुप तरीके से रिटायर्ड डिप्टी एसपी और जितेंद्र को एक जून को जेल भेज दिया था। पुलिस ने जांच की शुरुआत जेपी होटल से की थी। होटल में चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। पुलिस को सीसीटीवी फुटेज से पता चला कि राजस्थान निवासी जितेंद्र ब्रीजा कार से होटल पहुंचा था। कार रिटायर्ड डिप्टी एसपी की थी। पुलिस ने कार को कब्जे में लिया। जिस नंबर से फोन किए जाते थे, वह सिम जितेंद्र के मोबाइल में चल रहा था। उससे पूछताछ की गई तो उसने बताया कि सिम का इंतजाम रिटायर्ड डिप्टी एसपी ने किया था। पूरी योजना उन्होंने ही बनाई थी। उनकी योजना रातोंरात बड़ी रकम वसूलने की थी। उसे अंदाजा नहीं था कि उनकी धमकी के बाद भी मामला पुलिस तक पहुंच जाएगा। चूंकि साजिशकर्ता खुद पुलिस से रिटायर हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया था कि पुलिस को वह संभाल लेंगे। इस मामले में महंत के भाई ने आगरा पुलिस से संपर्क किया था। राजस्थान के एक आईपीएस अधिकारी ने घटना की जानकारी पुलिस अधिकारियों को दी थी।
रिटायर्ड डिप्टी एसपी ने पुलिस को धमकाया
32 साल से अधिक समय तक पुलिस की वर्दी पहनने वाले रिटायर्ड डिप्टी एसपी पुलिस के एक-एक अंदाज से वाकिफ हैं। उन्हें पता है कि पुलिस अपराधियों को पकड़ने के लिए क्या-क्या करती है। रकाबगंज पुलिस ने जब उन्हें पकड़ा तो उन्होंने थाना प्रभारी पर रौब गांठने का प्रयास किया। पुलिस वालों से कहा कि जानते नहीं वह कौन है। उसकी पहुंच कहां तक है। इसके बाद भी पुलिस वाले घबराए नहीं। पुलिसवालों ने रिटायर्ड डिप्टी एसपी की एक नहीं सुनी बल्कि उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
जिसने भी देखा, वह रह गया हैरान
रिटायर्ड डिप्टी एसपी पर रंगदारी मांगने का आरोप है। वह महंत को ब्लैकमेल करने के मामले में आरोपित हैं। इस जानकारी ने पुलिस कर्मियों को हैरान कर दिया है। पुलिस कर्मी यह बोल रहे हैं कि पता नहीं इसको क्या हो गया। उन्होंने तो हद ही कर दी। ऐसा भी क्या लालच। पेंशन से काम नहीं चल रहा था तो कोई काम कर लेता। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि इस घटना से अंदाजा लगाया जा सकता है कि रिटायरमेंट के बाद जब यह हाल है तो नौकरी के दौरान उन्होंने क्या गुल खिलाए होंगे।




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