खेत में फसल अवशेष जला तो प्रभावित होगी मिट्टी संरचना
Bhadoni News - ज्ञानपुर, संवाददाता। गेहूं की कटाई व मड़ाई का काम करीब 92 फीसदी पूर्ण

ज्ञानपुर, संवाददाता। गेहूं की कटाई व मड़ाई का काम करीब 92 फीसदी पूर्ण हो चुका है। ऐसे में किसान गेहूं फसल का अवशेष खेत में कदापि न जलाएं। इससे पर्यावरण दूषित होने व अगलगी की घटना बढ़ने के साथ मिट्टी की संरचना भी प्रभावित हो सकती है। उप कृषि निदेशक डा. अश्वनी कुमार की माने तो खेत में फसल अवशेष जलाने की शिकायत मिली तो विभागीय स्तर से कार्रवाई की जाएगी।गेहूं कटाई के बाद अवशेष को खेत में जलाना हर स्तर से कृषकों के लिए नुकसानदेह कदम होगा। कटाई के बाद खेत में बचा अवशेष लोग जला देते हैं जो हर स्तर से गलत है।
गेहूं फसल की कटाई कंबाईन हार्वेस्टर, रीपर एवं अन्य साधन से कुछ लोग करा लिए हैं। ऐसे में खेत में बचा अवशेष लोग जला देते हैं। ऐसा करने से अप्रिय घटना होने के साथ प्रदूषण भी बढ़ता है। इतना ही नहीं मिट्टी की संरचना भी प्रभावित होता है। कृषि विज्ञान केंद्र बेजवां के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. विश्वेंदु द्विवेदी ने बताया कि फसल अवशेष जलने से भूमि में उपलब्ध जैव विविधता समाप्त हो जाती है। भूमि में उपस्थित सूक्षम जीव जलकर नष्ट हो जाते हैं। सूक्ष्मीजीवों के नष्ट के फलस्वरूप जैविक खाद का निर्माण होना बंद हो जाता है। भूमि की ऊपरी पर्त में ही पौधों के लिए जरूरी पोषक तत्व उपलब्ध रहते हैं। आग लगने के कारण पोषक तत्व जलकर नष्ट हो जाते हैं। भूमि कठोर हो जाती है जिससे भूमि की जल धारण क्षमता कम होने से फसलें सूखती हैं।
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