Banke Bihari Trust will handle everything including donations, offerings, property and administration, Bill presented in दान, चढ़ावा, संपत्ति, प्रशासन सबकुछ संभालेगा बांके बिहारी न्यास, यूपी विधानसभा में विधेयक पेश, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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दान, चढ़ावा, संपत्ति, प्रशासन सबकुछ संभालेगा बांके बिहारी न्यास, यूपी विधानसभा में विधेयक पेश

वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर के लिए ट्रस्ट गठन को लेकर बनाए विधेयक को बुधवार को यूपी विधानसभा में पेश कर दिया गया। ऐसे में कुछ दिन पहले लाए गए अध्यादेश को मंजूरी मिल गई है। विधेयक को विधानसभा से पास कराने के बाद विधानपरिषद में भेजा जाएगा। 

Wed, 13 Aug 2025 05:25 PMYogesh Yadav लखनऊ वार्ता
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दान, चढ़ावा, संपत्ति, प्रशासन सबकुछ संभालेगा बांके बिहारी न्यास, यूपी विधानसभा में विधेयक पेश

उत्तर प्रदेश सरकार ने विधानसभा के मॉनसून सत्र के तीसरे दिन बुधवार को बांके बिहारी मंदिर न्यास विधेयक को सदन में पेश कर दिया। विधेयक में यह साफ है कि मंदिर के चढ़ावे, दान और सभी चल-अचल संपत्तियों पर न्यास का अधिकार होगा। चार दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार के 'श्री बांके बिहारी जी मंदिर न्यास अध्यादेश' पर अंतरिम रोक लगाते हुए अस्थायी रूप से इसे निलंबित करने का आदेश दिया था। इस अध्यादेश के जरिए एक न्यास बनाकर मंदिर की पूरी व्यवस्था उनके हवाले करने की बात कही गई है। इस न्यास में ज्यादातर सरकारी अधिकारियों को बड़ी जिम्मेदारी दी गई है। ऐसे में विपक्षी दल अध्यादेश के जरिए बांके बिहारी मंदिर पर सरकारी कब्जे का आरोप लगा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट में भी इसी तरह के आरोप लगाते हुए याचिका दायर की गई है।

विधेयक में लिखा है कि मंदिर में स्थापित मूर्तियां, मंदिर परिसर और प्रसीमा के भीतर देवताओं के लिए दी गई भेंट/उपहार, किसी भी पूजा-सेवा-कर्मकांड-समारोह-धार्मिक अनुष्ठान के समर्थन में दी गई संपत्ति, नकद या वस्तु रूपी अर्पण, तथा मंदिर परिसर के उपयोग के लिए डाक/तार से भेजे गए बैंक ड्राफ्ट और चेक तक शामिल हैं। मंदिर की संपत्तियों में आभूषण, अनुदान, योगदान, हुंडी संग्रह सहित श्री बांके बिहारी जी मंदिर की सभी चल एवं अचल संपत्तियां सम्मिलित मानी जाएंगी।

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सरकार ने कहा है कि न्यास का गठन स्वामी हरिदास की परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए किया गया है। स्वामी हरिदास के समय से चली आ रही रीति-रिवाज, त्योहार, समारोह और अनुष्ठान बिना किसी हस्तक्षेप या परिवर्तन के जारी रहेंगे। न्यास दर्शन का समय तय करेगा, पुजारियों की नियुक्ति करेगा और वेतन, भत्ते/प्रतिकर निर्धारित करेगा। इसके साथ ही भक्तों और आगंतुकों की सुरक्षा और मंदिर के प्रभावी प्रशासन और प्रबंधन की जिम्मेदारी भी न्यास पर होगी।

न्यास गठन के बाद श्रद्धालुओं को विश्वस्तरीय सुख-सुविधाएं उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। प्रसाद वितरण, वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगों के लिए अलग दर्शन मार्ग, पेयजल, विश्राम हेतु बेंच, पहुंच एवं कतार प्रबंधन कियोस्क, गौशालाएं, अन्नक्षेत्र, रसोईघर, होटल, सराय, प्रदर्शनी कक्ष, भोजनालय और प्रतीक्षालय जैसी व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी।

ऐसा होगा न्यास

न्यास में 11 मनोनीत और सात पदेन सदस्य होंगे। मनोनीत सदस्यों में वैष्णव परंपराओं/संप्रदायों/पीठों से तीन प्रतष्ठिति सदस्य (जिनमें साधु-संत, मुनि, गुरु, वद्विान, मठाधीश, महंत, आचार्य, स्वामी सम्मिलित हो सकते हैं)। सनातन धर्म की परंपराओं/संप्रदायों/पीठों से तीन सदस्य (उसी श्रेणी के प्रतष्ठिति व्यक्तत्वि),सनातन धर्म की किसी भी शाखा/संप्रदाय से तीन सदस्य (प्रतष्ठिति व्यक्ति/शक्षिाविद/वद्धिान/उद्यमी/वृत्तिक/समाजसेवी),गोस्वामी परंपरा से दो सदस्य, स्वामी हरिदास जी के वंशज, एक राज-भोग सेवादारों और दूसरा शयन-भोग सेवादारों का प्रतिनिधि होंगे।सभी मनोनीत सदस्य सनातनी हिंदू होंगे जिनका कार्यकाल तीन वर्ष का होगा।

पदेन सदस्य में मथुरा के जिला मजिस्ट्रेट, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, नगर निगम आयुक्त, उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ क्षेत्र विकास परिषद के सीईओ, बांके बिहारी मंदिर ट्रस्ट के सीईओ और राज्य सरकार का नामित प्रतिनिधि शामिल होंगे। यदि कोई पदेन सदस्य सनातन धर्म को नहीं मानने वाला/गैर-हिंदू हुआ तो उसकी जगह उससे कनिष्ठ अधिकारी को नामित किया जाएगा।

न्यास की बैठक हर तीन महीने में अनिवार्य होगी। आयोजन से 15 दिन पहले नोटिस देना होगा। बोर्ड/सदस्य सद्भावना-पूर्वक किए गए कार्यों के लिए उत्तरदायी नहीं ठहराए जाएंगे। न्यास को 20 लाख रुपये तक की चल/अचल संपत्ति स्वयं खरीदने का अधिकार होगा। इससे अधिक के लिए सरकार की स्वीकृति आवश्यक होगी। मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) एडीएम स्तर के अधिकारी होंगे।

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