बांके बिहारी मंदिर में दर्शन से लेकर सजावट तक बड़े बदलाव, अब 'जगमोहन' में आएंगे ठाकुर जी
वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में दर्शन से सजावट तक कई बदलाव करने की तैयारी है। हाईपावर्ड कमेटी ने ठाकुर जी को 'जगमोहन' में लाने और 25 फरवरी से लाइव दर्शन शुरू करने का फैसला लिया है।

विश्व प्रसिद्ध ठाकुर श्री बांके बिहारी मंदिर में आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए एक बड़ी और सुखद खबर सामने आ रही है। मंदिर की व्यवस्थाओं को और अधिक सुलभ, पारदर्शी और दिव्य बनाने के लिए 'हाईपावर्ड मैनेजमेंट कमेटी' ने कई क्रांतिकारी फैसलों पर मुहर लगा दी है। अब भक्त अपने आराध्य के और भी करीब से दर्शन कर सकेंगे। मैनेजमेंट कमेटी की 12वीं बैठक में न केवल दर्शन के स्वरूप को बदलने पर मंथन हुआ, बल्कि मंदिर की सजावट से लेकर ठाकुर जी के विग्रह की स्थिति तक को लेकर ऐसे निर्णय लिए गए हैं, जिनसे वृंदावन आने वाले श्रद्धालुओं का अनुभव पूरी तरह बदल जाएगा।
'जगमोहन' में दर्शन: श्रद्धालुओं के लिए बढ़ेगी सुगमता
अभी तक ठाकुर बांके बिहारी जी के दर्शन गर्भगृह से होते हैं, लेकिन अब कमेटी उन्हें 'जगमोहन' (गर्भगृह के बाहर का हिस्सा) में विराजमान करने पर विचार कर रही है। दरअसल, बांके बिहारी जी का विग्रह 'चल विग्रह' माना जाता है। यदि ठाकुर जी जगमोहन में विराजमान होते हैं, तो दर्शन का दायरा बढ़ जाएगा और दूर खड़े भक्त भी बिना किसी धक्का-मुक्की के आसानी से निहार सकेंगे। कमेटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) अशोक कुमार ने बताया कि इससे मंदिर का कुप्रबंधन समाप्त होगा और शरद पूर्णिमा जैसा दिव्य अनुभव भक्तों को आम दिनों में भी मिल सकेगा।
25 फरवरी से लाइव स्ट्रीमिंग और प्राकृतिक सजावट
मंदिर प्रबंधन ने आधुनिक तकनीक और परंपरा का अद्भुत संगम पेश करने का फैसला किया है। आगामी 25 फरवरी से बांके बिहारी जी के दर्शनों की 'लाइव स्ट्रीमिंग' शुरू होने की प्रबल संभावना है, जिससे दुनिया के किसी भी कोने में बैठा भक्त घर बैठे दर्शन कर सकेगा। इसके साथ ही, मंदिर की सजावट में अब प्लास्टिक के गुब्बारे या अप्राकृतिक वस्तुओं का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। बुधवार से केवल प्राकृतिक फूलों और वस्तुओं से ही मंदिर महकेगा। यही नहीं, ठाकुर जी पर चढ़ने वाली मालाओं को अब फेंका नहीं जाएगा, बल्कि उनसे विधवा महिलाओं द्वारा धूपबत्ती और अगरबत्ती तैयार कराई जाएगी, ताकि बिहारी जी की महक भक्तों के घरों तक पहुंचे।
समय परिवर्तन पर सख्त रुख: सुप्रीम कोर्ट की अवमानना!
बैठक में दर्शन के समय परिवर्तन को लेकर कड़ा रुख अपनाया गया। कमेटी ने स्पष्ट किया कि ढाई महीने पहले गोस्वामियों की सहमति से जो नया समय निर्धारित किया गया था, उसे लागू न करना सीधे तौर पर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना (Contempt) की श्रेणी में आता है। कमेटी ने चेतावनी दी है कि यदि नए समय का पालन नहीं किया गया, तो सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे। इसके अलावा, फाल्गुन होली उत्सव के दौरान ठाकुर जी को जगमोहन में विराजमान करने और 3 मार्च 2026 को होने वाले चंद्र ग्रहण के मद्देनजर नई समय सारिणी पर भी प्रस्ताव पारित किए गए हैं।
सुरक्षा और पारदर्शिता पर जोर
मंदिर की सुरक्षा को चाक-चौबंद करने के लिए सभी सेवायतों और उनके सहयोगियों का चरित्र सत्यापन (Character Verification) अनिवार्य कर दिया गया है। मंदिर की बहुमूल्य वस्तुओं को बैंक लॉकर में सुरक्षित रखने और सफाई व्यवस्था में लापरवाही बरतने वाली संस्था को हटाने जैसे कड़े फैसले भी लिए गए हैं। कमेटी की अगली बैठक 12 मार्च को होगी, जिसमें इन बदलावों की समीक्षा की जाएगी।
बैठक में थे ये प्रस्ताव
ठाकुर श्री बांके बिहारी जी मन्दिर प्रांगण की सफाई व्यवस्था करने वाली संस्था पीएलएन-9 सिक्योरिटी सर्विस द्वारा जीएसटी जमा न करने के कारण संस्था को कार्य से हटाने, फाल्गुन होली उत्सव पर ठाकुर श्री बांके बिहारी जी को जगमोहन में विराजमान करने, मन्दिर की ओर से पूर्व की भांति व्रतोत्सव निर्णय पत्र छपवाने, मन्दिर में फाल्गुन होली उत्सव के दौरान पुष्प सजावट कराने, चन्द्र ग्रहण 3 मार्च 2026 को होने के कारण ठाकुर श्रीबांके बिहारीजी मन्दिर की परिवर्तित समय सारिणी, मन्दिर के सभी सेवायतों के साथ सम्बद्ध नौकरों/सहयोगियों का चरित्र सत्यापन, दान की गयी धनराशि पर आयकर छूट, मन्दिर में उपलब्ध अनुपयोगी वस्तुओं का मूल्यांकन कराने के उपरान्त नीलामी, मन्दिर कार्यालय के अभिलेखों का एकाउण्ट सुचारू रूप से व्यवस्थित एवं सुरक्षित रखने, मन्दिर की बहुमूल्य वस्तुओं को पंजाब नेशनल बैंक द्वारा उपलब्ध कराये गये लॉकर में रखने के अलावा बैंक खातों से संचालन, भोग प्रसाद के लिए प्रतिदिन व्यय 22 हजार 300 से अधिक करने, मन्दिर चबूतरे पर भेंट एवं किनका रसीद काउन्टर स्थापित करने के प्रस्ताव थे।
इसे कहते हैं जगमोहन
बांकेबिहारी की प्राण प्रतिष्ठा गर्भगृह में है। उसके बाहर का वो हिस्सा, जिसमें सेवायत आदि चढ़ावा लेते और चढ़ाते हैं, जगमोहन कहलाता है। साल में कई अवसरों पर ठाकुर बांकेबिहारी की प्रतिमा को वहां लाकर दर्शन कराए जाते हैं। इसे ठाकुर जी का चल विग्रह (मूवेबल आइडल) माना जाता है, इसलिए जगमोहन से दर्शन कराने पर विचार हुआ, जिससे सभी को आसानी से दर्शन सुलभ हो सकें।




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