साहब! तीन साल से नहीं बन पा राशन कार्ड; दिव्यांग की बात सुनकर ADM ने अधिकारियों को लगाई फटकार
बांदा में एक दिव्यांग डीएम ऑफिस पहुंचा। जहां युवक कलेक्ट्रेट में एडीएम को बताया कि साहब तीन साल से उसका राशन कार्ड नहीं बन पा रहा है। जिसे सुनकर एडीएम का पारा हाई हो गया। उन्होंने डीएसओ को फटकार लगाई, कहा कि इसका जल्द से जल्द प्रक्रिया पूरी कर कार्ड जारी किया जाए।

UP News: यूपी के बांदा में सिस्टम की मार से तंग आकर एक दिव्यांग डीएम ऑफिस पहुंचा। दोनों पैरों से शत प्रतिशत दिव्यांग युवक कलेक्ट्रेट में एडीएम को बताया कि साहब तीन साल से उसका राशन कार्ड नहीं बन पा रहा है। जिसे सुनकर एडीएम का पारा हाई हो गया। उन्होंने डीएसओ को फटकार लगाई, कहा कि इसका जल्द से जल्द प्रक्रिया पूरी कर कार्ड जारी किया जाए। अब तक कार्ड न बन पाने पर जांच कराए।
ये मामला नरैनी तहसील के बरुआ स्योढ़ा गांव का है। यहां रहने वाले बच्चा सिंह जो पैरों से पूरी तरह दिव्यांग हैं, उनका शत प्रतिशत हैंडीकैप सर्टिफिकेट भी मेडिकल डिपार्टमेंट ने जारी किया है। बच्चा के मुताबिक वो पिछले 3 सालों से राशन कार्ड के लिए दर दर भटक रहा है, तहसील गया, ब्लॉक गया लेकिन उसकी कोई सुनवाई नही हुई, अफसर कहते रहे कि जब किसी की यूनिट कटेगी तब उसका राशन कार्ड लिस्ट से हटाकर तुम्हारा बनाया जाएगा।
शुक्रवार को डीएम के आते ही डीएम ऑफिस पहुंच गया, शिकायत करके गरीबी रेखा से नीचे यानी लाल राशन बनवाने की मांग की। डीएसओ क्यामुद्दीन ने बताया कि बच्चा का राशन कार्ड परिवार के साथ जुड़ा था, जो पात्र गृहस्थी का बना हुआ था, इन्होंने उससे अलग करने का प्रार्थना पत्र दिया, तो विभाग द्वारा 2025 में इनका नाम उससे हटा दिया, इसके बाद इन्होंने नया राशन कार्ड बनाने का आवेदन किया है, जिसकी जांच करके आगे की कार्रवाई शुरू कराई जा चुकी है।
दो साल बाद परिवार को मिला मूक-बधिर बालक
उधर, लखनऊ में करीब दो वर्षों से लापता मूक-बधिर बालक को राजकीय बालगृह (बालक) के प्रयासों से उसके परिवार से मिलवाया गया। एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई। शुक्रवार को जब बालक को पश्चिम बंगाल से आए परिजनों को सौंपा गया तो उन्होंने भावुक होकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार का आभार जताया।
बाल कल्याण समिति, मेरठ के आदेश पर 12 सितंबर 2025 को करीब 13 वर्षीय मूक-बधिर बालक रमजान को राजकीय बालगृह, मोहान रोड में प्रवेश दिलाया गया था। बालक बोल-सुन नहीं सकता था इसलिए अपना नाम, पता या परिवार की जानकारी देने में असमर्थ था। चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद बालगृह प्रशासन ने उसकी पहचान जानने के प्रयास जारी रखे। देखभाल के साथ-साथ तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर पहचान के लिए काम किया गया।
बालक का आधार कार्ड बनवाने की प्रक्रिया के दौरान स्कैन मशीन पर उंगलियों के निशान देने से पूर्व में बने आधार का विवरण सामने आ गया। इससे बालक का पता पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के ग्राम गंगासार का मिला। बालगृह प्रशासन ने तुरंत संबंधित क्षेत्र में संपर्क कर परिवार तक सूचना पहुंचायी।




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