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तेज धूप ने अप्रैल में कराया जून का एहसास

Balia News - बलिया, संवाददाता। अप्रैल (वैशाख) महीने की तेज धूप जून जैसी तपन का एहसास

Sun, 19 April 2026 10:54 PMNewswrap हिन्दुस्तान, बलिया
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तेज धूप ने अप्रैल में कराया जून का एहसास

बलिया, संवाददाता। अप्रैल (वैशाख) महीने की तेज धूप जून जैसी तपन का एहसास कराने लगी है। धूप और लू के कारण दोपहर में लोग घरों में दुबके रहे, आलम यह रहा कि सहालग के सीजन में भी शहर के हृदय स्थली चौक बाजार की दुकानें और सड़कें सुनी पड़ गई। इक्का-दुक्का जरूरी काम से आने-जाने वाले लोग गमछा और छाता लेकर आते-जाते नजर आए। इन सबके बीच ऐसे किसान जिनके रबी फसलों की मड़ाई अब तक नहीं हुई है, वह बेहद खुश हैं चूकि तेज धूप में गेहूं की मड़ाई बेहतर तरीके से होती है। शाम पांच बजे के बाद बाजारों में रौनक बढ़ने लगी जो देर शाम तक रहा।

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रविवार को अधिकतम तापमान 41 व न्यूनतम 26 डिग्री रिकार्ड किया गया। मौसम विभाग ने इस साल भयंकर गर्मी पड़ने की संभावना व्यक्त किया है।अंग्रेजी का अप्रैल व हिंदी का वैशाख महीना शुरुआती गर्मी का दिन होता है। इस बार शुरुआत में पारा 40 के पार पहुंच गया तथा लू और चिलचिलाती धूप ने आमजन के साथ ही पशु पक्षियों सभी बेहाल हो गए है। पर्यावरणविद का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ की कमी से इस बार गर्मी समय से पहले और ज्यादा तेज हो गई है। लोग तापमान के बढ़े तेवर देख जेठ महीने में पड़ने वाली भीषण गर्मी को लेकर चिंतित नजर आ रहे हैं। समय से पहले पड़ रही गर्मी का असर जायद की फसलों खासकर सब्जी पर पड़ता दिख रहा है। एक तो विपरीत मौसम के कारण जेठुआ सब्जी की बुआई विलम्ब से हुई, उसमें भी समय से पहले बढ़ते तापमान के कारण किसानों को अधिक सिंचाई करनी पड़ रही है तथा उत्पादन भी कम हो गया है। बघौली निवासी किसान ब्रहमानंद तिवारी ने बताया कि लगन का सीजन है, इस समय काफी मात्रा में सब्जी की मांग रहती है, जिससे किसानों को अच्छी आमदनी होती है। दो बीघे में लौकी की बुआई कराए हैं, लेकिन उत्पादन उम्मीद से कम हो रहा है। सिंचाई भी हर दूसरे दिन करनी पड़ रही है। इसी तरह अमडरिया निवासी धीरेन्द्र राय ने बताया कि वह गन्ना के खेत और तालाब के आस-पास सब्जी की खेती किए हैं। यह तो सोलर पम्प है कि सिंचाई में खर्च कम पड़ रहा है। तापमान पहले बढ़ने से सब्जी की फसलों की बढ़वार उम्मीद के अनुसार नहीं हो सकी है और उत्पादन भी कम हो रहा है। लगन में लौकी, करैला, सफेद बैगन की मांग अधिक रहती है। लेकिन मांग के सापेक्ष उत्पादन नहीं हो रहा है।

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