साध्वी रेप केस में बाबा सच्चिदानंद समेत सभी 6 आरोपी बरी, 8 साल पहले सुर्खियों में आया था कांड
आठ साल पहले 2017 में एक शिष्या ने बाबा सच्चिदानंद उनके एक शिष्य और चार शिष्याओं पर सनसनीखेज आरोप लगाते हुए बस्ती कोतवाली में केस दर्ज कराया था। अदालत ने अब इस मामले में मुख्य आरोपी बाबा सच्चिदानंद, शिष्य परम चेतनानंद और उनकी शिष्याओं को दोष मुक्त करार दिया है।

यूपी के बस्ती में अपर सत्र न्यायाधीश विजय कुमार कटियार की अदालत ने बहुचर्चित संत कुटीर आश्रम, अमहट दुष्कर्म कांड के मुख्य आरोपी बाबा सच्चिदानंद, शिष्य परम चेतनानंद और उनकी शिष्याओं को दोष मुक्त करार दिया है। बाबा पर उनकी ही एक शिष्या ने दुष्कर्म का आरोप लगाते हुए कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया था। उसने बाबा के एक शिष्य और चार शिष्याओं को भी आरोपित किया था। न्यायालय ने कहा है कि अभियोजन पक्ष आरोपित अपराधों को साबित करने में विफल रहा। अभियुक्तगण संदेह का लाभ पाने के अधिकारी और दोषमुक्त किए जाने योग्य हैं।
अमहट स्थित संत कुटीर आश्रम के महंत सच्चिदानंद उर्फ दयानंद उर्फ भगतानंद उर्फ प्रशांत कुमार उर्फ संतकुमार, शिष्य परम चेतनानंद, शिष्या प्रमिला बाई उर्फ पोरुल गोयल, कमला बाई उर्फ प्रियंका श्रीवास्तव, उर्मिला बाई और ध्यान बाई के विरुद्ध कोतवाली पुलिस ने न्यायालय में आरोप-पत्र प्रेषित किया। अभियोजन के अनुसार छत्तीसगढ़ के जाजागीर चापा जिले के हरदौसा थाना क्षेत्र निवासिनी पीड़िता ने पुलिस को तहरीर दी थी।
उसने कहा था कि उसे उसके घर से वर्ष 2009 में स्वामी सच्चिदानंद संत कुटीर आश्रम अमहट घाट लेकर आए और पूजा पाठ, धर्म प्रचार के लिए उन्होंने साध्वी के रूप में रखा। आने के चार महीने बाद सच्चिदानंद ने उसके साथ बस्ती आश्रम में दुष्कर्म किया।
उसने आरोप लगाया कि सचिदानन्द के शिष्य परम चेतनानंद, प्रमिलाबाई, कमलाबाई, उर्मिलाबाई और ध्यानबाई जबरन उसे पकड़ कर बाबा के कमरे में बंद करते थे। सभी मिलकर उसे धमकी देते थे। स्वामी ने अपने आश्रमों नवादा बिहार, मुंबई, बृजघाट आश्रम जिला अमरोहा, दिल्ली में उसके साथ उसकी इच्छा के विरूद्ध दुष्कर्म किए और बंधक बनाए रखा। डरते-छिपते हुए वह शिकायत के लिए आई है। उसकी जान को खतरा है।
बाबा के आदमी उसे तलाश रहे हैं। उसकी कभी भी हत्या करवाई जा सकती है। इस मामले में एसपी के निर्देश पर पुलिस ने वर्ष 2017 में विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। अभियोजन और बचाव पक्ष को सुनने तथा अभिलेखों में उपलब्ध साक्ष्यों के अवलोकन के बाद न्यायालय ने सभी को दोषमुक्त करार दिया।




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