अतीक सुपर गैंगस्टर था, धुरंधर-2 में माफिया के किरदार पर क्या बोले प्रयागराज के पूर्व आईजी सूर्य कुमार
पूर्व आईजी सूर्य कुमार ने अतीक अहमद को 'सुपर गैंगस्टर' बताते हुए उसके ISI और जाली नोटों के कारोबार से जुड़े होने का खुलासा किया है। फिल्म 'धुरंधर-2' के बीच उन्होंने बताया कि कैसे अतीक, मुख्तार और शहाबुद्दीन का गठजोड़ देश के खिलाफ काम कर रहा था और वर्तमान सरकार की सख्ती ने इस साम्राज्य को खत्म किया।

उत्तर प्रदेश के चर्चित माफिया अतीक अहमद के अंत पर आधारित फिल्म 'धुरंधर-2' इन दिनों चर्चा का केंद्र बनी हुई है। इस बीच, प्रयागराज के पूर्व आईजी सूर्य कुमार ने अतीक अहमद के शुरुआती दिनों से लेकर उसके खूंखार साम्राज्य के अंत तक की ऐसी परतें खोली हैं, जो किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से भी ज्यादा खौफनाक हैं। उन्होंने अतीक को एक 'सुपर गैंगस्टर' करार देते हुए उसके अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन का खुलासा किया है।
1986 का वो दंगा और अतीक का उदय
पूर्व आईजी सूर्य कुमार ने बताया, "1986 में जब मेरी तैनाती इलाहाबाद (अब प्रयागराज) में थी, तब वहां एक भीषण दंगा हुआ था। जांच में सामने आया कि उस दंगे की शुरुआत करने वाला कोई और नहीं, बल्कि अतीक अहमद ही था। जब पुलिस ने सख्ती दिखाई और उसके घर पर छापेमारी की, तो वह डरकर बंबई (मुंबई) भाग गया था।" उन्होंने बताया कि यहीं से अतीक के एक साधारण अपराधी से 'माफिया डॉन' बनने का सफर शुरू हुआ।
ISI कनेक्शन और जाली नोटों का काला कारोबार
सबसे चौंकाने वाला खुलासा करते हुए पूर्व आईजी ने बताया कि अतीक का नेटवर्क केवल जमीनों तक सीमित नहीं था। उन्होंने कहा, "पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI का एक ग्रुप काठमांडू स्थित दूतावास के जरिए भारत में जाली नोट (नकली करेंसी) भेजता था। सीवान का शहाबुद्दीन, मऊ का मुख्तार अंसारी और इलाहाबाद का अतीक अहमद—इन तीनों का एक बेहद करीबी और मजबूत गठजोड़ था। ये मिलकर जाली नोटों का धंधा करते थे और उसी पैसे से अपने गिरोह का विस्तार और अवैध जमीनें खरीदने का काम करते थे।"
राजनीतिक संरक्षण और 'राजू पाल' की हत्या
सूर्य कुमार के अनुसार, जब पुलिस का दबाव बढ़ता था, तो अतीक राजनीति की शरण में चला जाता था। उसे पहले समाजवादी पार्टी और फिर अपना दल से टिकट मिला। उन्होंने बताया, "अतीक इतना निरंकुश हो गया था कि वह चुनाव में कोई विरोध नहीं चाहता था। इसी सनक में उसने राजू पाल की हत्या करवाई। बाद में, उस केस के मुख्य गवाह उमेश पाल को भी उसके गुंडों ने सरेआम मौत के घाट उतार दिया।"
कैसे ढहा माफिया का साम्राज्य?
फिल्म 'धुरंधर-2' में दिखाए गए पतन के दृश्यों पर चर्चा करते हुए पूर्व आईजी ने कहा कि जब प्रशासन को सरकार का मजबूत समर्थन मिला, तब जाकर इस गिरोह की कमर टूटी। उन्होंने कहा, "जब सख्त सरकार आई और अधिकारियों को खुली छूट मिली, तो अतीक का गिरोह बिखर गया। उसकी संपत्तियां जब्त कर ली गईं। जिन लोगों को वह डराकर रखता था, वही उसके खिलाफ खड़े होने लगे। अंततः गैंगस्टर गतिविधियों का अंत वैसा ही हुआ जैसा होना चाहिए था।"




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