यूपी पुलिस के CPU से परिचित हैं आप? इस जोन के हर थाने में होने जा रहा गठन; डिटेल में जानें
नई व्यवस्था के तहत पुलिस केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित न रहकर सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभाएगी। हर थाने पर एक निरीक्षक या उपनिरीक्षक स्तर के अधिकारी को CPU का प्रभारी बनाया जाएगा। उसके साथ कम से कम दो पुरुष और दो महिला पुलिसकर्मी तैनात रहेंगे।

UP Police News : आप यूपी पुलिस के सीपीयू से परिचित हैं? सीपीयू यानी कम्युनिटी पुलिसिंग यूनिट (Community Policing Unit)। जानते हैं यह यूनिट काम क्या करती है? आइए हम आपको बताते हैं। यह यूनिट पुलिस और आम जनता के बीच संवाद बढ़ाने तथा विश्वास मजबूत करने का काम करती है। अब गोरखपुर जोन के सभी थानों पर कम्युनिटी पुलिसिंग यूनिट (सीपीयू) का गठन होने जा रहा है। पुलिस महानिदेशक (डीजी) गोरखपुर जोन मुथा अशोक जैन ने इस संबंध में विस्तृत एसओपी जारी करते हुए सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिए हैं।
नई व्यवस्था के तहत पुलिस केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित न रहकर सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभाएगी। एसओपी के अनुसार प्रत्येक थाने पर एक निरीक्षक या उपनिरीक्षक स्तर के अधिकारी को सीपीयू का प्रभारी बनाया जाएगा। उसके साथ कम से कम दो पुरुष और दो महिला पुलिसकर्मी तैनात रहेंगे। यह यूनिट सप्ताह में कम से कम तीन दिन सोमवार, बुधवार और शनिवार को क्षेत्र में सामुदायिक गतिविधियां संचालित करेगी। सभी कार्यों का विवरण थाना स्तर पर निर्धारित रजिस्टर में दर्ज किया जाएगा।
बुजुर्गों-बच्चों और बेसहारा लोगों का लेखाजोखा रखेगी सीपीयू
सीपीयू थाना क्षेत्र में रहने वाले 70 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों तथा गंभीर दिव्यांगों की सूची तैयार करेगी और उनसे नियमित संपर्क बनाए रखेगी। उन्हें यूनिट प्रभारी का मोबाइल नंबर उपलब्ध कराया जाएगा ताकि आवश्यकता पड़ने पर वे सीधे पुलिस से संपर्क कर सकें। इसके अलावा रेलवे स्टेशन, बस अड्डों और सार्वजनिक स्थलों पर मिलने वाले बेसहारा बच्चों, महिलाओं और अन्य जरूरतमंद लोगों की सहायता भी यूनिट की जिम्मेदारी होगी। पुलिसकर्मी अनाथालय, वृद्धाश्रम, महिला एवं बाल कल्याण संस्थाओं का भ्रमण कर वहां रहने वाले लोगों की समस्याओं को सुनेंगे और संबंधित विभागों के सहयोग से उनके समाधान का प्रयास करेंगे। भटके हुए बच्चों को उनके परिवारों तक पहुंचाने तथा बेसहारा व्यक्तियों के पुनर्वास के लिए भी पहल की जाएगी।
भीड़भाड़ वाले कार्यक्रमों में रहेगी मौजूदगी
मेलों, धार्मिक आयोजनों और भीड़भाड़ वाले कार्यक्रमों में सीपीयू की सक्रिय भागीदारी का भी प्रावधान किया गया है। जरूरत पड़ने पर खोया-पाया और सहायता केंद्र संचालित किए जाएंगे। इसके साथ ही साइबर अपराध, नशा मुक्ति और सामाजिक जागरूकता से जुड़े अभियान भी चलाए जाएंगे। स्कूलों के आसपास बच्चों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं। स्कूल खुलने और बंद होने के समय पुलिसकर्मी मौजूद रहकर बच्चों को सुरक्षित सड़क पार कराने में मदद करेंगे। क्षमता से अधिक बच्चों को ढोने वाले या अनफिट स्कूली वाहनों की सूचना थाना प्रभारी को दी जाएगी। छात्राओं के लिए आत्मरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कराने तथा बच्चों को थाना, तहसील और अन्य सार्वजनिक संस्थानों का भ्रमण कराने की भी व्यवस्था की जाएगी।
जनकल्याणकारी योजनाओं में सहयोग भी करेगी
थाना क्षेत्र में कार्यरत स्वच्छ छवि वाले गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) तथा विभिन्न विभागों द्वारा संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं में भी सीपीयू सहयोग करेगी। आम लोगों को चोरी, राहजनी और साइबर ठगी से बचाव के उपायों के प्रति जागरूक किया जाएगा। मिशन शक्ति अभियान, बहू-बेटी सम्मेलन, स्वच्छता अभियान और श्रमदान जैसे कार्यक्रमों में भी यूनिट सक्रिय भूमिका निभाएगी। डीजी ने स्पष्ट किया है कि कम्युनिटी पुलिसिंग यूनिट का उद्देश्य प्रवर्तन कार्रवाई करना नहीं है। यह यूनिट पुलिस और जनता के बीच संवाद, सहयोग और विश्वास बढ़ाने के लिए काम करेगी। किसी भी महत्वपूर्ण सूचना को संबंधित थाना प्रभारी तक पहुंचाया जाएगा, जबकि कानून संबंधी कार्रवाई सामान्य पुलिस व्यवस्था के तहत ही होगी। एसओपी के तहत प्रत्येक जिले में अपर पुलिस अधीक्षक को कम्युनिटी पुलिसिंग का नोडल अधिकारी नामित किया गया है। पुलिस अधीक्षक सभी सीपीयू प्रभारियों की नियमित बैठक कर कार्यों की समीक्षा करेंगे तथा प्रत्येक माह की रिपोर्ट जोन मुख्यालय को भेजी जाएगी।




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