कानपुर किडनी-लिवर कांड: 8वीं पास एंबुलेंस ड्राइवर निकला सूत्रधार, डॉक्टर बनकर करता था अंगों का सौदा
कानपुर में किडनी-लिवर रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है। इस मामले में पुलिस कमिश्नर ने बताया कि जानकारी मिली थी कि गैरकानूनी ढंग से किडनी का ट्रांसप्लांट हुआ है। तब सटीक सूचना न होने से छापेमारी नहीं हो सकी। तभी से टीम इस रैकेट की तलाश में लगी थी। इस कारोबार का सूत्रधार 8वीं पास एंबुलेंस ड्राइवर निकला।

यूपी के कानपुर में किडनी-लिवर रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है। इस मामले में पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने मंगलवार को बताया कि पुलिस को तीन मार्च को ही जानकारी मिली थी कि शहर में कहीं गैरकानूनी ढंग से किडनी का ट्रांसप्लांट हुआ है। तब सटीक सूचना न होने से छापेमारी नहीं हो सकी। तभी से टीम इस रैकेट की तलाश में लगी थी। वहीं, इस अवैध कारोबार का सूत्रधार आठवीं पास एंबुलेंस ड्राइवर है।
जानकारी के मुताबिक रविवार की रात किडनी ट्रांसप्लांट होने की सूचना सोमवार की दोपहर रावतपुर थानाध्यक्ष कमलेश राय को लगी। पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल के निर्देश पर आनन-फानन डीसीपी पश्चिम जोन की क्राइम ब्रांच, रावतपुर पुलिस और सीएमओ की एक टीम बनी। पुलिस आयुक्त ने बताया कि किडनी के अवैध कारोबार का सूत्रधार शिवम अग्रवाल है। शिवम आठवीं पास एंबुलेंस ड्राइवर है। लोगों को झांसे में लेने के लिए वह एप्रेन और गले में स्टेथोस्कोप लटकाकर घूमता था। उसे हिरासत में लेने के बाद खुलासा हुआ।
ऐसे बांटी गई सभी को रकम
पुलिस कमिश्नर ने बताया कि रविवार को ट्रांसप्लांट के लिए डॉ. रोहित सात डॉक्टरों की टीम लेकर आया था। ट्रांसप्लांट होने के बाद शिवम को सात लाख रुपए दिए, जिसमें से 3.50 लाख उसने आयुष के खाते में डाले। 2.75 लाख आहूजा हॉस्पिटल को दिए, 25 हजार मेडलाइफ हॉस्पिटल को ट्रीटमेंट के लिए दिए और 50 हजार रुपए उसने अपने पास रखे थे। ऑपरेशन के बाद आयुष को मेडलाइफ और पारुल को प्रिया अस्पताल में रखा गया था।
डॉ.रोहित की तलाश, लखनऊ या नोएडा का हो सकता है
किडनी ट्रांसप्लांट करने के लिए बाहर से डॉक्टर की टीम कुछ उपकरणों और दवाइयों के साथ आहूजा अस्पताल आई थी जो ट्रांसप्लांट के फौरन बाद ही चली गई। टीम के विशेषज्ञ का नाम डॉ. रोहित बताया जा रहा है, जिसके बारे में अनुमान है कि वह लखनऊ या नोएडा का हो सकता है। उसकी गिरफ्तारी पर कई और भेद खुल सकते हैं। किडनी कारोबार में शहर के कई और नामी अस्पतालों के नाम सामने आए हैं, जिनसे पूछताछ की जा रही है। कानपुर के इस किडनी कांड के तार लखनऊ और नोएडा के डॉक्टरों व कुछ बड़े अस्पतालों से भी जुड़ रहे हैं।
लाइसेंस न होने पर भी डॉक्टर दंपति कराते रहे ट्रांसप्लांट
आहूजा अस्पताल के पास यूरोलॉजी का अधिकृत लाइसेंस नहीं है। इसके साथ ही किडनी ट्रांसप्लांट जैसी क्षमता भी नहीं है। बावजूद इसके डाक्टर दंपति किडनी ट्रांसप्लांट जैसा बड़ा ऑपरेशन धड़ल्ले से कराते रहे। सीएमओ हरिदत्त नेमी ने बताया कि इस पूरे प्रकरण की जांच की जा रही है। इस खेल में शामिल अन्य अस्पतालों पर भी कार्रवाई की जाएगी।




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