Amitabh Thakur released from jail after two months, no one knows where he went अमिताभ ठाकुर जेल से रिहा, अकेले ही बाहर निकले, कहां गए किसी को नहीं पता, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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अमिताभ ठाकुर जेल से रिहा, अकेले ही बाहर निकले, कहां गए किसी को नहीं पता

पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर को दो महीने बाद जेल से रिहाई मिल गई। देर रात अचानक अमिताभ को रिहा कर दिया गया। जेल से अकेले ही बाहर आने के बाद वह कहां चले गए किसी को नहीं पता। 

Thu, 12 Feb 2026 01:50 PMYogesh Yadav लाइव हिन्दुस्तान, देवरिया, निज संवाददाता
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अमिताभ ठाकुर जेल से रिहा, अकेले ही बाहर निकले, कहां गए किसी को नहीं पता

धोखाधड़ी के मामले में देवरिया जेल में बंद पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर दो माह बाद बुधवार की रात देवरिया जेल से रिहा हो गए। वह अकेले ही जेल से बाहर आए और कार में बैठकर कहीं चले गए। अमिताभ ठाकुर कहां गए, किसी को नहीं पता चला है। चलती ट्रेन से अमिताभ ठाकुर को गिरफ्तार किया गया था। पहले वाराणसी के मामले में जमानत मिली फिर 19 जनवरी को देवरिया के धोखाधड़ी मामले में जमानत मंजूर हो गई थी। जमानतदारों के सत्यापन होने के बाद न्यायालय से जेल पहुंचे रिहाई परवाना के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। उनकी रिहाई की भनक न तो देवरिया पुलिस को लगी और न ही 10 दिनों से डेरा डाले लखनऊ पुलिस को लग सकी।

पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर को धोखाधड़ी के मामले में 10 दिसंबर को चलती ट्रेन से गिरफ्तार किया गया था। उसी दिन से वह देवरिया जेल में बंद थे। 19 जनवरी को देवरिया जेल से उन्हें जमानत मिल गई, लेकिन बेल बांड उस समय उनके अधिवक्ता द्वारा नहीं दिया गया। जब वाराणसी में दर्ज मुकदमे में उन्हें जमानत मिली और उनका जमानत परवाना जेल पहुंच गया तो देवरिया जिला जज की अदालत में अधिवक्ता ने बेल बांड जमा किया और उनका सत्यापन पूरा हो गया। देर शाम जेल रिहाई कागजात पहुंचा। जिसके बाद उन्हें रात की रिहाई में रिहा कर दिया गया। जेलर राजकुमार ने बताया कि न्यायालय का अनुपालन करते हुए उन्हें रात को रिहा कर दिया गया।

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देवरिया में लखनऊ पुलिस डाल रखी थी डेरा

पूर्व आईपीएस अधिकारी के विरुद्ध लखनऊ में एक धोखाधड़ी का केस दर्ज है। जब देवरिया जिला जज की अदालत से उनकी जमानत हो गई तो लखनऊ में दर्ज केस में वारंट बी देवरिया न्यायालय से पहुंच गया। 30 जनवरी को लखनऊ की अदालत ने जमानत बी वारंट खारिज कर दिया। इसके बाद लखनऊ की पुलिस देवरिया में डेरा डाल दी। कैदी ले जाने वाला वाहन भी देवरिया पहुंच गया। लखनऊ पुलिस लगातार इस पर नजर बनाए रखी थी कि कब उनकी जेल से रिहाई हो और लखनऊ पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर ले। लेकिन आईपीएस की रिहाई की भनक किसी को नहीं लगी और वह जेल से रिहा होकर चले गए।

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सूत्रों का कहना है कि उन्हें जेल से रिसीव करने कौन गया था? यह कोई नहीं जान पाया। जेल गेट से मुख्य सड़क तक वह अकेले ही पैदल निकले और फिर चले गए। सूत्रों की मानें तो जेल से रिहा होने की भनक लगने के बाद पुलिस सक्रिय तो हुई, लेकिन उनके पास तक नहीं पहुंच पाई।

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