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बिना कारण बताए गिरफ्तारी पर हाई कोर्ट सख्त, यूपी सरकार पर लगाया 10 लाख का जुर्माना

हाई कोर्ट की खंडपीठ ने गिरफ्तार किए गए व्यक्ति की ओर से उसके पुत्र की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर पारित किया है। न्यायालय ने यह भी टिप्पणी की कि अपर मुख्य सचिव गृह अपने शपथ पत्र में यह स्पष्ट करने में असफल रहे कि याची को अवैध हिरासत में रखने के कारण क्यों न हर्जाना लगाया जाए।

Sat, 2 May 2026 12:14 PMAjay Singh विधि संवाददाता, लखनऊ
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बिना कारण बताए गिरफ्तारी पर हाई कोर्ट सख्त, यूपी सरकार पर लगाया 10 लाख का जुर्माना

UP News : बिना कारण बताए एक व्यक्ति की गिरफ़्तारी पर हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने सख्त रुख अपनाया है। शासन पर 10 लाख रुपये का हर्जाना लगाया है। न्यायालय ने हर्जाने की यह रकम चार सप्ताह में याची को देने का आदेश दिया है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया है कि इस रकम को सरकार जिम्मेदार अधिकारियों से वसूल सकती है। न्यायालय ने याची की गिरफ़्तारी को अवैध ठहराते हुए, उसे तत्काल रिहा करने के आदेश दिए हैं।

यह निर्णय न्यायमूर्ति अब्दुल मोईन और न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने गिरफ्तार किए गए व्यक्ति मनोज कुमार की ओर से उसके पुत्र मुदित कुमार की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर पारित किया है। वहीं न्यायालय ने यह भी टिप्पणी की कि अपर मुख्य सचिव गृह अपने शपथ पत्र में यह स्पष्ट करने में असफल रहे कि याची को तीन माह से अवैध हिरासत में रखने के कारण राज्य सरकार पर क्यों न हर्जाना लगाया जाए। न्यायालय ने कटाक्ष करते हुए कहा है कि गृह विभाग के सबसे बड़े अधिकारी का यह हाल है तो समझा जा सकता है कि प्रदेश के अन्य अफसर किस प्रकार काम कर रहे हैं।

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मामले में याची मनोज कुमार को 27 जनवरी 2026 को उन्नाव जिले के आसीवन थाने में दर्ज एक मुकदमे में गिरफ्तार किया गया था। याचिका में का आरोप लगाया गया कि गिरफ्तारी के समय याची को कारणों की जानकारी नहीं दी गई, जो संविधान के अनुच्छेद 21 व 22(1) का उल्लंघन है। न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट के मिहिर राजेश शाह व डॉ. राजिंदर राजन मामलों में दिए गए निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि गिरफ्तारी के कारणों को लिखित रूप में बताना अनिवार्य संवैधानिक दायित्व है।

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न्यायालय ने पाया कि गिरफ्तारी प्रक्रिया में गंभीर खामियां थीं लिहाजा मजिस्ट्रेट द्वारा दिया गया रिमांड आदेश भी अवैध गिरफ्तारी पर आधारित होने के कारण बने रहने योग्य नहीं है। न्यायालय ने कहा कि याची को तीन माह से अधिक समय तक अवैध रूप से जेल में रखा गया, जो व्यक्तिगत स्वतंत्रता का गंभीर उल्लंघन है।

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