अलंकार अग्निहोत्री कल करेंगे बड़ा ऐलान, अविमुक्तेश्वरानंद पर FIR को बताया सनातन पर हमला
पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने कहा कि अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को फंसाने का कार्य किया जा रहा है। उन पर लगे यौन शोषण के आरोप सिर्फ पर हमला नहीं बल्कि पूरे सनातन समाज की छवि को धूमिल करने की साजिश है। इससे यही साबित होता है कि आज देश में अस्थिरता का माहौल है।

नए यूजीसी कानून और शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के साथ माघ मेला में किए गए व्यवहार से आहत होकर बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा देने वाले अलंकार अग्निहोत्री रविवार को वृंदावन पहुंचे। जहां वे गोधूलिपुरम स्थित हरिदास आश्रम पर पत्रकारों से रूबरू हुए। उन्होंने कहा कि सोमवार को अपनी नई राजनीतिक पार्टी की सार्वजनिक घोषणा कर देंगे।
पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने कहा कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को फंसाने का कार्य किया जा रहा है। उन पर लगे यौन शोषण के आरोप सिर्फ पर हमला नहीं बल्कि पूरे सनातन समाज की छवि को धूमिल करने की साजिश है। इससे यही साबित होता है कि आज देश में अस्थिरता का माहौल है। उन्होंने दावा किया की शंकराचार्य के खिलाफ शिकायत करने वालों का खुद कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं और एक व्यक्ति पर 25000 का इनाम भी घोषित है। उन्होंने कहा कि वह मांग करते हैं कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट को स्वत: संज्ञान लेकर मामले के निष्पक्ष जांच करानी चाहिए, ताकि पूरा सच सामने आ सके।
उन्होंने सोमवार को नई पार्टी के नाम के औपचारिक घोषणा करने का ऐलान करते हुए कहा कि हमारी पार्टी के नाम में सनातन संस्कृति का संदेश रहेगा। उसमें भगवान राम और कृष्ण की भूमि का भी समावेश होगा। हमारे देश के अधिकांश लोग सनातन संस्कृति के समर्थक है। उनका प्रतिनिधित्व करने के लिए ही पार्टी की स्थापना एक अच्छे नाम के साथ की गई है। अग्निहोत्री के मुताबिक उनके द्वारा नई पार्टी सनातन संस्कृति, धार्मिक आस्था और सामाजिक समरसता को केंद्र में रखकर बनाई जा रही है। उन्होंने पार्टी के नाम की घोषणा ठाकुर बांके बिहारी के आशीर्वाद से सोमवार को करने की बात कही है।
यूजीसी के कुछ निर्णय विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता को प्रभावित कर रहे
इसके पहले अलंकार अग्निहोत्री ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की नीतियों पर तीखा प्रहार किया था। उन्होंने भाजपा को “सनातन विरोधी” बताते हुए कहा था कि शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर सरकार की नीतियां पारदर्शी और व्यापक संवाद पर आधारित नहीं हैं। उन्होंने नई राजनीतिक पार्टी खड़ी करने की घोषणा करते हुए कहा था कि या तो स्वयं राजा बनेंगे या राजा बनाएंगे। उन्होंने कहा था कि यूजीसी के कुछ निर्णय विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता को प्रभावित कर रहे हैं, जो उच्च शिक्षा व्यवस्था के लिए चिंताजनक है। शिक्षा नीति जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सभी हितधारकों से विचार-विमर्श आवश्यक है। सवर्ण समाज के सांसदों-विधायकों को आड़े हाथों लेते हुए सवाल किया था कि प्रयागराज में ब्राह्मण बटुकों की चोटी पकड़ी गई, उस समय समाज के नाम पर रोना रोकर सदन में पहुंचे जनप्रतिनिधि कहां थे? उन्होंने कहा कि सवर्ण समाज का हित तभी संभव है जब समाज के चिंता करने वाले लोग सदन में जाएंगे। इसके लिए उन्होंने कमर कस ली है।




साइन इन