महिला आरक्षण पर घमासान के बीच अखिलेश का एक तीर से दो निशाना, सीमा राजभर के जरिए किसे संदेश
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सीमा राजभर को समाजवादी महिला सभा का राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त कर एक बड़ा राजनीतिक दांव चला है। अखिलेश ने इससे एक तीर से दो निशाना लगाने की कोशिश की है। प्रमुख जिम्मेदारी पीडीए के हाथों में सौंपी है और ओम प्रकाश राजभर के वोट बैंक में सेंधमारी की भी कोशिश की है।

अखिलेश यादव ने सीमा राजभर को समाजवादी महिला सभा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर पिछड़े समाज के साथ महिला हितैषी होने का संदेश दिया है। उन्होंने सीमा को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने की घोषणा उस वक्त की जब भाजपा सपा को महिला विरोधी साबित करने के लिए चिलचिलाती धूप में पसीना बहा रही थी। सीमा को अध्यक्ष बनाकर एक तीर से दो निशाना लगाने की कोशिश की है। एक तरफ पीडीए के हाथ में कमान दी है तो दूसरी तरफ भाजपा के साथ सुभासपा अध्यक्ष और मंत्री ओम प्रकाश राजभर पर भी निशाना लगाने की कोशिश की है। कुछ दिन पहले ही फू्लन देवी की बहन रुकमणी निषाद को यूपी में सपा महिला सभा की कमान अखिलेश ने सौंपी थी। यूपी की योगी सरकार में ओपी राजभर की तरह संजय निषाद भी सहयोगी हैं। निषाद समाज के वोटों पर संजय निषाद अपना दावा करते रहते हैं।
सीमा राजभर के सहारे अवध से लेकर पूर्वांचल और बिहार बॉर्डर तक इस समुदाय को साधने की कोशिश की गई है। यूपी में 10 लोकसभा और 30 से अधिक विधानसभा क्षेत्रों में राजभर समाज निर्णायक भूमिका अदा करता है। वर्ष 2022 विधानसभा चुनाव में सुभासपा के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने भाजपा के खिलाफ सपा से गठबंधन किया था। मऊ, गाजीपुर, अंबेडकरनगर सहित कई जिलों में राजभर वोट नहीं मिलने से भाजपा को नुकसान हुआ था।
अखिलेश यादव ने लोकसभा चुनाव 2024 के समय पीडीए का नारा दिया था। इसके सहारे वह पिछड़े, दलितों और अल्पसंख्यकों को साधने की कोशिश में जुटे हैं। यूपी की राजनीति में यही वोट बैंक हमेशा निर्णायक भूमिका में रहा है। भाजपा जितना सपा को महिला और पिछड़ा विरोधी साबित करना चाहती है, अखिलेश उतना ही उनका हितैषी होने का सुबूत पेश करते जा रहे हैं। समाजवादी पार्टी ने महिलाओं को जोड़ने के लिए महिला सभा बना रखी है। इसकी राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रदेश अध्यक्ष दोनों अगड़ी जातियों से हुआ करती थीं।
प्रदेश अध्यक्ष रूबी श्रीवास्तव के स्थान पर फूलन देवी की बड़ी बहन रुकमणी निषाद को जिम्मेदारी दी गई। इसके बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष जूही सिंह को हटाकर राजभर समाज की सीमा को जिम्मेदारी दी गई। दोनों पिछड़ी जातियों से आती हैं। यूपी में राजभर समाज की राजनीति ओम प्रकाश राजभर और निषाद समाज की संजय निषाद कर रहे हैं। ये दोनों भाजपा के साझीदार हैं और यूपी मंत्रिमंडल में हैं। अखिलेश ने खास रणनीति के तहत इनके विकल्प के रूप में पीडीए समाज से ताल्लुक रखने वाली सीमा राजभर और रुकमणी निषाद को आगे किया है। रुकमणी निषाद की अपने समाज में अच्छी पकड़ हैं। मुलायम सिंह यादव ने फूलन देवी को सांसद बनाकर निषाद, केवट और मल्लाह जातियों को सपा के साथ जोड़ने का काम किया था। कुछ इसी तर्ज पर अखिलेश यादव ने पहले रुकमणी और अब सीमा राजभर को महत्वपूर्ण पद देकर पीडीए का दांव चला है।




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