ताजमहल पर भीड़ प्रबंधन बना चुनौती, दो यूनिवर्सिटी ने सुझाए छह उपाय, अब IIT दिल्ली भी जुटा
आगरा के ताजमहल पर पर्यटकों की बढ़ती संख्या अब एक बड़ी चुनौती बन गई है। डॉ. आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा और रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर के विशेषज्ञों ने गणितीय मॉडल तैयार किया है, जिसमें भीड़ नियंत्रण के छह महत्वपूर्ण उपाय सुझाए गए हैं।

दुनिया के सात अजूबों में शामिल ताजमहल पर बढ़ती भीड़ अब पर्यटन के साथ वैज्ञानिक और प्रबंधन की चुनौती बन गया है। इससे निपटने के लिए डा. आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा और रानी दुर्गावती विद्यालय जबलपुर के विशेषज्ञ बीते साल ही गणितीय माडल के जरिए इसका निदान बता चुके हैं। छह उपायों को सुझाया है। अब दिल्ली आईआईटी के साथ मिलकर रणनीति बनाई जा रही है।
इंटरनेशनल जर्नल आफ मल्टीडिसीप्लेनरी एंड साइंटिफिक इमर्जिंग रिसर्च में आंबेडकर विवि आगरा और रानी दुर्गावती विवि जबलपुर के विशेषज्ञों का गणितीय माडल सितंबर 2025 के अंक में प्रकाशित हुआ है। इसके मुताबिक ताजमहल पर औसतन हर रोज 20 हजार से अधिक पर्यटक आते हैं। छुट्टियों और वीकेंड (सप्ताहांत) में यह आंकड़ा 70 हजार तक पहुंच जाता है। इनमें घरेलू पर्यटक करीब 55 फीसदी, विदेशी 35 और छात्रों और ग्रुप टूर की हिस्सेदारी 10 फीसदी रहती है।
अगर एक साल के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो आगरा आने वाले पर्यटकों की संख्या 1.0 करोड़ से भी अधिक है। इसमें सिर्फ ताजमहल देखने वालों की संख्या 65 से 70 लाख के बीच रहती है। भीड़ का यही दबाव अब पर्यटकों के साथ ताजमहल के लिए मुसीबत बन गया है। इससे शहर की यातायात व्यवस्था भी चौपट हो जाती है। अध्ययन में डा. आंबेडकर विवि के इंस्टीट्यूट आफ टूरिज्म एंड होटल मैनेजमेंट के प्रो. लवकुश मिश्रा, दाऊदयाल इंस्टीट्यूट आफ वोकेशनल इंस्टीट्यूट में गणित के डा. कौशल राना, रानी दुर्गावती विवि जबलपुर के डा. अजय मिश्रा शामिल थे।
'क्यूयूइंग थ्योरी' से लगेगा अनुमान
अध्ययन में विशेषज्ञों ने क्यूयूइंग थ्योरी का प्रयोग कर उदाहरण दिया है। इससे आने वालों की दर, सेवा की क्षमता, सिस्टम में फंसे लोगों को देखा जाता है। उदाहरण के लिए 4 हजार लोग एक साथ कतार में खड़े नहीं होते। यह प्रतिघंटे के हिसाब से जमा होते रहते हैं। इसलिए इन्हें प्रतीक्षा के सिस्टम में डालना पड़ता है। लेकिन अगर यह एक ही स्थान पर फंसकर 5 हजार हो गए तो मुसीबत हो सकती है। थ्योरी से पहले ही पता लग जाएगा कि सिस्टम कब ध्वस्त हो सकता है। अलर्ट आने पर इससे बचाव के मौके मिल सकते हैं।
भीड़ का पैटर्न
सुबह 6 से 10 बजे:- भीड़ धीरे-धीरे बढ़ती है
सुबह 11:00 बजे:- पहला पीक, सबसे ज्यादा भीड़
दोपहर 12 से 2 बजे:- गर्मी के कारण हल्की गिरावट
शाम 4:00 बजे:- दूसरा पीक, शाम को दबाव
शाम 6:00 बजे:- भीड़ में धीरे-धीरे गिरावट
ऐसे बढ़ी भीड़
वर्ष घरेलू विदेशी कुल
2019 6500 1200 7700
2020 2100 200 2300
2021 3200 300 3500
2022 5400 700 6100
2023 6200 900 7100
2024 6800 1100 7900
समाधान माडल के लिए छह उपाए
1. टाइम स्लाट टिकटिंग:- हर टिकट पर परिसर के अंदर निश्चित समय भ्रमण की पाबंदी। टिकटों को रंग भी दिए जा सकते हैं।
2. डिजिटल क्यू मैनेजमेंट:- मोबाइल या मशीन से टोकन, टाइम स्लाट, नंबर मिलता है। उसी के हिसाब से प्रवेश दिया जाता है।
3. एआई आधारित पूर्वानुमान:- पुराने रिकार्ड, समय, मौसम, इवेंट, सीजन, लाइव डेटा, बुकिंग के हिसाब से आंकलन किया जाए।
4. जोन वाइज प्रवेश:- मुख्य, भीतरी, संवेदनशील हिस्सों के अलग-अलग गेट। जोन, समय पहले से तय, भीड़ इकट्टा नहीं होती।
5. रियल टाइम मानीटरिंग:- सीसीटीवी कैमरे, सेंसर से भीड़/ गर्मी का घनत्व बनाकर अलर्ट भेजता है। तात्कालिक प्रबंध हो जाते हैं।
6. ड्रोन निगरानी:- भीड़ को लाइव रिकार्ड करके संख्या बता सकता है। खतरे की जगह पहचान कर कंट्रोल रूम को खबर करेगा।




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