अब्बास अंसारी को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, बहाल हो सकती है विधायकी; जानें क्या आया आदेश
हेट स्पीच के मामले में अब्बास अंसारी को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने इस मामले में उनकी दोषसिद्धि के आदेश को स्थगित कर दिया है। साथ ही सत्र न्यायालय के सजा और दोषसिद्धि आदेश पर रोक लगाने से इनकार करने के आदेश को रद्द कर दिया है। हाईकोर्ट ने 30 जुलाई को फैसला सुरक्षित कर लिया था।

मऊ सदर सीट से सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के विधायक रहे और माफिया मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने अब्बास अंसारी की हेट स्पीच मामले में दोषसिद्धि के आदेश को स्थगित कर दिया है। साथ ही सत्र न्यायालय के सजा और दोषसिद्धि आदेश पर रोक लगाने से इनकार करने के आदेश को रद्द कर दिया है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद माना जा रहा है कि अब्बास अंसारी की विधायकी बहाल हो सकती है। बता दें कि मामले में सजा पाने के चलते इस साल जून महीने में मऊ सदर सीट से अब्बास अंसारी की विधानसभा सदस्यता चली गई थी। निर्वाचन आयोग मऊ में उपचुनाव की तैयारियों में जुटा है लेकिन अब माना जा रहा है कि उपचुनाव भी नहीं होंगे।
यह आदेश न्यायमूर्ति समीर जैन ने अब्बास अंसारी की पुनरीक्षण याचिका पर उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता दयाशंकर मिश्र व उपेंद्र उपाध्याय और राज्य सरकार के अपर महाधिवक्ता एमसी चतुर्वेदी व एजीए को सुनकर दिया है। हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की बहस पूरी होने के बाद गत 30 जुलाई को फैसला सुरक्षित कर लिया था। दोषसिद्धि पर हुआ स्थगन आदेश अपर जिला जज मऊ के समक्ष लम्बित अपील तक प्रभावी रहेगा। हाईकोर्ट ने कहा कि इस आदेश में की गई टिप्पणी का प्रभाव सजा के खिलाफ लम्बित अपील पर नहीं पड़ेगा। कोर्ट ने अपील को स्वतंत्र रूप से निस्तारित करने का भी निर्देश दिया है। कोर्ट ने राहुल गांधी केस में जनप्रतिनिधियों के अधिकारों को लेकर दिये सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया और कहा कि अधिकतम सजा दी गई है यदि थोड़ी कम सजा दी गई होती तो विधायक की निर्योग्यता नहीं होती।
अपील में सजा निलंबित करने की मांग अस्वीकार करने का केस नहीं है। अपर सत्र अदालत का आदेश अवैध है। 2022 विधानसभा चुनाव के दौरान भड़काऊ भाषण के मामले में एमपी एमएलए कोर्ट मऊ ने 31 मई को अब्बास अंसारी को दो साल कैद की सजा और तीन हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। इसी आधार पर गत एक जून को अब्बास अंसारी की विधायकी चली गई थी। एमपी/एमएलए कोर्ट के फैसले के खिलाफ अब्बास मऊ की सत्र अदालत गए लेकिन वहां से भी उनकी सजा पर रोक लगाने की अर्जी खारिज हो गई थी। सत्र अदालत ने गत पांच जुलाई को उनकी अर्जी खारिज कर दी थी।
इसके बाद अब्बास अंसारी ने यह याचिका दाखिल कर सत्र न्यायाधीश मऊ के आदेश को चुनौती दी थी। अब्बास अंसारी ने वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान एक जनसभा में सपा के सत्ता में आने पर राज्य सरकार के अधिकारियों के हिसाब किताब करने का बयान दिया था। इस बयान के बाद केंद्रीय निर्वाचन आयोग ने मुकदमा दर्ज कराया। इस मामले पर गत 31 मई को फैसला आया था और एक जून को विधानसभा सचिवालय ने मऊ सदर सीट को रिक्त घोषित कर दिया था।




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