अब्बास अंसारी को सजा से खाली सीट पर उपचुनाव की तैयारियां तेज, 2 से होगा मतदाता पुनरीक्षण
उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि एकीकृत मतदाता सूची का प्रकाशन 2 सितंबर को किया जाएगा। दो सितंबर से 17 सितंबर तक मतदाता सूची पर दावे और आपत्तियां दाखिल की जाएंगी। दावे और आपत्तियों का निस्तारण 25 सितंबर तक किया जाएगा। मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन 30 सितंबर को किया जाएगा।

भड़काऊ भाषण देने के मामले में मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी की सदस्यता रद्द होने के बाद रिक्त घोषित की गई मऊ विधानसभा सीट पर उपचुनाव से पहले मतदाता सूची का पुनरीक्षण कार्य दो सितंबर से किया जाएगा। भारत निर्वाचन आयोग की ओर से इस संबंध में पुनरीक्षण कार्यक्रम घोषित कर दिया गया है।
उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने बताया कि एकीकृत मतदाता सूची का प्रकाशन दो सितंबर को किया जाएगा। दो सितंबर से 17 सितंबर तक मतदाता सूची पर दावे और आपत्तियां दाखिल की जाएंगी। दावे और आपत्तियों का निस्तारण 25 सितंबर तक किया जाएगा। मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन 30 सितंबर को किया जाएगा। मालूम हो कि सुभासपा के विधायक अब्बास अंसारी को भड़काऊ भाषण देने के मामले में सजा सुनाई गई थी। इसके चलते उनकी विधानसभा सदस्यता खत्म कर 31 मई को सीट रिक्त घोषित कर दी गई थी।
कैसे गई अब्बास अंसारी की सदस्यता
हेट स्पीच मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने इसी साल 31 मई को सजा सुनाई थी, सजा के बाद एक जून को अब्बास की विधान सभा सदस्यता रद्द हो गई थी। बीते विधानसभा क्षेत्र चुनाव के दौरान तीन मार्च 2022 को सदर विधानसभा क्षेत्र सीट से सुभासपा के प्रत्याशी के तौर पर अब्बास अंसारी चुनाव लड़ रहे थे। इस दौरान कोतवाली क्षेत्र के पहाड़पुरा में आयोजित जनसभा में मंच से ही अधिकारियों को सबक सिखाने की धमकी दी गई थी। मामले में अभियोजन की तरफ से एसआई गंगा राम बिंद की तहरीर पर कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया था, जिसमें अब्बास समेत अन्य आरोपी बनाए गए थे।
पुलिस ने विवेचना में सदर विधायक अब्बास अंसारी और उनके भाई उमर अंसारी, इलेक्शन एजेंट गाजीपुर जनपद के पुरानी कचहरी यूसुपुर मुहम्मदाबाद निवासी चाचा मंसूर अंसारी के विरुद्ध आरोपपत्र कोर्ट में पेश किया था। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट डॉ. कृष्ण प्रताप सिंह ने अब्बास अंसारी और चाचा मंसूर अंसारी को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई थी। इसमें अब्बास को दो वर्ष साल और मंसूर अली को छह माह की सजा और 11 हजार अर्थदंड की सजा सुनाई गई थी। अब्बास को सजा सुनाए जाने के साथ ही उनकी विधानसभा की सदस्यता भी रद्द कर दी गई थी।




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