यूपी के इस जिले में ढाई लाख वोटरों पर लटकी तलवार, SIR में फंसा ये पेच
यदि आप मतदाता हैं और आपके डेटा की मैपिंग नहीं हो पाई है, तो सावधान हो जाइए। निर्वाचन आयोग के सख्त रुख के बाद अब उन मतदाताओं पर नोटिस की तलवार लटक रही है जिन्होंने गणना प्रपत्र तो जमा किया है, लेकिन पिछले SIR की जानकारी साझा नहीं की है। यूपी के इस जिले में ऐसे मतदाताओं की संख्या 2 लाख 52 हजार 413 है।

यूपी के महाराजगंज जिले की मतदाता सूची को पारदर्शी बनाने की प्रक्रिया विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अब अंतिम दौर में है। यदि आप जिले मतदाता हैं और आपके डेटा की मैपिंग नहीं हो पाई है, तो सावधान हो जाइए। निर्वाचन आयोग के सख्त रुख के बाद अब उन मतदाताओं पर नोटिस की तलवार लटक रही है जिन्होंने गणना प्रपत्र तो जमा किया है, लेकिन पिछले एसआईआर की जानकारी साझा नहीं की है। जिले में ऐसे मतदाताओं की संख्या 2 लाख 52 हजार 413 है, जिनका वंशावली विश्लेषण रिकॉर्ड के अभाव में अधर में लटका है।
जिले में कुल 19 लाख 92 हजार 459 मतदाता पंजीकृत हैं। निर्वाचन कार्यालय केआंकड़ों के मुताबिक इनमें से अब तक 84.82 फीसदी मतदाताओं का ही गणना प्रपत्र डिजिटाइज्ड हो सका है। असली पेंच मैपिंग में फंसा है। डिजिटाइज्ड मतदाताओं में से केवल 72.12 फीसदी की ही मैपिंग पूरी हुई है, जबकि 12.67 फीसदी मतदाता अभी भी नो मैपिंग की श्रेणी में हैं। 15.18 फीसदी मतदाता एएसडी (अबसेंट, शिफ्टेड, मृत) सूची में शामिल हैं। इन मतदाताओं का नाम वोटर लिस्ट से कटना लगभग तय माना जा रहा है।
नेपाली मूल की बहुएं और प्रवासियों की बढ़ी धड़कनें
सीमावर्ती जिला होने के कारण यहां बड़ी संख्या में नेपाली मूल की महिलाएं विवाह के बाद भारतीय नागरिक के तौर पर रह रही हैं। साथ ही अन्य राज्यों से आकर बसे लोगों की संख्या काफी है। चूंकि इन लोगों के पास अपनी वंशावली साबित करने के लिए पुराने स्थानीय रिकॉर्ड एसआईआर नहीं हैं, इसलिए इनका डेटा मैप नहीं हो पा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यदि वंशावली विश्लेषण नहीं होता है, तो संबंधित मतदाता को आयोग के 13 दस्तावेजों में से कोई एक दिखाकर अपनी पहचान सिद्ध करनी होगी।
जानिए नो मैपिंग और एएसडी का खतरा
जिला निर्वाचन कार्यालय के अनुसार नो मैपिंग वाले मतदाता का वर्तमान डेटा उसके पुराने रिकॉर्ड या पारिवारिक वंशावली से मैच नहीं कर रहा है। एएसडी सूची में उन लोगों को रखा गया है जो या तो स्थानांतरित हो चुके हैं, मृत हैं या पते पर अनुपस्थित हैं। नो मैपिंग वाले मतदाताओं को नोटिस जारी होगी। यदि तय समय के भीतर संतोषजनक जवाब या दस्तावेज पेश नहीं किए गए, तो सूची से नाम काट दिया जाएगा।




साइन इन