लखनऊ में 7 साल की बच्ची को कुत्तों ने मार डाला; शहर में डेढ़ लाख खूंखार कुत्ते, नसबंदी कैंपेन भी नाकाम!
लखनऊ के रहीमाबाद के तरौना गांव में 7 वर्षीय अंशिका को आवारा कुत्तों के झुंड ने नोंचकर मार डाला। खेत में लहूलुहान शव मिला। पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए भेजा। घटना से गांव में दहशत है, ग्रामीणों ने कुत्तों पर नियंत्रण की मांग की।

लखनऊ के रहीमाबाद के तरौना गांव में शाम के वक्त सात साल की मासूम बच्ची अंशिका को आवारा कुत्तों के झुंड ने नोंच-नोंचकर मार डाला। बच्ची काफी देर तक घर नहीं लौटी तो परेशान होकर उसकी मां सोनी तलाशने निकली। घर से करीब 500 मीटर दूर गांव के बाहर खेत में बच्ची की लहूलुहान लाश मिली। यह देखकर मां की चीख निकल गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। मां सोनी ने बताया कि उनकी बेटी अंशिका कक्षा एक की छात्रा थी। रविवार शाम लगभग 5:30 बजे वह अकेले घर के पास शौच के लिए गई थी। लगभग आधा घंटे तक जब वापस नहीं आई तो खोजने के लिए खेत की ओर निकली।
घर से करीब 500 मीटर दूर खेत में बेटी की लहूलुहान लाश पड़ी मिली। इस दौरान हमलावर आवारा कुत्तों का झुंड उसी खेत में कुछ दूर मौजूद था। इस घटना से तरौना गांव में सनसनी फैल गई। पीड़ित परिवार में पिता दिलीप, बेटा अंश और दूसरी बेटी राशि है। बच्ची के पिता दिलीप खेती किसानी करते हैं। इधर, घटना की सूचना पर पहुंचे रहीमाबाद थाना इंस्पेक्टर अरुण कुमार त्रिगुनायक ने बताया कि शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा रहा है।
शहर की सड़कों, गलियों और मोहल्लों में आवारा कुत्तों का आतंक कम नहीं हो रहा है। करीब डेढ़ लाख खूंखार कुत्तों की मौजूदगी लोगों के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है। शहरी क्षेत्र ही नहीं, पॉश कॉलोनियों और बाजारों में भी कुत्तों के झुंड राहगीरों को दौड़ा रहे हैं। काट रहे हैं। बच्चों और बुजुर्गों के लिए हालात ज्यादा खराब हैं।
नसबंदी अभियान, पर नतीजे अधूरे
नगर निगम का दावा है कि कुत्तों की बढ़ती आबादी को नियंत्रित करने के लिए बड़े पैमाने पर नसबंदी अभियान चलाया जा रहा है। अब तक एक लाख से अधिक कुत्तों की नसबंदी की जा चुकी है। इसके बावजूद सड़कों पर कुत्तों की संख्या कम होती नजर नहीं आ रही। जानकारों का कहना है कि अभियान की रफ्तार और निगरानी में कमी के कारण अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पा रहे हैं। शहर के कई इलाकों में कुत्तों के झुंड बाइक सवारों और पैदल चलने वालों को घेर लेते हैं। पिछले 6 महीने में 124 से ज्यादा मामले नगर निगम में दर्ज हुए हैं।
सरकारी अस्पतालों में एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगवाने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि नसबंदी के साथ-साथ ठोस कचरा प्रबंधन, नियमित मॉनिटरिंग और त्वरित रेस्क्यू टीम की व्यवस्था के बिना समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। इस दिशा में ठोस काम करना होगा।
12 जुलाई 2022
कैसरबाग बंगाली टोला में सेवानिवृत्त शिक्षिका सुशीला तिवारी को पिटबुल प्रजाति के कुत्ते ने नोचकर मार डाला था। वह पिटबुल को खाना देने गई थीं।
07 अप्रैल 2022
ठाकुरगंज के मुसाहिबगंज में एक प्राथमिक स्कूल में आदमखोर कुत्तों के मासूम राजा को नोचकर मार डाला था। हमले में उसकी बहन फातिमा गंभीर रूप से घायल हो गई थी।
आपको बता दें आवारा कुत्तों की समस्या को गंभीर मानते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कुत्तों के लिए शेल्टर होम बनाने के निर्देश दिए हैं। नगर निगम की कार्यकारिणी में इस प्रस्ताव को मंजूरी भी मिल चुकी है और शेल्टर होम के लिए जमीन भी चिन्हित कर ली गई है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि शेल्टर होम का निर्माण और संचालन शुरू होने में अभी लंबा समय लगेगा। तब तक शहरवासियों को इसी खतरे के बीच रहना पड़ेगा।




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