क्या मैं कांग्रेस अध्यक्ष बनने से मना करता? गहलोत बोले- मेरे खिलाफ रचा गया था षड्यंत्र
25 सितंबर 2022 के राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने दावा किया कि उस समय उनके खिलाफ एक बड़ा षड्यंत्र रचा गया था और पूरे देश में यह धारणा बना दी गई कि वे मुख्यमंत्री पद छोड़ना नहीं चाहते थे। जानिए गहलोत ने उस घटना के बारे में क्या कुछ बताया।

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक बार फिर 25 सितंबर 2022 के राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा, "मैं अनपढ़ नहीं हूं। मुझे कांग्रेस अध्यक्ष पद का महत्व मालूम है। अगर सोनिया गांधी और कांग्रेस मुझे उस पद के लिए चुन रही थीं तो क्या मैं मना करता?" उन्होंने ये भी दावा किया कि उस समय उनके खिलाफ एक बड़ा षड्यंत्र रचा गया था और पूरे देश में यह धारणा बना दी गई कि वे मुख्यमंत्री पद छोड़ना नहीं चाहते थे। गहलोत ने कहा कि सच्चाई इससे बिल्कुल अलग थी।
मैं अनपढ़ नहीं हूं, कांग्रेस अध्यक्ष पद का महत्व मालूम है
गहलोत ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष का पद देश की सबसे प्रतिष्ठित राजनीतिक जिम्मेदारियों में से एक है। उन्होंने याद दिलाया कि इस पद पर महात्मा गांधी, मोतीलाल नेहरू, जवाहरलाल नेहरू और सरदार पटेल जैसे नेता रह चुके हैं। उन्होंने कहा, “मैं अनपढ़ नहीं हूं। मुझे पता है कि कांग्रेस अध्यक्ष पद का महत्व क्या है। अगर सोनिया गांधी और कांग्रेस मुझे उस पद के लिए चुन रही थीं तो क्या मैं मना करता?”
गहलोत सीएम पद नहीं छोड़ना चाहते थे, यह गलत
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि आज भी देश के बहुत से लोग यह मानते हैं कि उन्होंने मुख्यमंत्री बने रहने के लिए 25 सितंबर 2022 का घटनाक्रम करवाया था। उन्होंने कहा कि यही वह धारणा है, जिसे वे गलत मानते हैं और अब उसके बारे में खुलकर बात कर रहे हैं। गहलोत ने दावा किया कि उस समय अचानक जो राजनीतिक संकट पैदा हुआ, उसके पीछे एक बड़ा षड्यंत्र था। उन्होंने कहा कि लोगों के मन में यह बात बैठा दी गई कि अशोक गहलोत मुख्यमंत्री पद नहीं छोड़ना चाहते थे, इसलिए विधायकों का विरोध हुआ। उनके मुताबिक, यह पूरी कहानी वास्तविक घटनाओं को सही ढंग से प्रस्तुत नहीं करती।
अगर हाईकमान के खिलाफ बगावत होती, तो मैं सीएम कैसे रहता
उन्होंने यह भी दोहराया कि 25 सितंबर की घटना कांग्रेस हाईकमान के खिलाफ विद्रोह नहीं थी। गहलोत का कहना है कि यदि वास्तव में हाईकमान के खिलाफ बगावत हुई होती तो कांग्रेस नेतृत्व उन्हें बाद में मुख्यमंत्री पद पर बनाए नहीं रखता। साथ ही गहलोत ने सचिन पायलट और मानेसर में हुए घटनाक्रम का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस समय कई विधायकों की नाराजगी पायलट और उनके समर्थकों की भूमिका को लेकर थी। उनके अनुसार, विधायकों का विरोध किसी व्यक्ति विशेष को लेकर था, न कि कांग्रेस नेतृत्व के खिलाफ।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने बाद में "फॉरगेट एंड फॉरगिव" का संदेश भी दिया था और हमेशा पार्टी की एकता को प्राथमिकता दी। उन्होंने कांग्रेस नेताओं से पुराने विवादों को पीछे छोड़कर संगठन को मजबूत करने की अपील की। गहलोत के इस ताजा बयान को राजस्थान कांग्रेस के भीतर लंबे समय से चले आ रहे सत्ता संघर्ष और 2022 के राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर उनकी सबसे स्पष्ट सफाई के तौर पर देखा जा रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि इतिहास में उस दौर को जिस तरह दर्ज किया गया, उससे वे सहमत नहीं हैं और अब अपनी तरफ की कहानी सामने रखना चाहते हैं।




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