गाय का दूध पीने वाले बुद्धिमान, भैंस का पीने वाले...; राजस्थान के शिक्षा मंत्री ने दिया अजीब बयान
राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कोटा में एक सभा में बोलते हुए कहा- जो लोग गाय का दूध पीते हैं, वो बुद्धिमान होते हैं और जो लोग भैंस का दूध पीते हैं, वो… शिक्षा मंत्री द्वारा दिए गए अजीब बयान पर चर्चा तेज हो गई है।

राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कोटा में एक सभा में बोलते हुए कहा- जो लोग गाय का दूध पीते हैं, वो बुद्धिमान होते हैं और जो लोग भैंस का दूध पीते हैं, वो सुस्त होते हैं। शिक्षा मंत्री द्वारा दिए गए अजीब बयान पर चर्चा तेज हो गई है। मंत्री रामगंजमंडी के गांव खेड़ली में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने गए थे। यहां उन्होंने 14 गांवों में ग्वालों की नियुक्ति कर पारंपरिक गोचरण व्यवस्था को फिर से जीवित किया। इसी कार्यक्रम में शामिल लोगों को संबोधित करते हुए एक अजीब सी थ्योरी दे दी।
गाय-भैंस से जुड़ी अजीब थ्योरी…
मंत्री ने कहा- ऐसी गायें-भैंसें चुनों, जिन्होंने 3-4 दिन पहले अपने बच्चों को जन्म दिया हो। सामने गायों और भैसों को खड़ा कर दो और दोनों के बच्चों को एक साथ छोड़ दो। भैंस का बच्चा भागकर भैंस के पीछे जाएगा। एक के पीछे जाएगा, तो पता चलेगा कि वो उसकी मां नहीं है। दूसरी के पीछे जाएगा, तीसरी के पीछे जाएगा, चौथी के पीछे जाएगा... बड़ी मुश्किल से अपनी मां को पहचान पाएगा।
लेकिन वहीं गाय का बच्चा सीधा अपनी मां के पास जाएगा और दूध पीने लग जाएगा। यानी गाय का दूध पीने वाला बच्चा विद्धान होता है। उसके पास दिमाग होता है। भैंस का बच्चा थोड़ा माइंड से ठस होता है। इसके बाद मंत्री ने कहा- गांव का आदमी ज्यादा समझता नहीं है।
मंत्री बोले- अगर बच्चों को चंचल बनाना है तो…
लेकिन मैं जानता हूं कि गाय और भैंस के बच्चे को पेट भरकर दूध पिला दो, तो भैंस का बच्चा बैठेगा और ऊंघेगा। लेकिन, वहीं गाय का बच्चा पूंछ ऊंची करके उछल-कूद करेगा। अगर अपने बच्चों को चंचल बनाना है, तो गाय का दूध पिलाओ। अगर सुस्त बनाना है, तो भैंस का दूध पिलाओ।
कौन हैं मदनलाल दिलावर
मदन लाल दिलावर राजस्थान के वरिष्ठ भाजपा नेता हैं और वर्तमान में राज्य के शिक्षा मंत्री के रूप में कार्यरत हैं। वे कोटा संभाग के रामगंजमंडी विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहे हैं और लंबे समय से सक्रिय राजनीति में हैं। संगठनात्मक पृष्ठभूमि से आने वाले दिलावर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से भी जुड़े रहे हैं, जिसका प्रभाव उनके वैचारिक रुख में देखा जाता है।




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