ये आरएसएस-बीजेपी इकोसिस्टम की साजिश,धमकी प्रकरण पर पवन खेड़ा का बयान
राजस्थान की सियासत में गुरुवार को उस वक्त उबाल आ गया, जब कोटा में एक करणी सेना कार्यकर्ता को कांग्रेस नेता Rahul Gandhi और पार्टी के 25 सांसदों को जान से मारने की धमकी देने के आरोप में पुलिस ने हिरासत में ले लिया।

राजस्थान की सियासत में गुरुवार को उस वक्त उबाल आ गया, जब कोटा में एक करणी सेना कार्यकर्ता को कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी के 25 सांसदों को जान से मारने की धमकी देने के आरोप में पुलिस ने हिरासत में ले लिया। आरोपी की पहचान राज सिंह के रूप में हुई है, जो खुद को करणी सेना का प्रवक्ता बताता है।
बजट सत्र की तनातनी से भड़की बयानबाज़ी
राज सिंह ने सोशल मीडिया पर जारी वीडियो में दावा किया कि लोकसभा के हालिया बजट सत्र के दौरान 25 कांग्रेस सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ “आपत्तिजनक शब्दों” का इस्तेमाल किया। इसी को आधार बनाते हुए उसने सांसदों की 24 घंटे में गिरफ्तारी की मांग की और चेतावनी दी कि ऐसा नहीं होने पर “घर में घुसकर गोली मार देंगे।”
वीडियो में राहुल गांधी का नाम लेकर सीधी धमकी दी गई। बयान सामने आते ही कोटा पुलिस हरकत में आई और आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी।
कांग्रेस का पलटवार- गोडसे फैक्ट्री” की संज्ञा
घटना पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी। पार्टी के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने इसे “आरएसएस-बीजेपी इकोसिस्टम की गोडसे फैक्ट्री” करार दिया। वहीं प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत सहित कई नेताओं ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा कर आरोप लगाया कि विपक्ष को बदनाम करने और हिंसा को वैध ठहराने की सोची-समझी कोशिश की जा रही है।
कांग्रेस का कहना है कि जिस कथित “दुर्व्यवहार” की बात कही जा रही है, उसका वीडियो साक्ष्य में कोई आधार नहीं दिखता। पार्टी ने आरोप लगाया कि पहले आरोप गढ़े जाते हैं, फिर उन्हें बार-बार दोहराकर माहौल बनाया जाता है और अंततः कट्टरता को हवा दी जाती है।
राजस्थान की सियासत में सख्ती का इम्तिहान
राजस्थान की धरती से निकली यह धमकी अब राष्ट्रीय राजनीति में गूंज रही है। कोटा पुलिस की त्वरित कार्रवाई को प्रशासनिक सतर्कता माना जा रहा है, लेकिन सवाल यह भी है कि चुनावी सालों में बढ़ती बयानबाज़ी और सोशल मीडिया पर उग्र भाषा पर लगाम कैसे लगेगी।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि लोकतंत्र में असहमति स्वाभाविक है, पर धमकी और हिंसा की भाषा किसी भी दल या संगठन के लिए स्वीकार्य नहीं हो सकती। फिलहाल पुलिस की जांच जारी है और पूरे मामले पर राज्य की सियासी नब्ज तेज़ धड़क रही है।




साइन इन