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JJM Scam: 900करोड़ की बंदरबांट! 10 अफसरों की कुंडली खंगाल रही ACB

राजस्थान के बहुचर्चित जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की ताबड़तोड़ कार्रवाई ने सत्ता और प्रशासनिक गलियारों में सनसनी फैला दी है। करीब 960 करोड़ रुपये के इस कथित महाघोटाले में अब तक 10 बड़े अफसरों और ठेकेदारों को गिरफ्त में लिया जा चुका है।

Thu, 19 Feb 2026 02:52 PMSachin Sharma लाइव हिन्दुस्तान
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JJM Scam: 900करोड़ की बंदरबांट! 10 अफसरों की कुंडली खंगाल रही ACB

राजस्थान के बहुचर्चित जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की ताबड़तोड़ कार्रवाई ने सत्ता और प्रशासनिक गलियारों में सनसनी फैला दी है। करीब 960 करोड़ रुपये के इस कथित महाघोटाले में अब तक 10 बड़े अफसरों और ठेकेदारों को गिरफ्त में लिया जा चुका है। 17 फरवरी को चार राज्यों में एक साथ हुई छापेमारी के बाद जांच एजेंसी ने भ्रष्टाचार के उस जाल को उधेड़ना शुरू कर दिया है, जिसने ‘हर घर नल’ के सपने को कागजों में ही दफना दिया।

छत्तीसगढ़ से दबोचा गया कथित मास्टरमाइंड

घोटाले की सबसे अहम कड़ी माने जा रहे मुकेश पाठक को मंगलवार देर रात छत्तीसगढ़ से गिरफ्तार किया गया। एसीबी सूत्रों के मुताबिक पाठक ने फर्जी दस्तावेजों का ऐसा जाल बुना, जिसके आधार पर अयोग्य फर्मों को करोड़ों के टेंडर दिलाए गए। आरोप है कि श्री श्याम और गणपति ट्यूबवेल फर्म के लिए इरकॉन के नाम से फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र तैयार किए गए। इन दस्तावेजों के दम पर तकनीकी पात्रता हासिल कर ठेके झटक लिए गए।

जांच एजेंसी का मानना है कि पाठक पूरे सिंडिकेट का “डॉक्यूमेंट आर्किटेक्ट” था, जिसने फाइलों में सब कुछ दुरुस्त दिखाने का खेल रचा। अब उससे पूछताछ में कई और नाम सामने आने की संभावना है।

जिम्मेदार अफसर ही बने आरोपी

एसीबी की कार्रवाई का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि जिन अधिकारियों पर प्रदेश को पेयजल संकट से मुक्त कराने की जिम्मेदारी थी, वही अब सलाखों के पीछे हैं। रिमांड पर लिए गए प्रमुख अधिकारियों में केडी गुप्ता (तत्कालीन चीफ इंजीनियर जयपुर ग्रामीण), दिनेश गोयल (तत्कालीन चीफ इंजीनियर पीएचईडी), सुशील शर्मा (वित्तीय सलाहकार), निरिल कुमार (वर्तमान चीफ इंजीनियर, चूरू) और शुभांशु दीक्षित (अतिरिक्त मुख्य अभियंता, जयपुर द्वितीय) शामिल हैं।

एसीबी का आरोप है कि तकनीकी और वित्तीय स्तर पर गंभीर अनियमितताओं को नजरअंदाज किया गया। घटिया सामग्री की आपूर्ति और अधूरे कार्यों के बावजूद भुगतान स्वीकृत किए गए। प्रारंभिक जांच में मिलीभगत के ठोस संकेत मिले हैं।

रिटायर्ड अफसर भी घेरे में

इस मामले में सेवानिवृत्त अधिकारियों पर भी शिकंजा कसा गया है। डी.के. गौड़ (रिटायर्ड तकनीकी चीफ इंजीनियर), अरुण श्रीवास्तव (रिटायर्ड अतिरिक्त मुख्य अभियंता), महेंद्र प्रकाश सोनी (रिटायर्ड अधीक्षण अभियंता) और विशाल सक्सेना (निलंबित अधिशाषी अभियंता) को भी आरोपी बनाया गया है। एसीबी ने साफ किया है कि सेवा निवृत्ति भ्रष्टाचार के मामलों में ढाल नहीं बन सकती।

कागजों में पाइपलाइन, जमीन पर कबाड़

जांच में सामने आया है कि कई जिलों में निम्न गुणवत्ता के पाइप लगाए गए। कुछ स्थानों पर पाइपलाइन बिछाने का कार्य सिर्फ फाइलों में दिखाया गया, जबकि जमीन पर काम अधूरा या नगण्य पाया गया। महेश मित्तल और पदमचंद जैन जैसे ठेकेदारों ने कथित रूप से फर्जी कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर करोड़ों का भुगतान हासिल किया।

सूत्रों के अनुसार, तकनीकी परीक्षण में पाइपों की गुणवत्ता मानकों से बेहद नीचे पाई गई। इससे न केवल सरकारी धन की हानि हुई, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में जलापूर्ति व्यवस्था भी प्रभावित हुई।

चार राज्यों में 15 ठिकानों पर रेड

एसीबी ने राजस्थान, दिल्ली, बिहार और झारखंड में 15 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। इस समन्वित कार्रवाई के दौरान महत्वपूर्ण दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और वित्तीय लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड जब्त किए गए। जयपुर की स्पेशल कोर्ट ने 9 आरोपियों को 21 फरवरी तक रिमांड पर भेज दिया है।

जांच एजेंसी अब बैंक खातों, संपत्ति विवरण और टेंडर प्रक्रिया की गहन पड़ताल कर रही है। सूत्रों का दावा है कि पूछताछ के दौरान कुछ प्रभावशाली राजनीतिक और प्रशासनिक नाम भी सामने आ सकते हैं।

आगे क्या?

960 करोड़ रुपये के इस कथित घोटाले ने प्रदेश की राजनीति में भी हलचल पैदा कर दी है। विपक्ष सरकार पर जवाबदेही तय करने का दबाव बना रहा है, जबकि सरकार ने जांच में पूर्ण सहयोग और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

एसीबी का कहना है कि यह कार्रवाई अभी शुरुआत है। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां संभव हैं। “जल जीवन” के नाम पर हुए इस खेल ने साफ कर दिया है कि यदि निगरानी ढीली पड़े तो विकास योजनाएं भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाती हैं।

अब सबकी नजर एसीबी की अगली चाल पर टिकी है क्या यह जांच और बड़े मगरमच्छों तक पहुंचेगी, या फिर यह भी फाइलों में सिमट जाएगी? फिलहाल, राजस्थान की सियासत और प्रशासन दोनों ही इस तूफान के बीच खड़े नजर आ रहे हैं।

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