राजस्थान का 'पीला सोना', जिसका पाकिस्तान से है खास कनेक्शन; जानिए दिलचस्प बातें
राजस्थान की पहचान आमतौर पर रेत, किलों और शाही विरासत से होती है, लेकिन इसी रेगिस्तानी धरती के नीचे छिपा है एक ऐसा खनिज, जिसे राजस्थान का पीला सोना भी कहा जाता है। जानिए इसके पाकिस्तान से क्या कनेक्शन हैं?

राजस्थान की पहचान आमतौर पर रेत, किलों और शाही विरासत से होती है, लेकिन इसी रेगिस्तानी धरती के नीचे छिपा है एक ऐसा खनिज, जिसे “राजस्थान का पीला सोना” भी कहा जाता है। यह है- ‘मुल्तानी मिट्टी’। खास बात यह है कि इस मिट्टी का नाम और ऐतिहासिक पहचान पाकिस्तान के ‘मुल्तान’ शहर से जुड़ी हुई है, जो कभी भारत का ही हिस्सा था, लेकिन बटवारे के बाद पड़ोसी मुल्क के हिस्से में चला गया था।
मुल्तानी मिट्टी: नाम में छिपा इतिहास
मुल्तानी मिट्टी का नाम मुल्तान (वर्तमान पाकिस्तान) से आया है। इतिहासकारों के अनुसार, प्राचीन काल में मुल्तान क्षेत्र से इस विशेष मिट्टी का व्यापार होता था। आयुर्वेदिक ग्रंथों और पुराने सौंदर्य उपचारों में भी “मुल्तान की मिट्टी” का उल्लेख मिलता है। 1947 के विभाजन के बाद मुल्तान पाकिस्तान में चला गया, लेकिन मुल्तानी मिट्टी का उत्पादन और व्यापार भारत, खासकर राजस्थान में तेजी से फैल गया।
राजस्थान बना मुल्तानी मिट्टी का गढ़
आज भारत में मिलने वाली उच्च गुणवत्ता की मुल्तानी मिट्टी का बड़ा हिस्सा राजस्थान के नागौर, बीकानेर, जोधपुर, बाड़मेर और जैसलमेर क्षेत्रों से आता है। यहां की शुष्क जलवायु और खास मिट्टी संरचना इसे बेहतरीन बनाती है। इसलिए राजस्थान की मुल्तानी मिट्टी को उच्च गुणवत्ता की माना जाता है, क्योंकि इसमें मैग्नीशियम, सिलिका और कैल्शियम की मात्रा संतुलित होती है।
अन्य हिस्सों में भी पाई जाती है खास मिट्टी
ऐसा नहीं है कि भारत में मुल्तानी मिट्टी केवल राजस्थान में ही मिलती है। इसके अलावा भी कुछ जगहें मशहूर हैं, जहां ये पाई जाती है। इन हिस्सों में हैं- गुजरात के कच्छ और सौराष्ट्र क्षेत्र, मध्य प्रदेश के मुरैना और शिवपुरी, आंध्र प्रदेश का अनंतपुर और तमिलनाडु में भी कुछ हिस्सों में सीमित भंडार मिलते हैं।
देश-दुनिया में क्यों है इसकी मांग?
इंटरनेशनल मार्केट में इसे “Multani Clay” या “Fuller’s Earth” कहा जाता है। कॉस्मेटिक इंडस्ट्री में इसकी खासा मांग है, इसके चलते देश-दुनिया में इसकी हमेशा मांग बनी रहती है। मुल्तानी मिट्टी सिर्फ फेस पैक तक सीमित नहीं है। इसका इस्तेमाल स्किन और हेयर केयर प्रोडक्ट्स, आयुर्वेदिक दवाओं, कॉस्मेटिक इंडस्ट्री, ऑयल रिफाइनिंग, केमिकल और फार्मा इंडस्ट्री में बड़े पैमाने पर होता है। यही वजह है कि इसकी मांग भारत से लेकर यूरोप, खाड़ी देशों और अमेरिका तक है।
मुल्तानी मिट्टी को पीला सोना क्यों कहते हैं?
मुल्तानी मिट्टी का प्राकृतिक रंग हल्का पीला से मटमैला होता है। रेगिस्तानी इलाके में दूर से देखने पर पीली परतें दिखती हैं। इसे ‘पीली मिट्टी’ कहते थे, लेकिन इसकी उपयोगिता को ध्यान में रखते हुए ‘पीला सोना’ भी कहा जाने लगा। चूंकि मुल्तानी मिट्टी एक खनिज संपदा है। इसका खनन आसानी से हो जाता है। स्थानीय मजदूर और लोग इसे सस्ती कीमत पर निकालकर बाजार में बेंचते हैं। विदेशों तक इसे निर्यात किया जाता है।




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