Jharkhand gatha: Why Birsa Munda is called 'Dharti Aba' and 'Bhagwan'; read interesting stories झारखंड गाथा: बिरसा मुंडा को क्यों कहा जाता है 'धरती का पिता' और ‘भगवान’? पढ़िए दिलचस्प किस्सा, Jharkhand Hindi News - Hindustan
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झारखंड गाथा: बिरसा मुंडा को क्यों कहा जाता है 'धरती का पिता' और ‘भगवान’? पढ़िए दिलचस्प किस्सा

झारखंड के खूंटी जिले में साल 1875 में जन्म लेने वाले एक आदिवासी बच्चे का नाम माता-पिता ने बड़े लाड़-प्यार से दाउद मुंडा रखा, लेकिन धीरे-धीरे अपने कामों के चलते समाज ने उसे भगवान और धरती का पिता (धरती आबा) कहना शुरू कर दिया।

Sun, 19 Oct 2025 08:49 PMलाइव हिन्दुस्तान रांची
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झारखंड गाथा: बिरसा मुंडा को क्यों कहा जाता है 'धरती का पिता' और ‘भगवान’? पढ़िए दिलचस्प किस्सा

झारखंड के खूंटी जिले में साल 1875 में जन्म लेने वाले एक आदिवासी बच्चे का नाम माता-पिता ने बड़े लाड़-प्यार से दाउद मुंडा रखा, लेकिन धीरे-धीरे अपने कामों के चलते समाज ने उसे 'भगवान' और 'धरती का पिता' (धरती आबा) कहना शुरू कर दिया। 'झारखंड गाथा' की इस कड़ी में पढ़िए भगवान बिरसा मुंडा के जीवन के दिलचस्प किस्से। जानिए आखिर उन्हें यह उपाधि क्यों मिली?

क्यों कहते हैं धरती का पिता और भगवान?

मुंडा जनजाति समेत आदिवासियों के लिए उनके द्वारा किए गए अहम योगदानों के लिए उन्हें भगवान का दर्जा दिया गया है। आदिवासी समाज द्वारा बिरसा मुंडा को धरती आबा के रूप में पूजा जाता है। धरती आबा यानी 'धरती का पिता'। क्योंकि, उन्होंने जल, जंगल और जमीन की रक्षा करने वाले समाज के लिए अहम लड़ाई लड़ी।

'धरती आबा' और 'भगवान' बुलाने की कहानी

बात साल 1897 की है, जब बिरसा मुंडा जेल से करीब 2 साल बाद छूटने वाले थे। जेल से रिहा होने के बाद उन्हें पगड़ी और चप्पल देने से मना कर दिया गया। जब इसके लिए सवाल किया, तो उन्हें बताया गया कि सिर्फ साहूकारों, जमीदारों और ब्राह्मणों को ही इसे पहनने की इजाजत है। जब बिरसा बाहर आए, तो उनके स्वागत में खड़े लोगों ने नारा लगाया, 'बिरसा भगवान की जय'। इस पर बिरसा मुंडा ने उन्हें रोका कि इस लड़ाई में हम सब बराबर हैं। इस पर लोगों ने कहा- हम धरती आबा के नाम से पुकारेंगे।

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25 साल में शुरू की अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई

देशभर में ब्रिटिश हुकूमत ने कब्जा कर रखा था। देशभर में खासकर जनजातियों को औपनिवेशिक हुकूमत से बचाने के लिए बिरसा मुंडा ने 25 साल से भी कम उम्र में ब्रिटिशों के खिलाफ लड़ाई शुरू कर दी थी। उन्होंने लड़ाई लड़ने के लिए गुरिल्ला युद्ध तकनीक का इस्तेमाल किया। यानी ब्रिटिशों से जुड़ी संस्थाओं जैसे पुलिस स्टेशन, सरकारी इमारत और अन्य ठिकानों पर सीधा हमला करना शुरू कर दिया गया था।

बिसाइत नामक नए धर्म की स्थापना

मुंडा जनजाति में जन्म लेने वाले बिरसा मुंडा ने समाज को जागरूक और सही राह दिखाने के लिए अहम योगदान दिए हैं। उन्होंने आदिवासी लोगों को शराब, तंत्र-मंत्र और जादू टोने के खिलाफ रहने के लिए आगे बढ़ाया। उन्होंने बिसाइत नामक नए धर्म की स्थापना की। यह धर्म एक ईश्वर में विश्वास करता था और समाज को सुधारने के लिए आचार सहिंता का पालन करता था।