राजस्थान में 2 साल से फरार इनामी आरोपी SOG के हत्थे चढ़े
राजस्थान में सीनियर टीचर भर्ती परीक्षा में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा करते हुए स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने दो इनामी आरोपियों को गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपी डमी कैंडिडेट बैठाकर परीक्षा पास कर सीनियर टीचर बन गए थे और पिछले दो साल से फरारी काट रहे थे।

राजस्थान में सीनियर टीचर भर्ती परीक्षा में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा करते हुए स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने दो इनामी आरोपियों को गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपी डमी कैंडिडेट बैठाकर परीक्षा पास कर सीनियर टीचर बन गए थे और पिछले दो साल से फरारी काट रहे थे। लगातार ठिकाने बदलकर पहचान छिपाने की कोशिश कर रहे इन आरोपियों को SOG ने दबिश देकर पकड़ लिया।
यह कार्रवाई दिसंबर 2023 में दर्ज सीनियर टीचर भर्ती चीटिंग केस में की गई है। गिरफ्तार आरोपियों में अशोक कुमार विश्नोई (29) निवासी धोरीमन्ना, बाड़मेर और विजय पाल सिंह (30) निवासी सांचौर, जालोर शामिल हैं। दोनों पर इनाम घोषित था और लंबे समय से पुलिस की पकड़ से बाहर थे।
पहचान छिपाकर काट रहे थे फरारी
SOG के एडीजी विशाल बंसल के अनुसार, आरोपी गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार अपने ठिकाने बदल रहे थे और पहचान छिपाकर रह रहे थे। टीम को इनकी गतिविधियों की सूचना मिलने के बाद सोमवार रात को बाड़मेर और जालोर में एक साथ दबिश दी गई, जहां से दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया।
बंसल ने बताया कि इस मामले में पहले भी कई आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है। अब इन दोनों की गिरफ्तारी के बाद गिरोह के नेटवर्क और गहराई से खंगाला जा रहा है।
भर्ती परीक्षा में डमी कैंडिडेट का खेल
जांच में सामने आया कि राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) द्वारा आयोजित सीनियर टीचर (द्वितीय श्रेणी) भर्ती परीक्षा-2022 में बड़े स्तर पर धांधली की गई थी। 24 दिसंबर 2022 को आयोजित सामान्य ज्ञान और शैक्षिक मनोविज्ञान विषय का पेपर लीक होने के बाद परीक्षा निरस्त कर दी गई थी, जिसे 29 जनवरी 2023 को दोबारा कराया गया।
इसी परीक्षा में आरोपियों ने अपनी जगह डमी कैंडिडेट बैठाकर पेपर दिलवाया। अशोक कुमार विश्नोई ने सामान्य ज्ञान और शैक्षिक मनोविज्ञान विषय की परीक्षा के लिए हनुमानाराम विश्नोई को अपने स्थान पर बैठाया। हनुमानाराम खुद पहले से एक सरकारी स्कूल में सीनियर टीचर के पद पर कार्यरत था।
SOG ने 17 फरवरी 2026 को हनुमानाराम को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में खुलासा हुआ कि अशोक कुमार विश्नोई डमी कैंडिडेट के जरिए परीक्षा पास कर सीनियर टीचर बन गया था।
मेन कैंडिडेट की जगह भी डमी बैठा
मामले में एक और चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ कि सूरत राम मीणा नामक मेन कैंडिडेट ने भी खुद परीक्षा नहीं दी। उसने विज्ञान विषय के लिए महिपाल विश्नोई को और सामान्य ज्ञान विषय के लिए विजय पाल सिंह को डमी कैंडिडेट के रूप में बैठाया।
महिपाल विश्नोई, जो कोटा के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस फोर्थ ईयर का छात्र है, उसे भी 17 फरवरी 2026 को गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं विजय पाल सिंह की गिरफ्तारी के लिए 10 हजार रुपए का इनाम घोषित था, जिसे अब पकड़ा जा चुका है।
गिरोह के नेटवर्क की जांच जारी
SOG अब इस पूरे रैकेट की गहराई से जांच कर रही है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह संगठित गिरोह परीक्षा में फर्जीवाड़ा कराने के लिए डमी कैंडिडेट उपलब्ध कराता था। इसके बदले मोटी रकम ली जाती थी और सरकारी नौकरियों में अवैध तरीके से चयन कराया जाता था।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ के बाद इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की भी गिरफ्तारी संभव है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि कितने और अभ्यर्थी इस तरह की धोखाधड़ी के जरिए सरकारी सेवा में पहुंचे हैं।
सिस्टम में सेंध, युवाओं के भविष्य से खिलवाड़
यह मामला सिर्फ परीक्षा में नकल या चीटिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सरकारी भर्ती प्रणाली में गहरी सेंध का संकेत देता है। डमी कैंडिडेट बैठाकर नौकरी हासिल करना न सिर्फ कानूनन अपराध है, बल्कि योग्य अभ्यर्थियों के हक पर भी सीधा हमला है।
SOG की कार्रवाई ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि भर्ती परीक्षाओं में सक्रिय ऐसे गिरोह युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। अब देखना होगा कि जांच एजेंसी इस पूरे नेटवर्क को कितनी गहराई तक उजागर कर पाती है।
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