राजस्थान के सरकारी स्कूलों में अटेंडेंस होगी स्मार्ट, फेस रिकग्निशन सिस्टम लाने की तैयारी
राजस्थान सरकार सरकारी स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों में छात्रों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS) लागू करने की योजना बना रही है।

राजस्थान सरकार सरकारी स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों में छात्रों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS) लागू करने की योजना बना रही है। इस तकनीक आधारित प्रणाली के जरिए विद्यार्थियों और शिक्षकों की हाजिरी डिजिटल तरीके से दर्ज होगी, जिससे पारदर्शिता बढ़ाने और सरकारी योजनाओं के लाभ की सही निगरानी करने में मदद मिलेगी। यह प्रस्ताव राज्य सरकार के बजट 2026–27 की घोषणाओं का हिस्सा माना जा रहा है।
3 से 6 वर्ष तक के बच्चों को भी मिलेगा लाभ
सरकार की योजना के अनुसार इस प्रणाली के दायरे में सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के साथ-साथ आंगनवाड़ी केंद्रों में नामांकित 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को भी शामिल किया जाएगा। इसका उद्देश्य बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना और उनके लिए चल रही पोषण व अन्य सरकारी योजनाओं की प्रभावी निगरानी करना है।
बजट घोषणाओं पर हुई समीक्षा बैठक
राज्य परियोजना निदेशक अनुपमा जोरवाल की अध्यक्षता में 14 मार्च को एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें बजट घोषणाओं के तहत सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) सेल से जुड़े प्रावधानों की समीक्षा की गई। बैठक में अधिकारियों ने शिक्षा व्यवस्था में तकनीक के उपयोग को बढ़ाने और डिजिटल माध्यम से सीखने की गुणवत्ता सुधारने के विभिन्न प्रस्तावों पर चर्चा की।
AI आधारित पढ़ाई और स्मार्ट शिक्षण पर जोर
बैठक में यह भी चर्चा हुई कि स्कूलों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित व्यक्तिगत शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराई जाए, जिससे छात्रों की सीखने की क्षमता के अनुसार कंटेंट तैयार किया जा सके। अधिकारियों का मानना है कि तकनीक आधारित शिक्षण पद्धतियों के जरिए बच्चों के सीखने के परिणाम बेहतर किए जा सकते हैं।
छात्रों की जरूरत के अनुसार बनेंगे AI लैब
योजना के तहत सरकारी स्कूलों में AI लैब स्थापित करने का प्रस्ताव भी शामिल है। इन लैब्स में छात्रों की सीखने की गति और जरूरत के अनुसार डिजिटल कंटेंट उपलब्ध कराया जाएगा। इसे “एडैप्टिव लर्निंग” मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे छात्रों को उनकी समझ और स्तर के हिसाब से पढ़ाई का अनुभव मिल सके।
1 अप्रैल से लागू करने की तैयारी
शिक्षा विभाग का लक्ष्य है कि यह नई उपस्थिति प्रणाली 1 अप्रैल से शुरू होने वाले नए शैक्षणिक सत्र के साथ लागू कर दी जाए। यदि योजना तय समय पर लागू होती है तो सरकारी स्कूलों में छात्रों और शिक्षकों दोनों की उपस्थिति फेशियल रिकग्निशन डिवाइस के माध्यम से स्वतः दर्ज हो जाएगी।
मैनुअल हाजिरी की जगह डिजिटल रिकॉर्ड
अधिकारियों के अनुसार नई प्रणाली लागू होने के बाद शिक्षकों को हर छात्र की हाजिरी मैन्युअली दर्ज करने की आवश्यकता नहीं रहेगी। स्कूलों में लगाए जाने वाले विशेष उपकरण विद्यार्थियों के चेहरे की पहचान कर उनकी उपस्थिति स्वचालित रूप से दर्ज कर लेंगे। इसी प्रणाली के जरिए शिक्षकों की उपस्थिति भी रिकॉर्ड की जाएगी।
पारदर्शिता और निगरानी में होगा सुधार
सरकार का मानना है कि इस डिजिटल व्यवस्था से स्कूलों में उपस्थिति की निगरानी अधिक प्रभावी हो सकेगी। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जा सकेगा कि जिन छात्रों के लिए सरकार की ओर से विभिन्न योजनाएं चलाई जा रही हैं, उनका लाभ सही बच्चों तक पहुंच रहा है या नहीं।
असम मॉडल से मिली प्रेरणा
सूत्रों के मुताबिक इस योजना को आगे बढ़ाने की प्रेरणा उस समय मिली जब जनवरी के अंतिम सप्ताह में असम के छात्रों का एक दल शैक्षणिक आदान-प्रदान कार्यक्रम के तहत राजस्थान आया था। इस दौरान वरिष्ठ अधिकारियों ने असम में लागू डिजिटल उपस्थिति प्रणाली के बारे में जानकारी ली।
असम की पहल को मिला था प्रधानमंत्री पुरस्कार
असम सरकार ने वर्ष 2022 में एक मोबाइल एप शुरू किया था, जिसके जरिए एआई आधारित सॉफ्टवेयर से छात्रों और शिक्षकों की उपस्थिति डिजिटल रूप से दर्ज की जाती है। इस पहल के माध्यम से छात्रों को मिलने वाले सरकारी लाभों की निगरानी भी संभव हुई और इस नवाचार को पिछले वर्ष अप्रैल में प्रधानमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
राजस्थान अपना मॉडल तैयार करने में जुटा
राजस्थान सरकार फिलहाल असम के मॉडल का अध्ययन कर रही है और राज्य की जरूरतों के अनुसार अपना तकनीक आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करने की दिशा में काम कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि नई तकनीक के जरिए शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, दक्षता और गुणवत्ता को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जाएगा।
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