राजस्थान सहित देशभर में संघ कार्य का विस्तार, प्रतिनिधि सभा में रखी गई रिपोर्ट
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की तीन दिवसीय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक 13 से 15 मार्च तक हरियाणा के समालखा में सम्पन्न हुई।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की तीन दिवसीय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक 13 से 15 मार्च तक हरियाणा के समालखा में सम्पन्न हुई। बैठक में संगठनात्मक कार्य के विस्तार, राष्ट्रहित में समाज की सज्जन शक्ति की सक्रिय भागीदारी, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।
यह जानकारी संघ के क्षेत्र संघचालक डॉ. रमेशचंद्र अग्रवाल ने सोमवार को जयपुर स्थित सेवा सदन में आयोजित पत्रकार वार्ता में दी। उन्होंने बताया कि प्रतिनिधि सभा संघ का सर्वोच्च निर्णय लेने वाला मंच है, जिसमें देशभर के विभिन्न क्षेत्रों से आए पदाधिकारी और प्रतिनिधि संगठन के कार्यों की समीक्षा करते हैं और आगामी कार्ययोजना तय करते हैं।
संत रविदास के संदेश को समाज में फैलाने का आह्वान
डॉ. अग्रवाल ने बताया कि बैठक के दौरान संत शिरोमणि सद्गुरु श्री रविदास जी के 650वें प्राकट्य वर्ष के अवसर पर सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले का विशेष वक्तव्य भी प्रस्तुत किया गया। इसमें समाज में एकात्मता और समरसता के लिए संत रविदास के जीवन और विचारों को महत्वपूर्ण बताया गया।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में कुछ विभाजनकारी शक्तियां समाज को जाति और वर्ग के आधार पर बांटने का प्रयास कर रही हैं। ऐसे समय में संत रविदास के संदेश को समझते हुए समाज में एकता और भाईचारे की भावना को मजबूत करना आवश्यक है। इसके लिए संघ के स्वयंसेवकों को समाज के विभिन्न वर्गों में संवाद और समरसता का वातावरण बनाने के लिए कार्य करने का आह्वान किया गया।
संगठनात्मक विस्तार पर विशेष चर्चा
बैठक में पिछले वर्ष के दौरान संघ के संगठनात्मक कार्यों की समीक्षा भी की गई। डॉ. अग्रवाल ने बताया कि देशभर में संघ की शाखाओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। लगभग छह हजार नई शाखाएं जुड़ने के बाद अब शाखाओं की कुल संख्या 88 हजार से अधिक हो गई है। वहीं संघ कार्य के स्थानों की संख्या भी बढ़कर 55 हजार से अधिक हो चुकी है।
उन्होंने बताया कि साप्ताहिक मिलन और मंडलियों की संख्या में भी वृद्धि हुई है, जिससे समाज के अधिक से अधिक लोगों तक संगठन का संपर्क पहुंच रहा है। संघ का कार्य अब देश के दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों तक फैल चुका है, जिनमें अंडमान, अरुणाचल प्रदेश, लेह और जनजातीय क्षेत्र शामिल हैं। इन क्षेत्रों में भी नियमित रूप से शाखाएं संचालित हो रही हैं।
‘पंच परिवर्तन’ के माध्यम से सामाजिक जागरूकता
डॉ. अग्रवाल ने बताया कि संघ केवल संगठन विस्तार तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए भी विभिन्न प्रयास कर रहा है। इसके लिए ‘पंच परिवर्तन’ अभियान के माध्यम से समाज को जागरूक किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि भारतीयता अथवा हिंदुत्व केवल एक विचार नहीं बल्कि जीवन शैली है, जिसमें सामाजिक सद्भाव, कर्तव्य भावना और सांस्कृतिक मूल्यों का समावेश है। इसी दृष्टि से संघ समाज की सज्जन शक्ति को संगठित कर राष्ट्रहित में सक्रिय करने का प्रयास कर रहा है।
महापुरुषों को जाति-पंथ से ऊपर स्वीकारने की आवश्यकता
क्षेत्र संघचालक ने कहा कि समाज में महापुरुषों के योगदान को जाति और पंथ के आधार पर सीमित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि इसी भावना के तहत संघ के स्वयंसेवकों ने नवम गुरु श्री गुरु तेग बहादुर जी के बलिदान के 350वें वर्ष के अवसर पर देशभर में दो हजार से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए। इन कार्यक्रमों में सात लाख से अधिक लोगों ने भाग लिया।
इसके साथ ही राष्ट्रगीत वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ भी देशभर में उत्साहपूर्वक मनाई गई। आने वाले समय में संत रविदास के 650वें प्राकट्य वर्ष के अवसर पर भी विभिन्न सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
आगामी वर्ष में 96 प्रशिक्षण वर्ग होंगे आयोजित
डॉ. अग्रवाल ने बताया कि संघ के नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रमों के अंतर्गत आगामी वर्ष में कुल 96 प्रशिक्षण वर्ग आयोजित किए जाएंगे। इनमें 11 क्षेत्रों में प्रशिक्षण वर्ग और नागपुर में एक विशेष वर्ग शामिल होगा। इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से स्वयंसेवकों को संगठनात्मक कार्य, समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया जाएगा।
दूरस्थ क्षेत्रों में भी बढ़ रही सहभागिता
उन्होंने बताया कि देश के दूरस्थ क्षेत्रों में भी संघ कार्य के प्रति उत्साह लगातार बढ़ रहा है। अंडमान के नौ प्रमुख द्वीपों से 13 हजार से अधिक लोग सरसंघचालक की उपस्थिति में आयोजित एक हिंदू सम्मेलन में शामिल हुए। इसी प्रकार अरुणाचल प्रदेश में आयोजित 21 स्वधर्म सम्मेलनों में 37 हजार से अधिक लोगों ने भाग लिया।
राजस्थान में भी बढ़ रहा संगठनात्मक विस्तार
डॉ. अग्रवाल ने बताया कि राजस्थान में भी संघ का संगठनात्मक कार्य लगातार विस्तार कर रहा है। वर्तमान में प्रदेश के लगभग 7,910 स्थानों पर संघ का कार्य संचालित हो रहा है। प्रदेश में कुल 12,109 शाखाएं और 5,950 मिलन संचालित किए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि समाज के व्यापक संपर्क के लिए प्रदेश में विभिन्न स्थानों पर हिंदू सम्मेलन भी आयोजित किए गए हैं। अब तक कुल 7,175 सम्मेलन आयोजित हो चुके हैं, जिनमें 27,918 गांवों की भागीदारी रही। इन सम्मेलनों में करीब 35,03,278 पुरुष और 41,26,687 महिलाएं शामिल हुईं। इस प्रकार कुल मिलाकर 76,30,965 लोगों की सहभागिता दर्ज की गई।
उन्होंने कहा कि इन कार्यक्रमों के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों के साथ संवाद बढ़ाने और सामाजिक सहभागिता को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।
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