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राजस्थान में रोबोटिक सर्जरी का कमाल, SMS के डॉक्टरों ने 110 किलो के मरीज को दी नई सांस

राजस्थान की राजधानी में स्थित सवाई मानसिंह हॉस्पिटल (एसएमएस) ने एक बार फिर चिकित्सा क्षेत्र में अपनी दक्षता का लोहा मनवाया है। यहां जनरल सर्जरी विभाग की टीम ने 110 किलो वजनी मरीज की जटिल रोबोटिक सर्जरी कर उसके सिकुड़ चुके फेफड़े को फिर से सामान्य कार्य करने लायक बना दिया।

Wed, 25 Feb 2026 11:12 AMSachin Sharma लाइव हिन्दुस्तान
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राजस्थान में रोबोटिक सर्जरी का कमाल, SMS के डॉक्टरों ने 110 किलो के मरीज को दी नई सांस

राजस्थान की राजधानी में स्थित सवाई मानसिंह हॉस्पिटल (एसएमएस) ने एक बार फिर चिकित्सा क्षेत्र में अपनी दक्षता का लोहा मनवाया है। यहां जनरल सर्जरी विभाग की टीम ने 110 किलो वजनी मरीज की जटिल रोबोटिक सर्जरी कर उसके सिकुड़ चुके फेफड़े को फिर से सामान्य कार्य करने लायक बना दिया। लंबे समय से सांस फूलने और लगातार खांसी से जूझ रहे 57 वर्षीय मरीज को इस सर्जरी के बाद राहत मिली है।

डॉक्टरों के अनुसार मरीज रमेश (परिवर्तित नाम), निवासी जयपुर, पिछले कई महीनों से मामूली शारीरिक श्रम—जैसे पैदल चलना, सीढ़ियां चढ़ना या थोड़ा भारी काम करने पर भी तेज सांस फूलने की शिकायत कर रहा था। साथ ही लगातार खांसी उसकी दिनचर्या का हिस्सा बन चुकी थी। प्रारंभिक जांच के बाद जब सीटी स्कैन कराया गया तो असली कारण सामने आया।

डायाफ्राम खिसकने से छोटा हुआ बायां फेफड़ा

जांच में पाया गया कि मरीज के फेफड़ों के नीचे मौजूद डायाफ्रामेटिक इवेंट्रेशन अपनी सामान्य स्थिति से काफी ऊपर खिसक चुका था। डायाफ्राम के ऊपर उठ जाने से बाएं फेफड़े को फैलने की पर्याप्त जगह नहीं मिल रही थी, जिसके कारण वह असामान्य रूप से छोटा हो गया था। यही वजह थी कि मरीज को सांस लेने में गंभीर तकलीफ और लगातार खांसी की समस्या बनी हुई थी।

एसएमएस हॉस्पिटल के सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डॉ. अमित गोयल ने बताया कि मरीज जब पिछले महीने ओपीडी में आया, तब उसकी विस्तृत जांच कराई गई। रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि यदि समय रहते सर्जरी न की जाती तो समस्या और गंभीर हो सकती थी।

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वजन बना सबसे बड़ी चुनौती

मरीज का वजन 110 किलो होने के कारण पारंपरिक ओपन सर्जरी या सामान्य दूरबीन (लैप्रोस्कोपिक) तकनीक से ऑपरेशन करना जोखिम भरा और जटिल था। ऐसे में मेडिकल टीम ने रोबोटिक सर्जरी का विकल्प चुना। यह तकनीक जटिल मामलों में अधिक सटीकता, कम रक्तस्राव और तेज रिकवरी के लिए जानी जाती है।

मरीज को 27 जनवरी को अस्पताल में भर्ती किया गया और 8 फरवरी को करीब दो घंटे तक चली रोबोटिक सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी की गई।

कैसे हुई सर्जरी?

डॉ. गोयल के अनुसार ऑपरेशन के दौरान मरीज के शरीर में कुछ छोटे-छोटे छेद किए गए। विशेष रोबोटिक उपकरणों की मदद से ऊपर खिसक चुके डायाफ्राम को सावधानीपूर्वक नीचे खींचा गया। इसके बाद उसे एक आर्टिफिशियल जाली (मेश) से सहारा देकर पेट के हिस्से के पास स्थिर किया गया, ताकि वह दोबारा ऊपर न खिसके।

सर्जरी के तुरंत बाद बाएं फेफड़े को फैलने के लिए पर्याप्त जगह मिल गई। सांस लेते समय फेफड़ा सामान्य रूप से खुलने लगा और मरीज को राहत महसूस हुई।

विशेषज्ञ टीम का सामूहिक प्रयास

इस जटिल सर्जरी में डॉ. प्रवीण जोशी, रेजिडेंट डॉ. गानवी, डॉ. रजत, डॉ. कविता, डॉ. गरिमा, डॉ. जय और डॉ. सिद्धार्थ ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं एनेस्थीसिया विभाग से प्रोफेसर डॉ. सुशील भाटी, डॉ. इंदु वर्मा और डॉ. सुनील चौहान ने सहयोग दिया।

अस्पताल प्रशासन का कहना है कि रोबोटिक सर्जरी की सुविधा से अब ऐसे मरीजों को भी बेहतर उपचार मिल रहा है, जिनके लिए पारंपरिक सर्जरी जोखिम भरी होती है।

राजस्थान में चिकित्सा सेवाओं की नई मिसाल

राजस्थान में सरकारी अस्पतालों में इस स्तर की उन्नत रोबोटिक सर्जरी होना स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार का संकेत है। राजधानी जयपुर का एसएमएस हॉस्पिटल पहले ही प्रदेश का सबसे बड़ा रेफरल सेंटर माना जाता है। अब यहां जटिल सर्जरी के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग मरीजों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरा है।

डॉक्टरों के अनुसार समय पर जांच और उपचार से ऐसी समस्याओं को नियंत्रित किया जा सकता है। सांस फूलना, लगातार खांसी या सीने में असामान्य दबाव जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

रोबोटिक सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति स्थिर है और वह तेजी से स्वस्थ हो रहा है। राजस्थान की चिकित्सा व्यवस्था के लिए यह सफलता न केवल तकनीकी दक्षता का प्रमाण है, बल्कि उन मरीजों के लिए भी राहत की खबर है जो जटिल बीमारियों से जूझ रहे हैं।

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