राजस्थान के रणथंभौर में खूनी बुखार से बाघिन की मौत, हार्ट-किडनी फेल होने से मचा हड़कंप
राजस्थान के सवाई माधोपुर स्थित रणथंभौर टाइगर रिजर्व से वन्यजीव प्रेमियों को झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। जंगल की खूबसूरती और जैव विविधता की पहचान मानी जाने वाली बाघिन टी-94 की मौत हो गई।

राजस्थान के सवाई माधोपुर स्थित रणथंभौर टाइगर रिजर्व से वन्यजीव प्रेमियों को झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। जंगल की खूबसूरती और जैव विविधता की पहचान मानी जाने वाली बाघिन टी-94 की मौत हो गई। वन विभाग की शुरुआती जांच में सामने आया है कि बाघिन की मौत सेप्टिसीमिया यानी ‘खूनी बुखार’ की वजह से हुई, जिससे उसके हार्ट, किडनी और फेफड़े फेल हो गए थे। इस घटना के बाद फॉरेस्ट लवर्स और वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट्स के बीच चिंता का माहौल बन गया है।
गश्त के दौरान मिला बाघिन का शव
दरअसल, रविवार सुबह रणथंभौर टाइगर रिजर्व के खंडार रेंज में घोड़ा घाटी के निचले इलाके में गश्त के दौरान वनकर्मियों को बाघिन मृत अवस्था में मिली। बाघिन को देखकर तुरंत इसकी सूचना वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई। इसके बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और जरूरी जांच प्रक्रिया शुरू की गई। शव को नाका राजबाग लाया गया, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की मौजूदगी में पोस्टमार्टम कराया गया।
पोस्टमार्टम में सामने आए चौंकाने वाले तथ्य
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया कि बाघिन के कई महत्वपूर्ण अंग बुरी तरह प्रभावित हो चुके थे। रिपोर्ट के अनुसार उसके फेफड़े, किडनी और हार्ट फेल हो चुके थे, जबकि शरीर की ऑर्गन केविटी में फ्लूड भी मिला है। इन संकेतों के आधार पर अधिकारियों ने प्राथमिक तौर पर सेप्टिसीमिया को मौत का कारण माना है, जिसे आम भाषा में ‘खूनी बुखार’ कहा जाता है।
डीएफओ ने बताई मौत की प्राथमिक वजह
रणथंभौर के डीएफओ मानस सिंह ने बताया कि प्रारंभिक जांच में सेप्टिसीमिया की आशंका जताई गई है। हालांकि मौत के सही कारण की पुष्टि के लिए सैंपल वेटरनरी लैब में भेजे जाएंगे। लैब की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। फिलहाल विभाग पूरे मामले की वैज्ञानिक तरीके से जांच कर रहा है।
करीब 11 साल की थी बाघिन टी-94
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार बाघिन टी-94 की उम्र करीब 11 साल थी और वह रणथंभौर के बड़े हिस्से में अपना टेरिटरी बनाए हुए थी। खंडार, ओंदी खोह, खटोला, कासेरा, मूड घुसा, इंडाला, बालाजी, घोड़ा घाटी, विंध्यकड़ा और फरिया सहित आसपास के कई वन क्षेत्रों में उसकी आवाजाही रहती थी। जंगल के इस इलाके में वह एक मजबूत टेरिटोरियल बाघिन के रूप में जानी जाती थी।
शिकार या हमले के नहीं मिले कोई निशान
घटना के बाद वन्यजीव प्रेमियों को एक राहत की बात यह भी मिली कि बाघिन के शरीर पर किसी तरह के हमले या शिकार के निशान नहीं मिले। उसके सभी अंग सुरक्षित थे, जिससे यह साफ हो गया कि उसकी मौत किसी शिकारी या दूसरे जानवर के हमले से नहीं हुई। जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद वन विभाग ने विधिवत प्रक्रिया के तहत बाघिन का अंतिम संस्कार कर दिया।
क्या होता है ‘खूनी बुखार’ यानी सेप्टिसीमिया
वेटरनरी डॉक्टर सी.पी. मीणा के मुताबिक सेप्टिसीमिया एक गंभीर संक्रमण होता है, जिसमें बैक्टीरिया खून में फैल जाते हैं और पूरे शरीर में तेजी से संक्रमण फैलाने लगते हैं। इसे पशुओं में रक्त विषाक्तता या खूनी बुखार भी कहा जाता है। इस स्थिति में जानवर को तेज बुखार आता है, सांस लेने में दिक्कत होती है और धीरे-धीरे हार्ट, किडनी और फेफड़े जैसे महत्वपूर्ण अंग काम करना बंद कर देते हैं।
गंदा पानी और कमजोर इम्युनिटी भी कारण
विशेषज्ञों का कहना है कि यह बीमारी अक्सर गंदा पानी या दूषित भोजन लेने, मौसम में अचानक बदलाव और कमजोर इम्युनिटी के कारण हो सकती है। कई मामलों में यह संक्रमण तेजी से फैलता है और संक्रमित जानवर की अचानक मौत हो जाती है। इसलिए जंगल में वन्यजीवों के स्वास्थ्य की निगरानी बेहद जरूरी मानी जाती है।
फॉरेस्ट लवर्स ने जताई चिंता
रणथंभौर में बाघिन टी-94 की मौत ने एक बार फिर वन्यजीव संरक्षण से जुड़े सवालों को सामने ला दिया है। फॉरेस्ट लवर्स का मानना है कि जंगलों में वन्यजीवों के स्वास्थ्य पर लगातार निगरानी और बेहतर प्रबंधन बेहद जरूरी है। खासकर ऐसे संक्रमणों की समय पर पहचान और रोकथाम के लिए निगरानी तंत्र मजबूत करने की जरूरत है।
रणथंभौर के लिए बड़ी क्षति
रणथंभौर टाइगर रिजर्व देश के प्रमुख टाइगर हॉटस्पॉट्स में से एक है और यहां मौजूद हर बाघ या बाघिन इस इकोसिस्टम की अहम कड़ी माने जाते हैं। ऐसे में टी-94 की मौत जंगल प्रेमियों के लिए केवल एक खबर नहीं, बल्कि प्रकृति की एक बड़ी क्षति के रूप में देखी जा रही है।
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